राजस्थान की जनसंख्या – Population Of Rajasthan In Hindi

राजस्थान की जनसंख्या – Population Of Rajasthan In Hindi: आज हम जानेगे जनगणना 2011 के अनुसार 2019 में राजस्थान की जनसंख्या क्या हैं. सामान्य ज्ञान से जुड़ी समस्त जानकारी यहाँ दी हैं. rajasthan janganana in hindi pdf Caste Religion district Wise census 2011 rajasthan की समस्त जानकारी हम इस लेख में दे रहे हैं. हम आशा करते हैं यह आर्टिकल पढ़ने के पश्चात आप Population Of Rajasthan In Hindi के विषय में पूरी तरह से जान पाएगे.

राजस्थान की जनसंख्या – Population Of Rajasthan In Hindi

राजस्थान की जनसंख्या - Population Of Rajasthan In Hindi

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2019 Population Of Rajasthan In Hindi

वर्तमान में तेज गति से सामाजिक आर्थिक विकास हो रहा हैं. जरा सोचिये. यह विकास किसने किया हैं.  इसके  लिए लोग  ही जिम्मेदार हैं. लोगों का शारीरिक श्रम एवं मानसिक क्षमता दोनों मिलकर प्रकृति में उपलब्ध चीजों के द्वारा अपने लिए अनेक संसाधनों का निर्माण करते हैं जो हमें विकास के पथ पर आगे बढ़ाते हैं. 

अतः किसी भी क्षेत्र की जनसंख्या ही सबसे अधिक महत्वपूर्ण संसाधन होती हैं. जिनकी उद्यमशीलता पर विकास निर्भर करता हैं. जनसंख्या एवं उसके विभिन्न पक्षों का अध्ययन अति आवश्यक हैं क्योंकि किसी भी क्षेत्र का विकास वहां की जनसंख्या पर निर्भर करता हैं.

भारत की पहली जनगणना वर्ष 1872 में की गई थी जबकि पहली सम्पूर्ण जनगणना वर्ष 1881 में की गई थी. इसके प्रत्येक 10 वर्षों के अंतराल पर जनगणना का कार्य भारतीय जनगणना विभाग द्वारा किया जाता हैं. 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की कुल जनसंख्या का लगभग 5.7 प्रतिशत भाग राजस्थान में निवास करता हैं.

कई दुसरे राज्य जैसे बिहार, बंगाल और केरल की तुलना में राजस्थान की आबादी उतनी सघन नहीं हैं. 6.9 करोड़ जनसंख्या में से लगभग 75 प्रतिशत लोग गाँवों में रहते हैं. राजस्थान की शहरी आबादी लगभग 25 प्रतिशत है जो छोटे बड़े शहरों में निवास करती हैं.

राजस्थान का जनसंख्या घनत्व – Population density of Rajasthan In Hindi

जनसंख्या वितरण एवं घनत्व [Population distribution and density] : पृथ्वी की सतह पर आबादी के फैलाव को जनसंख्या वितरण कहते हैं. जैसा कि आप जानते हैं कि कुछ क्षेत्र में जनसंख्या बहुत अधिक  पाई जाती हैं, जिन्हें सघन क्षेत्र तथा वे क्षेत्र जहाँ कम जनसंख्या पाई जाती हैं, उन्हें विरल क्षेत्र कहते हैं.

जैसे राजस्थान के उत्तर पूर्वी भाग के मैदानी क्षेत्र में सघन एवं पश्चिमी भाग में स्थित थार के मरुस्थल में विरल जनसंख्या पाई जाती हैं. सघन एवं विरल क्षेत्र हमें जनसंख्या घनत्व के बारें में बताते हैं. जनसंख्या घनत्व एक मापक हैं जो किसी स्थान की जनसंख्या एवं उसके क्षेत्रफल में सम्बन्ध बताता हैं.

अर्थात एक स्थान के क्षेत्रफल लम्बाई*चौड़ाई जिसे हम वर्ग किमी में मापते हैं. पर निवास करने वालों की संख्या बताता हैं. जैसे राजस्थान में जनसंख्या का घनत्व 200 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी हैं, जबकि बिहार में यह संख्या 1100 से अधिक हैं. इस तरह जनसंख्या घनत्व मापक की इकाई व्यक्ति प्रति किमी होती हैं. उदहारण के रूप में किसी गाँव की कुल जनसंख्या एक हजार है एवं उसका क्षेत्रफल 50 वर्ग किमी हैं तो उस गाँव का जनसंख्या घनत्व 1000/50 अर्थात 20 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी होगा.

