Parivar Gk Notes In Hindi What Is Family Meaning Essay On Single & Nuclear Family In India

Parivar Gk Notes In Hindi: स्वागत है आपका आज हम परिवार पर नोट्स, जानकारी Family Gk Notes In Hindi आपके साथ शेयर कर रहे हैं. आज के इस आर्टिकल में हम जानेगे कि Parivar Gk Notes In Hindi What Is Family Meaning Essay On Single & Nuclear Family In India परिवार का अर्थ, प्रकार, परिभाषा, प्रकार संयुक्त तथा एकल परिवार के लाभ व हानियाँ types of family, disadvantages of nuclear family, joint family vs nuclear family essay को इन पॉइंट्स के जरिये समझेगे.

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परिवार का अर्थ, परिभाषा, प्रकार, तत्व एवं कार्य Meaning of family, definition, type, element and function

Parivar Gk Notes In Hindi

  • अंग्रेजी शब्द Family लैटिन/ रोमन शब्द famulus से बना है जिसका अर्थ है नौकर
  • परिवार एक महत्वपूर्ण एवं प्राथमिक सामाजिक संस्था है तथा समाज की वह आधारभूत इकाई है जिसका निर्माण सामान्यत एक स्त्री व एक पुरुष के वैवाहिक एवं यौन सम्बन्धों से होता हैं. तथा एक ऐसी प्राथमिक संस्था है जो बच्चे के जन्म की प्रक्रिया को वैध बनाता हैं.
  • परिवार समाज का केंद्र हैं.
  • सामान्यतः परिवार पति पत्नी व बच्चों का समूह है परन्तु संसार में अधिकांश स्थानों पर सम्मिलित वास वाले रक्त सम्बन्धियों का समूह हैं. जिसमें विवाह एवं दत्तक प्रथा द्वारा स्वीकृत व्यक्ति भी शामिल हैं.
  • परिवार ही बालक में सामाजिकता विकसित करने वाली प्रथम संस्था हैं.
  • मैकाईवर एवं पेज ने अपनी पुस्तक Society में कहा था कि परिवार एक ऐसा समूह है जो यौन सम्बन्धों पर आधारित है व इतना छोटा है कि संतान जन्म व पालन पोषण की व्यवस्था रखता हैं.
  • सिडनी ई गोल्डस्टोन – परिवार एक झूला है, जिससे भविष्य का जन्म होता हैं.

परिवार की विशेषताएं लक्षण

  1. पति पत्नी की वैवाहिक व्यवस्था
  2. संतानोत्पत्ति की वैधता
  3. पारस्परिक निर्भरता
  4. भावनात्मक जुड़ाव सहयोग
  5. साझा निवास व कार्य व उत्तरदायित्व का विभाजन
  6. सामूहिक भोजन/ साझा चूल्हा
  7. प्राथमिक, सर्वव्यापी, दीर्घकालीन सामाजिक संस्था
  8. संस्थानों का हस्तांतरण करने वाली संस्था

मैकाईवर के अनुसार यौन आवश्यकता की स्थाई पूर्ति, संतानोत्पत्ति व संतान लालन पालन व परिवार का प्रबंधन परिवार के अनिवार्य कार्य हैं जबकि धार्मिक कार्य, स्वास्थ्य व मनोरंजन सम्बन्धी कार्य, शिक्षा, आर्थिक कार्य आदि परिवार के ऐच्छिक कार्य हैं.

परिवार की उत्पत्ति के सिद्धांत

शास्त्रीय सिद्धांत

  • प्रतिपादक- अरस्तू, प्लेटो आदि
  • सर हेनरीमेन ने 1861 ई में इस सिद्धांत का विकास किया
  • इस सिद्धांत के अनुसार प्रारम्भ में परिवार पितृसत्तात्मक, पितृवंशीय एवं पितृस्थानीय हुआ करते थे.

यौन साम्यवाद का सिद्धांत

  • समर्थक-मार्गन, फ्रेजर, ब्रिफाल्ट
  • यह सिद्धांत यौन स्वच्छन्दता से परिवार की उत्पत्ति का मत मानता है अर्थात कोई भी पुरुष किसी भी स्त्री से यौन संबंधो की स्थापना कर सकता था, जिससे पितृत्व निर्धारण कठिन हुआ करता था, फलतः मातृसत्तात्मक परिवार ही प्रारम्भिक समूह बने.
  • मार्गन ने कहा था कि आदिम समाजों में सिब ही एकमात्र समुदाय था जिसमें यौन साम्यवाद प्रचलन में था.

