2 अक्टूबर गाँधी जयन्ती 2019 कब है निबंध भाषण इतिहास गाधी जयन्ती इन हिंदी

2 अक्टूबर गाँधी जयन्ती 2019 कब है निबंध भाषण इतिहास गाधी जयन्ती इन हिंदी: आज पूरा देश सत्य व अहिंसा के पुजारी मोहनदास करमचन्द गांधी की जयंती को मना रहा हैं. 2 अक्टूबर 2019 गाँधी जयन्ती है, इस दिन प्रिय बापू का जन्म गुजरात के पोरबंदर में 1869 ई में हुआ था. उनके जन्म दिवस को गाधी जयन्ती और विश्व अहिंसा दिवस के रूप में हर साल 2 अक्टूबर को मनाते हैं. 2 अक्टूबर महात्मा गांधी पर भाषण स्पीच जयंती भाषण मराठी निबंध शायरी हिंदी में के सम्बन्ध में आज का यह लेख गाँधी जयन्ती 2 अक्टूबर पर आधारित हैं.

2 अक्टूबर गाँधी जयन्ती 2019 कब है

2 अक्टूबर गाँधी जयन्ती 2019 कब है

आदरणीय मुख्य अतिथि महोदय, सम्मानित भद्रजनों और मेरे प्यारे भाइयों-बहनों आज हम एक ऐसे महामानव की जयन्ती को सेलिब्रेट करने के लिए एकत्रित हुए हैं जिन्हें भारत ही दुनियां भर में जाना पहचाना जाता हैं भारत के लोगों ने इनके योगदान को देखते हुए गांधीजी को राष्ट्रपिताबापू की उपाधि दी थी. उनका जीवन परिचय, जीवनी, हिस्ट्रीविचार प्रत्येक व्यक्ति के लिए प्रासंगिक हैं.

2 अक्टूबर गाँधी जयन्ती पर निबंध 2019 इन हिंदी

“भारतवासी महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता या बापू कहकर पुकारते हैं. वह अहिंसा के अवतार, सत्य के देवता, अछूतों के प्राणधार एव राष्ट्र के पिता थे. इस महामानव ने ही दीन दुर्बल, उत्पीड़ित भारतमाता को पराधीनता की बेड़ियों से मुक्त कराया था.”

महात्मा गांधी [गान्धी गाँधी गाधी] का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को काठियावाड़ प्रान्त के अंतर्गत पोरबंदर के एक सम्पन्न परिवार में हुआ था. इनका पूरा नाम मोहनचंद करमचंद गाँधी हैं. इनके पिताजी करमचंद गांधी राजकोट के दीवान थे. इनकी माता पुतलीबाई थी, जो एक धर्म परायण एवं आदर्श महिला थी. गांधीजी का विवाह कस्तूरबा के साथ हुआ. वह शिक्षित नहीं थी, फिर भी उन्होंने जीवन भर गांधीजी का साथ दिया.

इनकी शुरूआती शिक्षा अपने ही शहर राजकोट में सम्पन्न हुई थी. राजकोट से दसवीं पास करने के बाद कानून की पढाई करने के लिए गांधीजी वर्ष 1888 में लन्दन चले गये. तथा तीन वर्षीय लो कोर्स करने के बाद 1891 में स्वदेश लौट आए. उस वक्त उनकी माता जी का देहांत हो गया था. वे मुंबई कोर्ट में प्रेक्टिस करने लगे. इसी दौरान एक गुजरात के कारोबारी के मुकदमा उनके हाथ लगा जिसकी सुनवाई के लिए उन्हें साउथ अफ्रीका जाना पड़ा.

उन्हें वहां तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ा, द्वितीय श्रेणी के डिब्बे से निकाल देना, अदालत में पगड़ी उतरवाना. मगर वे इन घटनाओं से विचलित न होकर अपने लक्ष्य पर टिके रहे. इस तरह अंत में गांधीजी के प्रयासों से वहां भारतीयों को सम्मान जनक स्थान मिला. 20 साल अफ्रीका में रहकर जब गाँधी भारत आए तो उनका खूब आदर सत्कार किया गया.

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