प्रबोधिनी एकादशी व्रत कथा | prabodhini ekadashi vrat katha In Hindi

प्रबोधिनी एकादशी व्रत कथा | prabodhini ekadashi vrat katha In Hindi

भाद्रपद कृष्ण एकादशी को जया, कामिका तथा अजा एकादशी भी कहते हैं. Prabodhini Ekadashi 2018 का व्रत 19 नवम्बर सोमवार को हैं. इस दिन विष्णु की पूजा करनी चाहिए. रात्रि जागरण तथा इस एकादशी को व्रत रखने मात्र से मनुष्य के सम्पूर्ण पाप नष्ट हो जाते हैं.प्रबोधिनी एकादशी व्रत कथा | prabodhini ekadashi vrat katha In Hindi

prabodhini ekadashi vrat katha (प्रबोधिनी एकादशी कथा)

सतयुग में दान के लिए राजा हरिश्चन्द्र बहुत विख्यात थे. ऋषि विश्वामित्र जी को अपने वचन के अनुसार दक्षिणा देने के लिए राजा हरीशचन्द्र को चांडाल के यहाँ नौकरी करनी पड़ी थी.  राजा को जब श्मशानघाट पर चांडाल का कार्य करते काफी समय बीत गया तभी अचानक एक दिन गौतम ऋषि से उनके दर्शन हो गये.

राजा हरिश्चन्द्र ने अपनी आपबीती राजा को कह सुनाई, तब ऋषि ने राजा को इस कष्ट से छुटकारा पाने के लिए भाद्रपद महीने की इसी जया एकादशी का व्रत रखने की बात कही.

हरिश्चन्द्र ने प्रबोधिनी एकादशी का व्रत रखना शुरू कर दिया. इसी समय राजा के राजकुमार को सांप ने काट लिया, जिससे उसकी मृत्यु हो गई.

शैव्या रानी जब रोहित का अंतिम संस्कार करने के लिए उसे श्मशानघाट ले आई, तो राजा ने उनसे श्मशान कर माँगा. उस समय शैव्या रानी के पास राजा को कर चुकाने का कोई साधन नही था. अतः उसने अपनी चुनरी का कोर चीरकर श्मशान कर को चुकाया.

राजा व रानी के सत्य एवं व्रत की इस परीक्षा के बहुत प्रसन्न हुए, तथा उन्होंने दर्शन देकर राजा रानी को खूब प्रशंसा की. तथा उनके पुत्र रोहित को जीवित कर दिया. इस तरह प्रबोधिनी एकादशी का व्रत रखने से राजा रानी ने अपने पुत्र के साथ लम्बे समय तक राज्य सुख भोगा तथा अंत में स्वर्ग को प्राप्त हुआ.

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