Paragraph On Diwali In Hindi | दीवाली पर अनुच्छेद

Paragraph On Diwali In Hindi दीपावली जिन्हें दिवाली और दीपों का त्यौहार भी कहा जाता है. यह हिंदुओ का मुख्य पर्व है. इसके आने का इन्तजार हम सभी को रहता है दिवाली से कुछ दिन पूर्व ही घरों की साफ़-सफाई के कार्यक्रम शुरू कर दिए जाते है. इस अवसर पर घर को लाइट्स के साथ सजाया जाता है. 5 दिन तक चलने वाले इस दिवाली त्यौहार की शुरुआत धनतेरस से मानी जाती है. जो भाई दूज और गौवर्धन पूजा के साथ समाप्त होता है. हर वर्ष दिवाली दशहरे के 20 दिन बाद अक्टूबर महीने के मध्यांतर में मनाई जाती है. हिन्दू कैलेंडर के अनुसार इसे कार्तिक महीने की अमावस्या के दिन मनाया जाता है.

Paragraph On Diwali In Hindi | दीवाली पर अनुच्छेद

इतिहास (history)

विजय पर्व के रूप में दीवाली का पर्व हजारों सालों से मनाया जाता रहा है. इसे मनाने के पीछे कई सामाजिक और धार्मिक कारण जुड़े हुए है. असत्य पर सत्य की बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में इसे मनाने की मुख्य कथा भगवान् श्री राम से जुड़ी हुई है. कहते है राम जी इसी दिन रावण को मारकर अयोध्या लौटे थे. माता सीता, लक्ष्मण और श्रीराम जी के 14 वर्ष बाद दर्शन करने के बाद अयोध्यावासियों ने घी के दिए जलाकर इनका स्वागत किया. इसी परम्परा का निर्वहन करते हुए हम हर साल दीपोत्सव मनाते है.

दिवाली की तैयारियों कार्तिक महीने की शुरुआत से ही हो जाती है. कई दिनों तक पटाखों की गूंज और बाजार में नये कपड़ो, मिठाइयों व पटाखों की रौनक बया कर देती है कि दीपोत्सव आ गया है. भारत के अतिरिक्त इसे कई अन्य देशों में भी मनाया जाता है. इस दिन का सिख धर्मं में भी महत्वपूर्ण स्थान है कार्तिक अमावस्या के दिन ही सिख सम्प्रदाय के छठवें गुरु हरगोविन्द जी को इसी दिन जहांगीर ने ग्वालियर जेल से लम्बी यातना के बाद रिहा किया था.

दिवाली मनाने के कारण (Reasons to Celebrate Diwali)

  1. पहला और मुख्य कारण जैसा कि ऊपर बताया जा चूका है, भगवान् श्रीराम के 14 वर्ष के वनवास पूर्ण होने व रावण को मारकर वापिस अयोध्या लौटने पर लोगों ने उनके स्वागत के रूप में घी के दीपक जलाकर इस पर्व की शुरुआत की. अधिकतर हिन्दू लोग इसी मान्यता का पालन करते हुए दीवाली का पर्व मनाते है.
  2. बलि नामक राजा ने एक वर के दम पर इंद्र, लक्ष्मी सहित सम्पूर्ण देवो को अपने अधिकार में कर देवलोक पर अधिकार कर लिया था. तथा सभी देवी देवताओं को अपनी कैद में बंद कर दिया. इस बड़ी समस्या को सुलझाने के लिए विष्णु जी ने ब्राह्मण का रूप धारण कर बलि से तीन कदम जमीन दक्षिणा में मागी थी. विष्णु जी अपने आकार को बढ़ाते हुए सम्पूर्ण देवलोक पर अपने पैर रखते हुए दीपावली के ही दिन बलि की कैद से सभी देवों को मुक्त करवाया था. जिनमे माँ लक्ष्मी भी थी. मान्यता है कि कैद से मुक्त होने के बाद सभी देव विश्राम के लिए सोने चले जाते है इसी परम्परा को मानते हुए लोग अपने घरों की साफ़ सफाई करते है ताकि लक्ष्मी जी सहित सभी देव उनके घर विराजे.
  3. कार्तिक माह की अमावस्या के समय गर्मी तथा वर्षा ऋतू समाप्ति पर शरद ऋतू का आगमन होता है. किसानों की खरीफ की फसल दिवाली तक पककर तैयार हो जाती है इस अवसर पर किसान अपने अधिष्टात्री देवी/देवता को नए अन्न का भोग लगाकर उनका धन्यवाद ज्ञापित करते है.
  4. कार्तिक अमावस्या के दिन ही धन और एश्वर्य की देवी महालक्ष्मी का जन्मदिन भी है. महर्षि भृगु की पत्नी ख्याति के गर्भ से लक्ष्मी का जन्म इसी दिन हुआ था.
  5. इसी दिन सरस्वती और स्वामी रामतीर्थ और महावीर स्वामी ने अपने जीवन का त्याग किया था.
  6. दिवाली का अपना वैज्ञानिक महत्व भी है कई शोधों में यह प्रमाणित हो चूका है कि घी के दीपक की रौशनी से वातावरण में स्वच्छता तथा वर्षा ऋतू में पनपे हानिकारक जीवों और कीटाणुओं को समाप्त करने के लिहाज से भी इसका महत्व है.

दिवाली का अर्थ (Meaning of diwali)

दीपोत्सव यानि दीपों के त्यौहार को दीपावली कहते है.जो दो शब्दों से मिलकर बना है दीप और अवली दीप का अर्थ दिये से और अवली का अर्थ पक्ति, श्रंखला या दीप माला होता है.

स्कन्दपुराण में इसे सूर्य के हिस्से के रूप में भी दीपक को दर्शाया गया है.दीपावली का अर्थ है दीपों कि पंक्ति, अर्थात अँधेरे से उजाला, लेकिन कौन सा उजाला और कौन सा अंधकार?

दीपावली अर्थात युरेशियनों की भारत के मूल निवासियों अर्थात नागवंशियों पर विजय प्राप्त करने का दिन।

दिवाली पर लक्ष्मीपूजा (Lakshmi Puja on Diwali)

दीपावली के दिन लक्ष्मी पूजा का विशेष महत्व है, माँ लक्ष्मी के आगमन के लिए लोग घरों की साफ़-सफाई कर दीयों से उजाले से सारे जहाँ को रोशन करते है. शुभ मुहूर्त के अवसर पर लक्ष्मी की पूजा अराधना की जाती है. इस दिन कई जगहों पर नए वर्ष की शुरुआत भी मानी जाती है. एक दुसरे को दीवाली के पर्व की बधाईया, उपहार दिए जाते है.

मुख्यत सम्पूर्ण व्यापारी वर्ग इस दिन से नए साल की शुरुआत (नव वर्ष) करते है. इसी दिन से पुराने बही खातों को नए बही में श्रीगणेश किया जाता है. भारत में अमृतसर और बम्बई की दिवाली विशेष तौर पर प्रसिद्ध है. सारा शहर इस दिन रौशनी के उजाले में जगमगा में नहा जाता है दिवापली का द्रश्य बेहद मनमोहक होता है.

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