राजस्थान की कुल जनसंख्या 2019 कितनी है – Rajasthan Population District Wise

Rajasthan Population

rajasthan census 2011 district wise यहाँ प्रस्तुत किया गया हैं. इस सारणी में राजस्थान के 33 जिले श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर, चुरू, झुंझुनू, अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर, दौसा, जयपुर, सीकर, नागौर,  जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर, जालौर, सिरोही, पाली, अजमेर, टोंक, बूंदी, भीलवाड़ा, राजसमंद, डूंगरपुर, बाँसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, कोटा, बांरा, झालावाड़, उदयपुर और प्रतापगढ़ की कुल जनसंख्या.

सभी जिलों की कुल जनसंख्या, जनसंख्या घनत्व, वृद्धि दर, लिंगानुपात, साक्षरता, पुरुष साक्षरता,  महिला साक्षरता [Total population, population density, growth rate, sex ratio, literacy, male literacy, female literacy] की लिस्ट आपकों इस इमेज pdf से डाउनलोड कर सुरक्षित रख सकते हैं.

Rajasthan Ki Population Kitni Hai Hindi Main

राजस्थान के प्रत्येक जिले में जनसंख्या वितरण असमान हैं. पश्चि राजस्थान में कम तो पूर्वी राजस्थान में अधिक जनसंख्या पाई जाती हैं. राजस्थान की कुल जनसंख्या का लगभग 10 प्रतिशत भाग अकेले जयपुर जिले में रहता हैं, तो वहीँ जैसलमेर में राज्य की 1 प्रतिशत से भी कम जनसंख्या पाई जाती हैं.

पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश में राज्य के लगभग 61 प्रतिशत भाग पर लगभग 40 प्रतिशत जनसंख्या निवास करती हैं. यहाँ जन घनत्व सबसे कम औसतन 130 व्यक्ति प्रति किमी हैं. अलवर, भरतपुर, दौसा, जयपुर, धौलपुर, जयपुर, टोंक, सवाई माधोपुर, करौली भीलवाड़ा आदि राज्य के पूर्वी समतल मैदानी क्षेत्र के जिले जिनमें राज्य के केवल 20 % भाग पर राज्य की लगभग 33 प्रतिशत जनसंख्या निवास करती हैं.

यहाँ का जन घनत्व 332 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी हैं, जो राज्य में सर्वाधिक हैं, मैदानी भाग में कृषि के अनुकूल परिस्थतियों जैसे समतल मैदान, पानी की उपलब्धता, देश की राजधानी दिल्ली से समीपता, उद्योग, वाणिज्य और परिवहन की आधारभूत सुविधाओं के कारण विकास अधिक होने से जनसंख्या अधिक निवास करती हैं. अरावली पर्वतीय भाग तथा दक्षिणी पूर्वी पठारी प्रदेश में राजस्थान का मध्यम जन घनत्व पाया जाता हैं.

पश्चिमी राजस्थान में कठिन भौगोलिक परिस्थतियों और आधारभूत सुविधाओं की कमी के कारण जनसंख्या कम हैं. फिर भी यह ध्यान देने की बात हैं कि विश्व के अन्य मरुस्थलों की तुलना में थार मरुस्थल की जनसंख्या की दृष्टि से सबसे सघन बसा मरुस्थल हैं.

राजस्थान की जनसंख्या वृद्धि – Population growth of Rajasthan State

एक अनुमान के अनुसार ईसा सदी के पहले वर्ष विश्व की कुल आबादी 17 करोड़ के लगभग थी जो वर्तमान में बढ़कर 700 करोड़ से अधिक हो गई हैं. अतः पृथ्वी पर जनसंख्या लगातार बढती चली जा रही हैं. इसी तरह भारत एवं राजस्थान की जनसंख्या भी लगातार बढ़ रही हैं.

किसी निश्चित अवधि में जनसंख्या में आए बदलाव को जनसंख्या परिवर्तन कहते हैं. जनसंख्या का बढ़ना और घटना दोनों ही परिवर्तन हैं. जनसंख्या परिवर्तन के आंकलन के लिए जिस मापक का प्रयोग होता हैं उसे जनसंख्या वृद्धि दर कहा जाता हैं. इस तरह जनसंख्या वृद्धि दर एक निश्चित अवधि में जनसंख्या में हुए बदलाव या परिवर्तन का आंकलन करता हैं.

अगर किसी कारण से किसी स्थान की जनसंख्या, किसी एक वर्ष या दशक में पिछले वर्ष या दशक में कम हो जाए तो इसे जन संख्या का पतन या ऋणात्मक वृद्धि कहते हैं और यदि बढ़ जाए तो उसे धनात्मक वृद्धि कहा जाता हैं.