एक परिवार का सिद्धांत

  • प्रतिपादक- वेस्टरमार्क
  • समर्थक- जुकरमैंन, मैलिनोवस्की
  • वेस्टरमार्क के अनुसार जब पुरुष सम्पति की भांति स्त्री पर एकाधिकार करने में सफल हुआ तो एक विवाह प्रथा विकसित हुई, जिससे परिवार नामक संस्था का उदय हुआ.
  • मैलिनोवस्की ने अपनी पुस्तक सेक्स एंड रिप्रेशन इनसेवेज सोसायटी में बताया कि मनुष्य पाशविक अवस्था से एक विवाही परिवार नामक संस्था को अपने साथ लाया.

मातृसत्तात्मक परिवार

  • प्रतिपादक- ब्रिफाल्ट
  • समर्थक- टायलर
  • इस सिद्धांत के अनुसार पति पत्नी सम्बन्ध के बजाय प्रारम्भ में माता पुत्र सम्बन्ध अधिक घनिष्ठ थे.
  • टायलर के अनुसार परिवार का प्रारम्भिक स्वरूप मातृसत्तात्मक व फिर पितृसत्तात्मक हुआ.

उदविकासीय सिद्धांत

  • समर्थक- बैकोफन, हैबीलैण्ड, फ्रचफील्ड मार्गन, टायलर, लुबोक आदि

बैकोफन के अनुसार उद्विकास का क्रम

  1. आदि परिवार
  2. बहुपति विवाही परिवार
  3. बहुपत्नी परिवार
  4. एक विवाही परिवार

टायलर के अनुसार उद्विकास का क्रम

  1. मातृसत्तात्मक
  2. पितृ मातृ मिश्रित
  3. पितृसत्तात्मक

मार्गन के अनुसार उद्विकास क्रम

  • समरक्त परिवार- कुछ सम्बन्धियों से बना परिवार
  • समूह परिवार- कुछ भाई, कुछ औरतों से शादी करते थे तथा फिर कोई भी व्यक्ति किसी औरत से यौन सम्बन्ध स्थापित कर सकता था परन्तु समूह के बाहर यौन सम्बन्ध निषेध
  • सिन्डेस्मिन परिवार- एक आदमी व एक औरत की शादी पर कोई नियम कायदे नहीं कोई भी अपनी इच्छा से पृथक नहीं हो सकता.
  • पितृसत्तात्मक परिवार- पिता प्रधान परिवार
  • एकविवाही परिवार- पति के पत्नी पर एकाधिकार से एक विवाही परिवार बने.

भारत के खस व टोडा जनजातियों व तिब्बत के कुछ क्षेत्रों में बहुपति प्रथा हैं.

परिवार के प्रकार

मूलतः परिवार के दो प्रकार होते हैं.

  • एकल परिवार
  • संयुक्त परिवार

एकल परिवार का अर्थ परिभाषा स्वरूप Parivar Notes In Hindi

ऐसा परिवार जिसमें एक विवाहित युगल हो अर्थात जिसमें पति पत्नी व उनके अविवाहित बच्चे रहते हो एकल परिवार कहलाता हैं.

  • मूल एकल परिवार

पति- पत्नी अथवा पति पत्नी + अविवाहित बच्चे

  • अनुपूरित

    एकल परिवार

पति- पत्नी + अविवाहित बच्चे + एक/अधिक अविवाहित या तलाकशुदा या विधुर विधवा रिश्तेदार

  • उप मूल परिवार

विधवा/विधुर + उसके अविवाहित बच्चे या सगे (अविवाहित/तलाकशुदा/विधवा विधुर) भाई बहिन

  • अनुपूरित मूल परिवार

विधवा+ उसके अविवाहित बच्चे + विधवा की सास (विधवा व विधवा की सास साथ रहे तो अनुपूरित मूल परिवार कहलाएगा.

