Poem On Mahatma Gandhi In Hindi For Class 6,7,8,9,10 | महात्मा गांधी पर कविता

Poem On Mahatma Gandhi In Hindi For Class 6,7,8,9,10: युगपुरुष महात्मा गांधी को आज देश ही नही सम्पूर्ण विश्व जानता है. करोड़ो अनुयायी उनके सत्य व अहिंसा के आदर्शों का पालन कर उनकी राह पर चलने की कोशिश करते है. 2 October 1869 को गुजरात के पोरबंदर में इनका जन्म हुआ था. इनके जन्मदिवस को gandhi jayanti एवं विश्व अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाता है. प्रस्तुत है, इस महापुरुष के जीवन से लिखी गई कुछ बेहतरीन हिंदी कविताएँ जिन्हें गांधी जयंती भाषण निबंध में उपयोग ले सकते है.

Poem On Mahatma Gandhi In Hindi For Class 6,7,8,9,10Poem On Mahatma Gandhi In Hindi For Class 6,7,8,9,10

झील-ताल सागरों को डाँटते हैं क्या करें
हंसों को उपाधि गिद्ध बांटते हैं क्या करें

राजनीति के ये खेल देखे नहीं जाते हैं
बकरियां दहाड़ती हैं शेर मिमियाते हैं

काग बोले जा रहे हैं कोकिलाएं मौन हैं
देश को पढ़ाया जा रहा है गाँधी कौन है

कुर्सियों की होड़ उसे दे रही है गालियाँ
जैसे पेड़ की जड़ों पर थूकती हों डालियाँ

गाँधी जो महानताओं की बड़ी मिसाल है
आज वो हमारे चाँटे खाता हुआ गाल है

गाँधी जी सच्चाई, अहिंसा का संविधान है
आचरण की पूरी पाठशाला का विधान है

गाँधी जी तो भारत की आत्मा का नाम है
जिसकी जिंदगी पवित्रता का तीर्थ धाम है

गाँधी पुण्य संगम है जग की सभ्यताओं का
गाँधी शिलालेख है पवित्र मान्यताओं का

गाँधी तो विशेष है परम विशेषताओं में
जो सदा जियेगा मेरे देश की हवाओं में

गाँधी एक भावना है आस्था के प्यार की
एक मनोकामना है परिधियों के पार की

गाँधी एक कसौटी है कुर्सियों के त्याग की
अनूठी अंगूठी है आजादी के सुहाग की

गाँधी एक आइना है चेतना है शोध है
इस धरा के आदमी में देवता का बोध है

गाँधी चंदनी तिलक है हिन्द के ललाट का
उसके लिए मोल क्या है किसी राजघाट का

बौने लोग आसमाँ की थाह लेने चले हैं
गाँधी की महानता को मात देने चले हैं

हौंसले तो देखो अंधकारों के रिसालों के
सूरज से सबूत माँगते हैं ये उजालों के

गाँधी तो रहेगा याद युगों यादगारों में।
तुम ही नहीं मिलोगे कहीं समाचारों में।।
डॉ. हरिओम पंवार


महात्मा गांधी पर कविता (Poem On Mahatma Gandhi)

हे स्वामी,
मुझे करने को काम दीजिए
मुझे स्वास्थ्य दीजिए
मुझे सामान्य वस्तुओं में आनन्द प्राप्त करने की शक्ति दीजिए
मुझकों सौदर्य का दर्शन करने वाली आँख दीजिए
मुझकों सत्य भाषण करने वाली जिह्वा दीजिए
मुझकों ऐसा ह्रद्य दीजिए जो प्रेम करे
ऐसा मस्तिष्क दीजिए जो उचित अनुचित पर विचार करे
दूसरों के दुःख दर्द को समझने वाली सहानुभूति दीजिए
मुझकों न विद्वेष दीजिए न इर्ष्या
बल्कि उच्च कोटि की दयालुता
तथा श्रेष्ट अंत ज्ञान
और प्रत्येक दिन के अस्त समय पर
मुझकों एक धार्मिक पुस्तक दीजिए
और एक मित्र दीजिए, जिसके साथ मै मौन रह सकू

Mahatma Gandhi par kavita

हे सत्य न जा, हे सत्व न जा
शत शत नमन, सत्य तुझ्कों न जा
आगे न जा, आगे न जा, सत्य जीवित
रह कर जा जा, हे सत्य, तू न जा तू न जा
हे निर्बल बल, अज अघ पर मत जा और सबल
बन साथ न आ, सत्य सत्व मुखरित हो जा जीवन
जीवन धन जी जा
श्रावक श्रावक, प्रेम न जा, तन तन कर चुनौती बन
जा घन घन बन, घन घन बरसा, पोखर पोखर सब
भर जा, प्यारी प्यारी सी बरखा, घर के दीपक
दीपक करके आरती दीवाली समा जा

महात्मा गांधी 2 अक्तूबर कविता poems

राष्ट्रपिता तुम कहलाते हो
सभी प्यार से कहते बापू
तुमने हम सबकों मार्ग दिखाया
सत्य अहिंसा का पाठ पढाया
हम सब तेरि संताने है
तुम हो हमारे प्यारे बापू
सीधा साधा वेश तुम्हारा
नही कोई अभीमान
खादी की एक धोती पहिने
वाह रे बापू तेरि शान
एक लाठी के बल पे तुमने
अंग्रेजो की जड़े हिलाई
भारत माँ को आजाद कराया
राखी देश की शान

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