5 सितम्बर शिक्षक दिवस पर अध्यापकों पर कविता | मुझको छोड़ न जाना तुम और राह दिखाई हैं तुमने

Poem On Teacher In Hindi: 5 सितम्बर को टीचर्स डे हैं. इस शिक्षक दिवस के अवसर पर अपने गुरुजनों के सम्मान के लिए आप कोमर्या मनोज जी और शिव नारायण वर्मा जी द्वारा रचित ये दो बेहतरीन कविताओं (Poems) का वाचन कर सकते हैं.

शिक्षक दिवस पर कविता/Poem On Teacher In Hindi

मुझको छोड़ न जाना (मनोज)

गुरुवर मेरे तुमसे हैं प्रार्थना,
मुझको छोड़ न जाना तुम,
आत्मविशवास का दीप जलाकर,
मुश्किल मा साथ निभाना तुम.

तू अपनी मेधा के बल पर,
मेरा भी भविष्य बनाना तुम.
अगर लगू हारने जीवन पथ पर,
मेरा हौसला बढाना तुम.

भटक गया गर राह कभी तो,
जीवन की राह दिखाना तुम.
जीवन डगर, जीवन ही समर हैं,
जीवन संघर्ष सिखलाना तुम.

करके अपने ज्ञान की वर्षा,
मुझको भी योग्य बनाना तुम.
प्रकाश पुंज का बन आधार तुम,
मुझकों मेरा कर्तव्य सिखाना तुम.

नमन तुम्हे हैं गुरुवर मेरे,
मुझकों यू ही, छोड़ न जाना तुम,
बन धारा तुम प्रेम नदी की,
मेरी नैय्या पार लगाना तुम.

कभी तू माता, कभी पिता तुम,
कभी दोस्त, सखा बन जाना तुम.
तू भगवान् से पहले भगवन,
परिचय मुझसे मेरा करवाना तुम..

राह दिखाई हैं तुमने

जो राह दिखाई हैं तुमने
पदचिन्हों के पीछे-पीछे,
आजीवन चलता जाउगा,
जो राह दिखाई हैं तुमने
मै औरो को दिखलाउगा

सुखी डाली को हरियाली,
बेजान को जीवनदान दिया.
काले अंधियारे जीवन को,
सौ सूरज से धनवान किया.

परोपकार, भाईचारा,
मानवता, हमकों सिखलाई.
सच्चाई की दी हैं मिसाल हैं.
सहानुभूति क्या दिखलाई.

कान पकड़कर उठक बैठक,
थी छड़ियो की बरसात हुई.
समझ न पाया उस क्षण मै,
अनुशासन की शुरुआत हुई.

मुखमंडल पर अंगार कभी,
आँखों में निश्छल प्यार कभी.
अंतर में माँ की ममता थी,
सोनार कभी लोहार भी.

जीवन को चलते रहना हैं,
लौ इसकी झिलमिल जलती हैं.
जीवन के हर चौराहे पर,
बस कमी तुम्हारी खलती हैं.

जीवन की कठिन सी राहो पर,
आशीष तुम्हारा चाहुगा.
जो राह दिखाई हैं तुमने,
मै औरो को दिखाउगा.
शिव नारायण वर्मा

शिक्षक दिवस कविता

आपने दी ऐसी शिक्षा आत्म विशवास जगाया हैं,
रिद्दी सिद्दी औ गणेश जी, सबसे मिलवाया हैं.
ईश्वर रूप से प्राणिमात्र का साक्षात्कार करवाया हैं,
सुख में संयम दुःख में धीरज, हंसकर जीना सिखलाया हैं.
आज आपकी सिखलाई शिक्षा दुनिया को सिखलाता हू.

आँखे खोली दुनियाँ में, मै अज्ञानता का वाहक था.
बचपन में स्कुल गया, गुरूजी आपका साथ मिला,
रंग जीवन के जाने हमने, जीवन का उद्देश्य मिला.
हे गुरूजी आपकी छड़ी से सही राह का वरदान मिला,
सीखे मैनर्स, पढना-लिखना, ह्रद्य का अनुराग मिला
आज उसी सही राह को बच्चो को सिखलाता हु.

सही गलत अच्छा बुरा, सब आपने ही बतलाया हैं.
सूरज, चन्द्रमा, नदियों, पहाड़ क्या देते समझाया हैं,
प्रकृति शरीर आत्मा, सेहत का मर्म समझाया हैं.
संगी साथी, परिजन समाज, देश हित महत्व समझाया हैं,
आज पुनः आपकों सोच मन से कृतज्ञता बतलाता हु.

दिलों में मेरे बात गलत आ जाती हैं,
आँखे मेरी कुछ निशान दिखलाती हैं.
उन उंगलियों पर पड़े थे, जो आपकी छड़ी के निशान,
और आज वही उंगलियाँ शिष्यों को दिशा दिखलाती हैं.
फिर आप ही के पद चिह्नों पर सरस्वती सेवक कहलाता हू,
आज इस महान गुरु पर्व पर शत शत नमन करता हु.
कमल कान्त अग्रवाल द्वारा रचित

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