Poem On Good Manners In Hindi – शिष्टाचार पर कविता

Poem On Good Manners In Hindi – शिष्टाचार पर कविता: अमुक इंसान कैसा है उस सम्बन्ध में धारणा उसके आचरण को देखकर ही बनाई जाती हैं.  शिष्ट, शालीन एवं विनम्र व्यक्ति शिष्टाचारी होता हैं वह सभी का सम्मान करता हैं  आज के लेख में हम poem on good manners for children साझा कर रहे हैं शिष्टाचार कविता कक्षा 1,2,3,4,5,6,7,8, 9,10 के बच्चों एवं विद्यार्थियों के लिए यहाँ दी गई हैं.

Poem On Good Manners In Hindi – शिष्टाचार पर कविता

Poem On Good Manners In Hindi - शिष्टाचार पर कविता

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Poem On Good Manners In Hindi

पूर्वजो ने जो दी धरोहर
क्या हमने उसे सभाला है
या यू ही उसे ढोलक की मानिद
पीट पीट कर फोड़ डाला है
मिले थे जो सस्कार हमे
अपने बाबा दादा से
उन्हे ही हमने रौद दिया
अपनी स्वार्थ पूर्ति के लिए
इच्छा की हाला को पीकर
नित नित जीते जाते है
नही उतरता नशा अहकार का
बस यू ही पीते जाते है
अधी दौड़ का नशा जो उतरे
तो दिखाई सस्कार पड़े
ना हम बेकार की बातून मे
आपस मे यू लड़े मरे
शिष्टाचार की बाते हमको
एक कहानी लगती है
नानी ने जो थी सुनाई
ऐसी ये रवानी लगती है
एक बात तुम सुन लो प्यारे
शिष्टाचार ना आया हमको
तो कुछ भी ना आया है
कर लो चाहे जितनी उन्नति
फिर भी कुछ ना पाया है
शिस्ट हो आचार हमारा
ऐसा हम विचार करे
दे जाए दुनिया को कुछ ऐसा
की दुनिया हमको
युगो युगो तक याद करे

शिष्टाचार पर कविता

तू करके किसी को न बोलो,
किसी को तुम भी कभी न बोलो।
अच्छा सबोधन सब को भाता हैं,
सुनकर मन प्रसन्न हो जाता हैं।

आत्मसम्मान सभी का होता हैं,
इनमे छोटा-बड़ा नही होता हैं।

तू तुम की बजाय आप बोलना,
आप के अच्छे सस्कार दर्शाता हैं।

अच्छे लालन-पालन अच्छी दीक्षा का,
आपके मुह खोलते पता चल जाता हैं।

अपने से छोटो, अपने निकट वालो को,
हमेशा आप ही कह कर बुलाना।

तू और तुम से बुलाने की अपनी,
आदत से छुटकारा पाना।

HINDI POEM ON GOOD HABITS

सुबह सवेरे जल्दी उठना, अपने बड़ो को नमन करना,
अच्छा है जी अच्छा है।
नित्य कर्म मे ना अलसाना, कुल्ला- मजन ढग से करना,
अच्छा है जी अच्छा है।
खूब चबा कर भोजन करना, दिन भर खूब पानी पीना ,
अच्छा है जी अच्छा है।
समय पर पढ़ना, समय पर लिखना, खेल- कूद भी, समय पर करना,
अच्छा है जी अच्छा है।
स्वस्थ रहेगा, जब तुम्हारा बचपन, खुशहाल होगा, तब ही सारा जीवन।
अच्छा है जी अच्छा है।

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