गैर सरकारी संगठन/NGO/समाज सेवी संस्थाओं के विषय में जानकारी | Ngo In Hindi

गैर सरकारी संगठन/NGO/समाज सेवी संस्थाओं के विषय में जानकारी (ngo in hindi )अपने निजी वित्तीय स्त्रोत से आंशिक अथवा पूर्ण सरकारी सहायता से या बाहरी सहायता से बहुधा शिक्षा, स्वास्थ्य या उद्योग धंधो के क्षेत्र में लोगों को सुविधा या सेवा प्रदान करती है. जब शिक्षा का व्यापक प्रचार नही हुआ था. तो इन्ही स्वैच्छिक संस्थाओं ने स्थान स्थान पर स्कूल कॉलेज खोलकर शिक्षा का प्रचार किया था. प्रोढ़ शिक्षा महिला शिक्षा विकलांग शिक्षा आदि के कार्य हाथ में लेकर आजादी से पूर्व व आजादी के बाद भी स्वैच्छिक संस्थाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

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केरल उत्तरप्रदेश जैसे प्रान्तों में स्कूल व कॉलेज अधिकाँश स्वैच्छिक संस्थाओं के है. जिनको सरकार 90 प्रतिशत तक या इससे भी अधिक आर्थिक अनुदान प्रदान करती है. इसी प्रकार स्वास्थ्य के क्षेत्र में अस्पताल औषधालय आदि खोलकर पिछड़े इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुचाई है.

कई संस्थानों ने अभियानों के माध्यम से चिकित्सा कैम्प, नेत्र शल्य चिकित्सा शिविर आदि लगवाने का कार्य भी हाथ में लिया है. कुष्ट निवारण विकलांग सेवा आदि कार्य भी किये है. जो सेवा के अनूठे उदहारण है. जिनसे कई स्वंयसेवी संस्थाएँ के नाम अमर हो गये है.

उत्तरकाल में शिक्षा और स्वास्थ्य की कमी इन संस्थाओं का प्रादुभाव हुआ जिन्होंने काफी फीस लेकर शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जिससे संस्थाएं न केवल स्वावलंबी बनी बल्कि बचत और लाभ का साधन भी बन गई. उच्च आय वर्ग के लोगों के लिए वे आकर्षण का केंद्र बनी. ऐसी संस्थाओं का उद्भव और विकास हुआ जिन्होंने सरकारी उत्तरदायित्व को पूरा किया.

जो कार्य स्वयं सरकार को पूरा करना चाहिए था उसे स्वंय सेवी संस्थाओं को सौप दिया व बजट की राशि उनको दे दी गई.संस्था ने सरकारी शर्तो के अनुसार कार्य पूरा किया और अपना हिसाब सरकार को पूरा दे दिया. इस प्रकार से सरकार के उप ठेकेदार के रूप में कार्य किया.

सरकार की अपेक्षा संगठन द्वारा कार्य होने में कई लाभ है. गैर सरकारी संगठन समुदाय और जनता के नजदीक है उनकी कार्यशैली में लचीलापन है.और जनसहयोग प्राप्त करने में भी इसकी विशेष भूमिका है. इस कारण सरकार ने इन संस्थाओं को अपना माध्यम बनाना उचित समझा, परन्तु इनमे एक कमी यह रही कि इनका कार्य क्षेत्र और दायित्व सुविधा जुटाने तक ही सिमित था. जो सरकार को देनी थी. वह संस्था ने दी अर्थात सरकार की जगह इन गैर सरकारी संगठन ने ले ली.

यदि ये गैर सरकारी संगठन अधिक कुशल और जनसेवी थी. तो जनता को अधिक लाभ मिला, किन्तु यदि अशक्त थी लोभी व्यक्तियों के हाथ में थी तो जनता को लाभ की बजाय हानि हुई.

कुछ संस्थाएँ ऐसी बनी जिन्होंने लोगों में योग्यता का विकास करना उचित समझा जैसे साक्षरता का प्रचार, उद्योगों में प्रशिक्षण जन चेतना का विकास शोषको से मुक्ति आदि. इन गैर सरकारी संगठन ने लोगों को निर्भर न बनाकर उन्हें योग्य बनाकर स्थति में सुधार लाने का प्रयत्न किया. जहाँ गहन गरीबी थी वहां उद्योगों का विकास किया प्रशिक्षण द्वारा लोगों को योग्य बनाया. इनमे से कुछ योजनाओं में सरकार और कुछ विदेशी संस्थाओं द्वारा आर्थिक अनुदान मिला.

यह संस्थाएँ प्रथम श्रेणी की संस्थाओं में अग्रणी है, परन्तु शनै शनै लोगों की आदत इन संस्थाओं पर निर्भर करने की सी हो गई. संस्था की गतिविधि है तब तक लोग जागरूक है और जब संस्था चली गई तो लोग पुनः अपने पुराने ढर्रे में आ गये. संस्था ने इन लोगों को शक्तिमान नही बनाया. लोगों को शक्ति प्राप्त हो और वे सक्षम बने इसकी आज महती आवश्यकता है.

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