जनसंख्या वृद्धि तीन कारकों पर निर्भर है- जन्म, मृत्यु और प्रवास. इन तीनों कारणों के समीकरण से जनसंख्या में परिवर्तन होता हैं. हर प्राणी जो पैदा होता है उसकी भी मृत्यु हो जाती हैं, अतः जन्म और मृत्यु एक जैविक घटना हैं. हाँ ये हो सकता हैं कि मृत्यु का कारण अलग अलग हो कोई प्राकृतिक रूप से अपनी आयु पूरी कर वृद्धावस्था के बाद मर जाता हैं.  कोई किसी दुर्घटना के कारण और कोई कुपोषण या बीमारी से.

जन्म और मृत्यु की संख्या में अंतर से जनसंख्या में बढत या घटत होती हैं जिसे प्राकृतिक वृद्धि कहते हैं. जन्म दर अगर मृत्यु दर से अधिक हो तो जनसंख्या में वृद्धि होती हैं. यदि जन्म दर मृत्यु से कम हो तो जनसंख्या में कमी आती हैं. और अगर दोनों समान हो तो जनसंख्या में संतुलन बना रहता हैं. आप्रवास व उत्प्रवास के अंतर को जब प्राकृतिक वृद्धि से जोड़ते हैं  जनसंख्या वृद्धि का सही अनुमान लगा सकते हैं.

प्रवास का अर्थ है किसी व्यक्ति द्वारा अपना निवास स्थान बदल देना जिनके प्रमुख कारण सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक और प्राकृतिक आपदा आदि हो सकते हैं. उदहारण के लिए जब कोई व्यक्ति गाँव से शहर एक गाँव से दूसरे गाँव एक शहर से दूसरे शहर, किसी एक देश या राज्य से किसी दूसरे देश और राज्य में आकर बस जाता हैं. तो इस प्रक्रिया को प्रवास कहते हैं. एक स्थान से किसी व्यक्ति के जाने को उत्प्रवास तथा आने को आप्रवास कहा जाता हैं.देशों के मध्य होने वाले प्रवास को अंतर्राष्ट्रीय प्रवास एवं एक देश की सीमा के अंदर होने वाले आवास स्थानान्तरण को आंतरिक प्रवास कहा जाता हैं.

अनुकूल जनसंख्या / Favorable population

हमारे देश में जनसंख्या तेजी से बढ़ने के कारण प्रति व्यक्ति संसाधनों की उपलब्धता में कमी आ रही हैं, जिससे हमें अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा हैं. अतः हमें जनसंख्या वृद्धि दर को घटाना होगा, जिसका सबसे सरल उपाय है हमारा परिवार छोटा रखने के लिए हमें हम दो हमारे दो की विचारधारा को अपनाना होगा. यदि प्रत्येक माता पिता की दो ही संताने होगी तो जनसंख्या में वृद्धि होना स्वत ही रूक जाएगा.

परिवार छोटा होने पर सभी सदस्यों में संसाधनों की उपलब्धता अधिक होगी. जनसंख्या स्थिर होने के बाद देश में सामाजिक आर्थिक विकास तेज गति से होगा. भारत और राजस्थान में जनसंख्या वृद्धि की प्रवर्ती को देखे तो हम पाएगे कि 1951 -61 के दशक से 2001-11 तक राजस्थान में जनसंख्या की वृद्धि दर भारत की तुलना में अधिक रही हैं. पिछले दशक में जनसंख्या वृद्धि दर में तेजी से कमी आई हैं. बाड़मेर और जैसलमेर में जनसंख्या में सबसे अधिक एवं गंगानगर में सबसे कम वृद्धि हुई हैं.

Rajasthan Population 2019 In Hindi

राजस्थान के आठ जिलों में जनसंख्या में वृद्धि भारत [17.6 प्रतिशत] की औसत अंक से कम रही. गंगानगर के अलावा ये जिले हैं झुंझुनूं पाली बूंदी चित्तौड़गढ़, सीकर हनुमानगढ़ और टोंक. अपनी समस्त आवश्यकताओं की पूर्ति मानव प्राकृतिक संसाधनों द्वारा ही पूरी करता हैं. लेकिन समस्या यह हैं कि जनसंख्या लगातार बढ़ रही हैं लेकिन प्राकृतिक संसाधनों में वृद्धि नहीं हो रही हैं. अतः संसाधनों में धीरे धीरे कमी आती जाती हैं.

