पापांकुशा एकादशी व्रत कथा और पूजा विधि | Papankusha Ekadashi Vrat Katha In Hindi

पापांकुशा एकादशी व्रत कथा और पूजा विधि | Papankusha Ekadashi Vrat Katha In Hindi

आश्विन शुक्ल एकादशी को यह व्रत किया जाता हैं । यह एकादशी पापरूपी हाथी को महावत रूपी अंकुश को बेधने के कारण पापाकुंशा कहलाती हैं । इस दिन भगवान विष्णु की पूजा ब्राह्मण को भोजन कराना वांछनीय हैं । इस एकादशी के दिन उपवास, व्रत रखने से भगवान समस्त पापों को नष्ट कर देते हैं। पापांकुशा एकादशी की व्रत कथा हिंदी में पूजन विधि, पापांकुशा एकादशी 2018 डेट टाइम मुहूर्त इसका महत्व आदि की जानकारी इस आर्टिकल में दी गयी हैं।

पापांकुशा एकादशी व्रत कथा और पूजा विधि

Papankusha Ekadashi Vrat Katha In Hindiपापांकुशा एकादशी व्रत कथा और पूजा विधि | Papankusha Ekadashi Vrat Katha In Hindi

पापांकुशा एकादशी व्रत कथा (Papankusha Ekadashi Vrat Katha In Hindi)

कथा- विंध्य पर्वत पर महाक्रूर क्रोधन नामक एक बहेलिया रहा करता था। उसने हिंसा, लूट पाट, मिथ्या भाषण तथा मद्यपान में ही अपनी सारी जिंदगी को गुजार दिया था। जीवन का अंतिम समय आया तब यमराज ने क्रोधन को एक दिन पूर्व दरबार में लाने हेतु दूतों को आज्ञा दी। दूतों ने यह बात उसे बता दी।

मृत्यु भय से आक्रांत वह नृशंस अंगिरा ऋषि के आश्रम में पहुंचा। ऋषिवर ने उसके अनुनय विनय से प्रसन्न होकर आश्विन शुक्ल एकादशी का व्रत तथा भगवान् विष्णु के पूजन का विधान बताया। इस प्रकार ब्याध विधि व्रत पूजन कर भागवत कृपा से विष्णु लोक को गया। उधर यमदूत हाथ ही मलते रह गए।

पापांकुशा एकादशी 2018 डेट टाइम मुहूर्त (Papankusha Ekadashi 2018 Date Muhurat)

हर वर्ष पापांकुश एकादशी का व्रत आसोज मास की शुक्ल एकादशी के दिन किया जाता हैं। अंग्रेजी महीने के अनुसार यह अक्टूबर माह में पड़ता हैं। इस साल 2018 में यह 20 अक्टूबर शनिवार के दिन हैं, एकादशी तिथि का आरम्भ समय, समाप्ति एवं पराना का मुहूर्त इस प्रकार हैं।

पापांकुश एकादशी 2018 की तिथि समय की जानकारी –

एकादशी तिथि शुरू 19 अक्टूबर, 2018 समय 17:57
एकादशी तिथि ख़त्म 20 अक्टूबर, समय 20:01
हरी वासरा ख़त्म होगा 19 अक्टूबर 08:50
पराना समय 06:29 से 08:43

पापांकुशा एकादशी पूजा विधि (Papankusha Ekadashi Pooja Vidhi)

अर्थ, मोक्ष और काम तीनो का नाश कर मोक्ष प्रदान करने वाली आश्विन की पापांकुशा एकादशी के दिन विष्णु जी का व्रत रखकर उनकी पूजा की जाती हैं। ब्रह्माण्ड पुराण में इस एकादशी की पूजा विधि के बारे स्पष्ट निदिष्ट किया गया हैं। जो स्त्री पुरुष इस पाप निरोधक एकादशी का व्रत धारण करना चाहता हैं हैं उन्हें जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद भगवान् विष्णु जी की पूजा करनी चाहिए। बिना कुछ खाए पीए पूर्ण श्रद्धा भक्ति के साथ व्रत रखे तथा रात को विष्णु जी के नाम रात्रि जागरण करे।

इस एकादशी का दान पुण्य अगले दिन द्वादशी तिथि को किया जाता हैं इस दिन सोना, तिल, भूमि, गौ, अन्न, जल, छतरी और जूती आदि का दान ब्राह्मण को दिया जाना चाहिए।

पापांकुश एकादशी महत्व (Papankusha Ekadashi Significance Importance) –

अच्छे स्वास्थ्य परिवार में सुख समृद्धि तथा अपने अतीत के पापों का प्रायश्चित करने के लिए इस एकादशी का व्रत किया जाता हैं। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार जो विष्णु जी के भक्त हैं जो विष्णु जी का तथा जो अन्य आराध्य को मानते हैं उनकी इस दिन पूजा की जाती हैं।

जों इंसान अपने पापों को धोना चाहते है, मौत के बाद यमलोक में न जाकर मोक्ष की प्राप्ति करना चाहते हैं उन्हें यह व्रत चाहिए। पापांकुश एकादशी व्रत कथा के अनुसार जितना इस दिन के व्रत का महत्व हैं उससे बढ़कर दान पुण्य का महत्व हैं। इसलिए अपने सामर्थ्य के अनुसार दान पुण्य जरूर करे।

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