राष्ट्रीय एकता पर निबंध हिंदी में | National Unity Essay in Hindi

राष्ट्रीय एकता पर निबंध हिंदी में | National Unity Essay in Hindi

rashtriya ekta essay in hindi: राष्ट्रीय एकता का अर्थ है राष्ट्र के विभिन्न घटकों में परस्पर एकता प्रेम एवं भाईचारा कायम रहना. भले ही उनमें विचारों और आस्थाओं में असमानता क्यों न हो. भारत में कई धर्मों एवं जातियों के लोग रहते है, जिनके रहन सहन एवं आस्था में अंतर तो है ही, साथ ही उनकी भाषाएँ भी अलग अलग हैं. इन सबके बावजूद पूरे भारतवर्ष के लोग भारतीयता की जिस भावना से ओत प्रेत रहते है उसे राष्ट्रीय एकता का विश्व भर में एक सर्वोत्तम उदहारण के रूप में कहा जा सकता है चलिए जानते है (rashtriya ekta essay in hindi Or National Unity Essay in Hindi).राष्ट्रीय एकता पर निबंध हिंदी में | National Unity Essay in Hindi

राष्ट्रीय एकता पर निबंध हिंदी में | National Unity Essay in Hindi

राष्ट्रीय एकता का परिणाम है कि जब कभी भी हमारी एकता खंडित करने का प्रयास किया गया, भारत का एक एक नागरिक सजग होकर ऐसी असामाजिक शक्तियों के विरुद्ध खड़ा दिखाई दिया.उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीयता के लिए भौगोलिक सीमाएं, राजनीतिक चेतना और सांस्कृतिक एकबद्धता अनिवार्य होती हैं. यदपि प्राचीनकाल में हमारी भौगोलिक सीमाएं इतनी व्यापक नही थी.

यहाँ अनेक राज्य स्थापित थे, तथापि हमारी संस्कृति और धार्मिक चेतना एक थी. कन्याकुमारी से हिमालय तक और असम से सिंध तक भारत की संस्कृति और धर्म एक ही थे. यही एकात्मकता हमारी राष्ट्रीय एकता की नीव थी. भिन्न भिन्न क्षेत्रों में अपनी भिन्न भिन्न परम्पराएं एवं रीती रिवाज व आस्थाएं थी, किन्तु समूचा भारत एक सांस्कृतिक सूत्र में आबद्ध था. इसी को अनेकता में एकता कहा जाता है और यही पूरी दुनियां में भारत की अलग पहचान स्थापित कर, इसके गौरव को बढाता हैं.

राष्ट्रीय एकता की आवश्यकता और महत्व (need and importance of national integration)

हम जानते है कि राष्ट्र की आंतरिक शान्ति तथा सुव्यवस्था और बाहरी दुश्मनों से रक्षा करने के लिए राष्ट्रीय एकता परम आवश्यक हैं. यदि भारत के लोग किन्ही कारणों के चलते चिन्न भिन्न हो गये तो बहुत संभव है हमारी आपसी फूट को देखकर बहुत से लोग हम पर अधिकार करने के लिए आगे आ जायेगे. इस तरह जब तक हम में आपसी एकता होगी, तब तक कोई भी बाहरी सत्ता आकर अधिकार नहीं कर सकेगी.

जब हम हमारे इतिहास को उठाकर देखे तो जान पायेगे कि प्राचीन समय में भारत पूरी तरह एकता के सूत्र में बंधा हुआ था. किन्तु कुछ आंतरिक कमजोरियों के चलते बाहरी शक्तियों ने हम पर आक्रमण किया और यहाँ पर कब्जा कर लिया. इन विदेशी लोगों ने यहाँ अधिकार जमाने के साथ ही पहला कार्य भारत की सभ्यता एवं संस्कृति को समाप्त करने का किया. धार्मिक महत्व की चीजों को मिटाकर आपसी फूट में डालकर वे हम पर शासन करते रहे, इस तरह की सैकड़ो वर्षों के बाद जब हमें आजादी मिली तब से लोगों ने इस राष्ट्रीय एकता के महत्व को जाना हैं, मगर आज भी कई सारी समस्याओं खड़ी हो उठी है जो भारत की राष्ट्रीय एकता को बराबर चुनौती पेश कर रही हैं.