हमारे देश में भी खाद्यान्नों के उत्पादन में वृद्धि हुई है. लेकिन खाद्यान्न की तुलना में जनसंख्या में वृद्धि अधिक हुई, जिससे अब भी खाद्यान्न का संकट बना हुआ हैं. ऐसी स्थिति में कृषि की उत्पादन क्षमता को बढ़ाने के लिए आधुनिक सिंचाई एवं तकनीक का सहारा लिया गया हैं. क्योंकि जनसंख्या के साथ पृथ्वी के क्षेत्रफल को नहीं बढ़ाया जा सकता हैं.

बढ़ती आबादी के लिए मकान, उनके आवागमन के लिए परिवहन के साधन जैसे सड़क, रेलमार्ग आदि और उसके रोजगार के लिए भी भूमि की मांग लगातार बढ़ती जा रही हैं. अतः जनसंख्या में हो रही वृद्धि को कम करना आवश्यक हैं.

राजस्थान का लिंगानुपात [Sex ratio in Rajasthan]

प्रति हजार पुरुषों पर स्त्रियों की संख्या को लिंगानुपात कहा जाता हैं. भारत में केरल एवं पद्दुचेरी में ही स्त्रियों की संख्या पुरुषों की संख्या से अधिक हैं. अन्य सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में पुरुषों की तुलना में स्त्रियों की संख्या कम हैं. जो बड़ी चिंता का विषय हैं. लिंगानुपात हमारे समाज में महिलाओं की स्थिति बताता हैं.

2011 की जनगणना के अनुसार राजस्थान में लिंगानुपात 928 हैं. जबकि छः वर्ष से कम आयु के बच्चों में लिंगानुपात केवल 888 हैं जो अत्यंत कम हैं. इसके क्या कारण हो सकते हैं. और यह आगे क्या समस्या पैदा कर सकता हैं यदि समाज में महिला ओं की स्थिति अच्छी होगी तो उनका सम्मान होगा तो समाज या प्रदेश में लिंगानुपात उच्च होगा. और जिस समाज में महिला की स्थिति निम्न होगी उस समाज में लिंगानुपात भी निम्न होगा.

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ

भारत सरकार द्वारा देश में महिला सशक्तिकरण एवं बेटियों के अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए जनवरी 2015 में देश में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना शुरू की. इस योजना का मुख्य उद्देश्य बेटियों को शिक्षा द्वारा सामाजिक आर्थिक आधार पर आत्मनिर्भर बनाना हैं.

आधुनिक तकनीकी द्वारा गर्भ में बच्चे के लिंग का पता लग जाने से कन्या भ्रूण हत्या, दहेज प्रथा, महिलाओं के प्रति हिंसा, बाल विवाह, पुरुष प्रधान समाज, प्रवास के कारण नगरों में पुरुषों का अधिक होना, शिक्षा एवं कार्य सम्बन्धी भेदभाव आदि कारणों से बेटियाँ अपने आपकों असुरक्षित महसूस कर रही हैं.

इसीलिए सरकार ने यह योजना बेटियों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए शुरू की हैं. यह योजना हमारे देश एवं समाज के लिए एक वरदान है. यदि बेटियों को सुरक्षा प्रदान नहीं की गई तो निकट भविष्य में इनकी संख्या कम होने से लिंगानुपात घट जाएगा. इसका समाज पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा. एवं शादी के लिए बेटियों की कमी और महिलाओं के प्रति अपराध जैसी कई समस्याओं का जन्म होगा.

राजस्थान की साक्षरता दर (Rajasthan literacy rate)

जनसंख्या दर किसी भी क्षेत्र की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति का पता लगाया जा सकता हैं. यह जनांकिकी में एक अत्यंत महत्वपूर्ण बिंदु हैं. वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार राजस्थान राज्य की कुल साक्षरता 66.10 प्रतिशत हैं. 76.6 प्रतिशत के साथ कोटा राजस्थान का सर्वाधिक साक्षरता वाला जिला हैं. जबकि सबसे कम साक्षरता जालौर में 54.9 प्रतिशत हैं. पुरुष एवं महिला साक्षरता क्रमशः झुंझुनूं एवं कोटा में सर्वाधिक तथा क्रमशः प्रतापगढ़ व जालौर में न्यूनतम हैं.

राजस्थान की जनसंख्या धर्म के आधार पर [rajasthan population religion wise 2019 pdf download in hindi]

भारत की तरह राजस्थान राज्य भी एक धर्म निरपेक्ष राज्य हैं, अर्थात यहाँ सभी प्रकार के धर्मों को मानने वाले लोग रह सकते हैं. यह राज्य हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध और इन मुख्य धर्मों के कई सम्प्रदायों जैसे शैव, वैष्णव, शिया, सुन्नी, मेव, पठान की जन्म भूमि एवं कर्म भूमि हैं.

