पंजाब समझौता का इतिहास | Punjab Accord History In Hindi

पंजाब समझौता का इतिहास Punjab Accord History In Hindi : राजीव-लोंगोवाल समझौते को पंजाब समझौता के रूप में  जाना जाता है राजीव गांधी और लोंगोवाल जुलाई 1985 पर 24 पंजाब के राज्यपाल के रूप में, अर्जुन सिंह (पंजाब में शांति के लिए राजीव-लोंगोवाल समझौते के लिए काम किया जब तक जब वे मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री थे , और चंबल में डकैतों ने उनके प्रभाव में आत्मसमर्पण कर दिया. सरकार ने अकाली दल की मांगों को स्वीकार कर लिया जो बदले में अपना आंदोलन वापस लेने के लिए सहमत हो गए.

पंजाब समझौता का इतिहास Punjab Accord History In Hindi

पंजाब समझौता का इतिहास Punjab Accord History In Hindi

Rajiv – Longowal accord Punjab Accord In Hindi :1970 के दशक में अकालियों के एक समूह ने पंजाब के लिए स्वायतता की मांग उठाई. आनंदपुर साहिब में वर्ष 1973 में हुए एक सम्मेलन में इस आशय का प्रस्ताव पारित किया गया. जिसमें क्षेत्रीय स्वायत्ता का मुद्दा उठाया, केंद्र राज्य सम्बन्धों को पुनः परिभाषित करने तथा संघवाद को मजबूत करने पर बल दिया. परन्तु इसे एक अलग सिख राष्ट्र की मांग के रूप में पढ़ा जा सकता हैं.

80 के दशक में कुछ चरमपंथी सिखों ने पंजाब को एक अलग राष्ट्र खालिस्तान बनाये जाने के सम्बन्ध में आंदोलन शुरू किया, यह आंदोलन उग्र रूप धारण कर रहा था. फलतः तत्कालीन प्रधानमन्त्री इंदिरा गांधी ने ओपरेशन ब्लू स्टार के तहत स्वर्ण मन्दिर में सेना घुसने की अनुमति दे दी. इससे पंजाब में उग्रवाद और भड़क गया. इंदिरा गांधी की हत्या इसी की एक कड़ी थी.

सिख विरोधी दंगे कब और क्यों हुए

सिख विरोधी दंगे 1984 में हुए. यह दंगे 31 अक्टूबर 1984 में श्रीमती इंदिरा गांधी की हत्या के विरोध में हुए, जिसमें 2000 से अधिक सिख स्त्री पुरुष व बच्चें मारे गये.  इन दंगों से देश की एकता और अखंडता के लिए खतरा उत्पन्न हो गया.  इसलिए राजीव गांधी ने पंजाब में शांति बनाये रखने के लिए अकाली नेताओं से समझौता किया, जिसे पंजाब समझौता कहा जाता हैं.

पंजाब समझौता क्या था कब हुआ इसका इतिहास (Punjab Accord History)

पंजाब समझौता– जुलाई 1985 में अकाली दल के तत्कालीन अध्यक्ष हरचंद सिंह लोंगोवाल और प्रधानमंत्री राजीव गांधी के बिच एक समझौता हुआ, जिसे पंजाब समझौता कहा जाता हैं. इस समझौते के प्रमुख प्रावधान निम्नलिखित हैं.

  • मारे गये निरपराध व्यक्तियों के लिए मुआवजा– एक सितम्बर 1982 के बाद हुई किसी कार्यवाही या आंदोलन में मारे गये लोगों को अनुग्रह राशि के भुगतान के साथ सम्पति की क्षति के लिए मुआवजा दिया जाएगा.
  • सेना में भर्ती- देश के सभी नागरिकों को सेना में भर्ती का अधिकार होगा और चयन के लिए केवल योग्यता ही आधार रहेगा.
  • नवम्बर दंगों की जांच– दिल्ली में नवम्बर में हुए दंगों की जाँच कर रहे रंगनाथ मिश्र आयोग का कार्यक्षेत्र बढ़ाकर उसमें बोकारों और कानपुर में हुए उपद्रवों की जांच को भी शामिल किया जाएगा.
  • सेना से निकाले हुए व्यक्तियों का पुनर्वास– सेना से निकाले हुए व्यक्तियों और उन्हें लाभकारी रोजगार दिलाने के प्रयास किये जाएगे.
  • अखिल भारतीय गुरुद्वारा कानून– भारत सरकार अखिल भारतीय गुरुद्वारा कानून बनाने पर सहमत हो गई. इसके लिए शिरोमणि अकाली दल और अन्य सहयोगियों के साथ सलाह मशविरा और संवैधानिक जरूरते पूरी करने के बाद विधेयक लागू किया जाएगा.
  • लम्बित मुकदमों का फैसला– सशस्त्र सेना विशेषाधिकार कानून को पंजाब में लागू करने वाली अधिसूचना वापस  ली  जाएगी. वर्तमान विशेष न्यायालय विमान अपहरण तथा शासन के खिलाफ युद्ध के मामले सुनेगी. शेष मामले सामान्य न्यायालयों को सौप दिए जाएगे और यदि आवश्यक हुआ तो इसके बारे में कानून बनाया जाएगा.
  • सीमा विवाद– चंडीगढ़ का राजधानी परियोजना क्षेत्र और सुखना ताला पंजाब को दिए जाएगे. केंद्र शासित प्रदेश के अन्य पंजाबी क्षेत्र पंजाब को तथा हिंदी भाषी क्षेत्र हरियाणा को दिए जाएगे.

समझौते के तुरंत बाद शान्ति आसानी से स्थापित नहीं हुई. हिंसा का चक्र लगभग एक दशक तक चलता रहा. केंद्र सरकार को पंजाब में राष्ट्रपति शासन लागू करना पड़ा. 1990 के दशक के मध्यवर्ती वर्षों में पंजाब में शान्ति की स्थापना हुई. 1997 में अकाली दल और भाजपा गठबंधन को चुनावों में जीत हासिल हुई और इसके बाद राजनीति धर्मनिरपेक्षता के मार्ग पर चल पड़ी.

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