राष्ट्रीय एकता की समस्या और बाधक (challenges to national integration essay)

साम्प्रदायिकता, क्षेत्रीयता, जातीयता, अशिक्षा और भाषागत अनेकता जैसी कुछ समस्याओं ने राष्ट्रीय एकता पर खतरे की स्थिति उपस्थित की हैं. राम जन्मभूमि एवं बाबरी मस्जिद के विवाद में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा १० मई 2011 को दिए गये निर्णय में पूर्व स्थिति को बहाल करने के आदेश जारी किये गये थे. मगर 2010 इलाहबाद उच्च न्यायालय द्वारा इस विवाद पर दिए गये निर्णय से भारत में एक बार फिर से साम्प्रदायिक सौहार्द बिगड़ने तक की नौबत आ पहुची.

हमें अपनी व्यवस्था पर गर्व होना चाहिए, कि इस मामले की कोर्ट अब सुनवाई करने वाला हैं. अब कोर्ट का निर्णय आने के बाद नेता भी धर्म की ओट में वोट नही मांग सकेगे. साथ ही इस तरह के विवाद सुलझ जाने के बाद देश में फिर से राष्ट्रीय एकता का माहौल तैयार हो सकेगा.

यदि हम व्यक्तिगत तौर पर देश की एकता और अखंडता में अपना योगदान देना चाहते है तो हमे साम्प्रदायिक विद्वेष, स्पर्धा, इर्ष्या आदि राष्ट्र की एकता को समाप्त करने वाले भावों को मन से निकालकर साम्प्रदायिक सद्भाव की भावना को रखना होगा.

राष्ट्रीय एकता को खतरा (threat to national unity and integrity)

हमारे देश की राष्ट्रीय एकता को सबसे बड़ा खतरा आतंकवाद से हैं. भले ही आज आतंकवाद केवल भारत की समस्या भर न होकर एक वैश्विक समस्या का रूप धारण कर चूका हो, मगर आज भी यह हमारी एकता को सबसे बड़ा चैलेन्ज है. भारत के कुछ राज्य पंजाब, नागालैंड और झारखंड में जो समस्याएं प्रतीत हो रही है इनके पीछे का मूल आतंकवाद की समस्या ही हैं.

पिछले कुछ सालों में आतंकवाद ने इन राज्यों सहित भारत के अन्य भूभाग में भी शान्ति मिटाने के अनगिनत प्रयास किये हैं, भारत में रहने वाले जिहादी और अलगाववादी देश की एकता और अखंडता के सबसे बड़े शत्रु हैं. जिनका एक पक्ष राजनीति में भी अगुवाई कर रहा है तथा नफरत की राजनीति से अपना वोट बैंक बनाने का कार्य कर रहा है. ये कभी अल्पसंख्यक के नाम पर तो कभी आरक्षण के नाम पर लोगों को विभाजित करने के प्रयास में लगर रहते हैं.

जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा, खालिस्तान की मांग, असम से गोरखालैंड की मांग कुछ ऐसे आन्दोलन है जो राजनीति से प्रश्रय पाते हैं. भारत में रहने वाले सभी मजहब के लोग चाहे वो हिन्दू, मुस्लिम, सिख, इसाई, बौद्ध, पारसी, जैन सभी आपसी प्रेम और सद्भाव के साथ जीवन बिताना चाहते हैं. मगर ये राजनेता अपनी रोटियां सेकने के लिए इन्हें आपस में बांटने में लगे रहते हैं.

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