Poem On Discipline In Hindi – अनुशासन कविता

Poem On Discipline In Hindi: जीवन का दूसरा नाम ही अनुशासन हैं. विद्यार्थी हो शिक्षक, कर्मचारी हो या बॉस सभी को एक अनुशासन के दायरे में रहकर कार्य करना होता हैं. हर व्यक्ति के जीवन की उन्नति अथवा विफलता में अनुशासन का महत्व हैं. बिना अनुशासन के जीवन बिना नाविक के नाव जैसी हो जाती है तो पानी के झोके के बह जाती हैं. अनुशासन बाहरी वस्तु न होकर यह आंतरिक प्रेरणा हैं जो हमेशा सही करने, सही चुनने की ओर हमें चलायमान रखती हैं. आज हम कुछ छोटी बड़ी अनुशासन पर कविताएँ आपकों बता रहे हैं.

Poem On Discipline In Hindi - अनुशासन कविता

Poem On Discipline In Hindi – अनुशासन कविता

short poem on discipline in hindi: Class 1, Class 2, Class 3, Class 4, Class 5, Class 6, Class 7, Class 8, Class 9, Class 10, Class 11, Class 12 के स्टूडेंट्स चाइल्ड और किड्स के लिए छोटी पर अनुशासन  की कविताएँ यहाँ बता रहे हैं. बच्चें इन कविता के  माध्यम से विद्यार्थी जीवन में अनुशासन  के महत्व को  समझ सकते हैं.

self discipline poem in hindi

“मन को वश में करो

फिर चाहे जो करो

कर्ता तो और है

रहता हर ठौर है

वह सबके साथ हैं

दूर नहीं पास हैं

तुम उसका ध्यान धरो

फिर चाहे जो करो

सोच मत बीते को

हार मत जीते को

गगन कब झुकता है

समय कब रूकता है

समय से मत लड़ो

फिर चाहे जो करो

रात वाला सपना

सवेरे कब अपना

रोज यह होता है

व्यर्थ क्यों रोता है

डर के मत मरो

फिर चाहे जो करो”

hindi poem on self discipline

हमने आपके लिए इन्टरनेट की मदद से कुछ प्रेरणादायक अनुशासन कविताएँ संग्रहित की हैं. हम इन अनुशासन कविताओं के स्वः रचित होने का दावा नहीं करते हैं. बालकों को ये कविताएँ कक्षा में समवेत स्वर में पढ़ाई जानी चाहिए जिससे वे अनुशासन को जीवन का अंग बना सके, तथा अपने जीवन को सही दिशा मे ले जा सके.

“अनुशासन मे बधे हुए हैं,

ग्रह-उपग्रह और सब तारे,

अनुशासन की सीमा मे है,

बधे हुए जड़-चेतन सारे.

अगर समय से सूर्य न निकले,

दूर न होगा अंधियारा,

कैसे जीवन मिले जगत को,

कैसे हो फिर उजियारा!

अगर समय पर चाद न निकले,

शीतलता न मिलेगी,

चारु चद्र की चचल किरणे,

फिर कैसे सुख देगी?

एक नियम से घूम रही है,

धरती प्यारी-प्यारी,

तभी टिके हम एक जगह पर,

टलती उलझन भारी.

वृक्षो से फल नीचे गिरते,

कभी न ऊपर जाते,

विद्या पाकर गुणी पुरुष है,

और नम्र हो जाते.

यह है अनुशासन की महिमा,

भुला इसे मत देना,

इससे शिक्षा लेकर अपना,

जन्म सफल कर लेना.”

hindi kavita on discipline

घनी धुंध मे लिपटे

पेड़ /पर्वत कितने सुंदर लगते हैं

जैसे कुदरत ने

चादर ओढ़-ली हो

सुबह की ठण्ड से |

इन पर पड़ी ओस की बूदो से

खुल जाती है इनकी निद्रा

साथ ही सूर्य के निकलते ही

ऐसा लगता है मानो

घर का कोई बड़ा बूढा

अपनी संतानों को जैसे जगा रहा हों |

तब ऐसा प्रतीत होता है की

कुदरत भी सिखाती हैं

सही ढंग से जीने के लिये

प्यार भरा अनुशासन |

poems in hindi on discipline

नित्य चलती चीटी ना थकती,

सदा करती अनुशासन की भक्ति।

स्वयं से अधिक बोझ उठाकर,

गगन को अपना को ध्येय बनाकर।

हर क्षण आगे बढ़ती जाती,

निरंतर कर्म हमें सिखलाती

विरला दृढ आदर्श है उसके,

साथी कभी राह ना भूले।

पक्का निश्चय कर वों बलखाती,

स्नेह भाव से लाइन बनाती।

हर क्षण आगे बढ़ाती जाती,

निरंतर कर्म हमें सिखलाती।

लिखे हर दिन ऐसी गाथा,

ठोक रहा था भूपति माथा।

हरबार पराजय उसके हाथ,

मिला राजा को चीटी का साथ।

पक्का निश्चय कर कदम बढ़ाया,

सफलता स्वयं उसकी कर आया।

यही शिक्षा वह हमकों बताती,

लक्ष्य प्रतिपल उसको भाती।

हर क्षण आगे बढ़ाती जाती,

निरंतर कर्म हमें सिखलाती

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