यहाँ हिन्दुओं का तीर्थ पुष्कर, जैनों का दिलवाड़ा एवं इस्लाम का अजमेर शरीफ हैं. वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार हिन्दू धर्मावलम्बियों की आबादी ८५.५ प्रतिशत हैं. मुसलमान 9.1 प्रतिशत और शेष जनसंख्या सिक्ख, जैन एवं अन्य धर्मों के अनु यायियों की हैं.

भाषाई परिदृश्य

राजस्थान की आधिकारिक भाषा हिंदी हैं लेकिन आम बोलचाल और लोक साहित्य में राजस्थानी एवं उसकी सहयोगी भाषाओँ का महत्वपूर्ण योगदान हैं. राजस्थानी आर्यभाषा परिवार का एक भाषा समूह हैं. जिसमें कई बोलियाँ जैसे मारवाड़ी, मेवाड़ी, वागड़ी, ढूढाडी, शेखावाटी आदि प्रमुख हैं.

इनके अलावा यहाँ भीली, मेवाती, गुजराती, उर्दू और ब्रज भाषा भी बोली जाती हैं.  ये भाषाएँ राज्य के अलग अलग प्रदेशों में अवश्य बोली जाती हैं. लेकिन उन्होंने एक लम्बे समय से एक दूसरे के साथ सामाजिक और व्यापारिक लेन देन के माध्यम से लगातार सम्बन्ध बनाए रखा हैं.

अनुसूचित जनजातियाँ

राजस्थान के सतरंगी सांस्कृतिक परिवेश को राज्य की जनजातियाँ और भी आकर्षक बनाती हैं. अनुसूचित जनजातियाँ अधिक तर गाँवों में, पहाड़ों में, पठारों एवं जंगलों में निवास करती हैं. अधिकांश खेती, मजदूरी, जंगल के उत्पाद को एकत्र कर जीवन का गुजारा करती हैं. राजस्थान की जनजातीय आबादी सिरोही से आरंभ होकर उदयपुर, डूंगरपुर, चित्तौड़गढ़  तथा  बांसवाड़ा जिलों से होते हुए बूंदी, कोटा, सवाईमाधोपुर, टोंक तथा जयपुर जिलों के बीच निवास करती हैं.

राज्य की प्रमुख जनजातियाँ भील, गरासियाँ, मीणा एवं सहरिया हैं. राजस्थान में सर्वाधिक जनसंख्या मीणा जनजाति की हैं. इसके अतिरिक्त भील, गरासिया एवं सहरिया जनजातियाँ भी प्रमुख हैं. सहरिया राजस्थान की एकमात्र जनजाति है जिसे भारत सरकार ने आदिम जनजाति समूह सूची में शामिल किया गया हैं.

राजस्थान की सबसे प्राचीन जनजाति भील हैं. भीलों की भाषा में द्रविड़ या मुंडा भाषा के शब्द पाए जाते हैं. दक्षिणी राजस्थान में इसे वागड़ी या भीली कहते हैं. इनकी मुख्य आजीविका कृषि एवं वनोपज हैं. मीणा जनजाति की लगभग आधी से अधिक की जनसंख्या जयपुर, दौसा, सवाईमाधोपुर, करौली एवं उदयपुर जिलों में निवास करती हैं.

सहरिया शब्द की उत्पत्ति फ़ारसी शब्द सहर से हुई हैं, जिसका अर्थ जंगल या वन में निवास करने वाले लोग हैं. राजस्थान के बांरा जिले के शाहबाद एवं किशनगंज तहसीलों में सहरिया सर्वाधिक हैं. कृषि, मजदूरी, लकड़ी एवं वनोपज एकत्र करना इनकी आजीविका के मुख्य साधन हैं.

जाति जाट राजपूत जनसंख्या (rajasthan population caste wise 2019)

  • सर्वाधिक जनसंख्या – जाट
  • दूसरी सर्वाधिक जातीय – राजपूत, ब्राह्मण, मीणा, गुर्जर

आरक्षित वर्ग मतदाताओं का प्रतिशत

  • कुल मतदाता – 4.08 करोड़
  • ओबीसी वोटर- 51 प्रतिशत
  • सवर्ण मतदाता – 18 प्रतिशत
  • एससी – 18 प्रतिशत
  • एसटी वोटर- 13 प्रतिशत

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