एकल परिवार के लाभ

  • आर्थिक परेशानियां कम
  • बच्चों को सुविधाएं देने में माता पिता सक्षम
  • सामान्यतः खुश/सुखी
  • बच्चों में आत्मनिर्भरता व निर्णय क्षमता का विकास
  • कुरीतियों का त्याग

दोष

  • बच्चे पारिवारिक संबंधो के महत्व से अपरिचित रहते हैं.
  • बच्चों में अकेलापन
  • जिम्मेदारियां निभाने में कठिनाई

संयुक्त परिवार का अर्थ प्रकार लाभ और विशेषताएं

पति पत्नी व उनके अविवाहित पुत्रों के अतिरिक्त विवाहित पुत्र व पुत्रवधुएँ, पौत्र पौत्री/ चाचा/ चाची/दादा/दादी जैसे सदस्य रहते हैं. न्यूनतम दो युगल रहे तो संयुक्त परिवार कहलाता हैं. सबसे बड़ा व्यक्ति मुखिया कहलाता हैं.

मैक्समूलर ने संयुक्त परिवार को भारत की आदिम परम्परा कहा, वही इरावती कर्वे के अनुसार भारत में परिवार का अर्थ ही संयुक्त परिवार से हैं.

संयुक्त परिवार के प्रकार

वंश परम्परागत संयुक्त परिवार

  • वंश परम्परा वाले दो युगलों का साथ साथ रहना
  • जैसे माता पिता + विवाहित पुत्र व पुत्रवधू अथवा माता पिता + विवाहित बेटी- जंवाई

अनुपूरित वंश परम्परागत संयुक्त परिवार

  • वंश परम्परागत परिवार + अनुपूरित व्यक्ति
  • (अविवाहित/तलाकशुदा/विधवा-विदुर/रिश्तेदार)

शाखीय संयुक्त परिवार

  • दो सहोदर परिवार साथ में
  • दो विवाहित भाई+ उनकी पत्नियाँ+ अविवाहित बच्चे)

अनुपूरित शाखीय संयुक्त परिवार

  • दो सहोदर परिवार + अनुपूरित अविवाहित/तलाकशुदा/विधवा विदुर रिश्तेदार)

वंश परम्परागत शाखीय संयुक्त परिवार

  • तीन या तीन से अधिक युगल वंश परम्परागत व शाखीय रूप से जुड़े हो
  • माता-पिता + दो या अधिक विवाहित पुत्र+ उनकी पत्नियाँ+ विवाहित पुत्रों के अविवाहित बच्चें

अनुपूरित वंश परम्परागत शाखीय संयुक्त परिवार

  • वंश परम्परागत शाखीय संयुक्त परिवार+ अनुपूरित व्यक्ति

संयुक्त परिवार के लाभ व विशेषताएं

  • सहभोज, संयुक्त चूल्हा
  • सम्पति का संरक्षण व संयुक्त स्वामित्व
  • पुश्त गहनता- दो या दो से अधिक पीढियां आपसी स्नेह व वंश परम्परा से जुड़ी होती हैं.
  • श्रम विभाजन- सभी की आय सम्मिलित रूप से पारिवारिक आवश्यकताएं पूरी करती हैं.
  • आपसी सहयोग, भावनात्मक जुड़ाव
  • उत्तरदायित्व का विभाजन
  • सामाजिक सुरक्षा
  • अनुशासन, आज्ञापालन आदि गुण विकसित

दोष

  • आर्थिक कठिनाईयां
  • अहम भाव
  • अशांति क्लेश
  • अकर्मण्यता बढ़ती है
  • गोपनीयता का अभाव
  • स्त्रियों की निम्न स्थिति

संयुक्त परिवार विघटन के कारण

  • उच्च महत्वकांक्षाएं
  • व्यवसाय व शिक्षा के उद्देश्य से पलायन
  • शहरीकरण
  • विधिक प्रावधान- 1956 का हिन्दू उतराधिकार कानून

निवास स्थान के आधार पर परिवार

  • पितृस्थानीय परिवार
  • मातृस्थानीय परिवार
  • नव स्थानीय परिवार
  • उभयस्थानीय परिवार
  • मातुल स्थानीय परिवार

सम्पति के आधार पर परिवार

  • पितृरेखीय परिवार
  • मातृरेखीय परिवार
  • मातुल रेखीय परिवार

पितृवंशीय परिवार में पिता का घर का सबसे बड़ा पुरुष जबकि मातृवंशीय परिवार में मामा/माँ का सबसे बड़ा रक्त सम्बन्धी घर का मुखिया होता हैं.

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