मेरी प्रथम रेल यात्रा पर निबंध | Rail Se Pehli Yatra Essay In Hindi

प्रिय दोस्तों Rail Se Pehli Yatra Essay In Hindi के इस लेख में हम मेरी प्रथम रेल यात्रा पर निबंध के बारें में पढेगे. बच्चों के लिए कक्षा 1,2,3,4,5,6,7,8,9,10 वीं के स्टूडेंट्स रेल यात्रा पर निबंध का उपयोग कर सकते हैं. सरल भाषा में जीवन अनुभव पर आधारित ऐसे सवाल परीक्षा में भी पूछे जाते हैं.

Rail Se Pehli Yatra Essay In Hindi

मेरी प्रथम रेल यात्रा पर निबंध Rail Se Pehli Yatra Essay In Hindi

मेरी प्रथम रेल यात्रा पर निबंध Rail Se Pehli Yatra Essay In Hindi

प्राचीनकाल में यात्राएं इतनी सुगम नहीं थीं. जितनी कि आज हैं. निसंदेह विज्ञान ने आज संसार को बहुत ही निकट ला दिया हैं. यद्पि यात्राओं में कष्ट तो होता हैं. किन्तु नये स्थानों, प्राकृतिक दृश्यों तथा अनेक धार्मिक स्थानों के दर्शन से सारा कष्ट आनंद में बदल जाता हैं.

प्रस्थान: मुझे मई के आरम्भ में अजमेर की यात्रा करनी पड़ी. मैंने अपनी सीट आठ दिन पूर्व ही सुरक्षित करा ली थी. मैंने अजमेर जाने की तैयारियाँ कीं और जरुरी सामान लेकर स्टेशन पर आ गया.

रेलवे स्टेशन का वर्णन: टिकट घर पर सैकड़ों व्यक्ति पंक्तियों में खड़े टिकट ले रहे थे. कुछ लोग इस बात के लिए प्रयत्नशील थे कि टिकट शीघ्र मिल जाए. इसलिए कभी कभी धक्का मुक्की हो जाती थी लेकिन पुलिस के सिपाही शांति बनाये रखने में प्रयत्न शील थे. स्टेशन पर बड़ी भीड़ थी.

प्लेटफोर्म पर मेला सा लगा हुआ था. लगभग रात के 12 बजे हमारी गाड़ी सवाई माधोपुर पर आई. भीड़ के कारण चढ़ने में कुछ परेशानियां आईं. थोड़ी देर में हमारी गाड़ी चल दी.

यात्रा का वर्णन: गाड़ी तेजी से चली जा रही थी. इधर हम पर निद्रा देवी ने अधिकार जमा लिया. प्रातः काल के 5 बजे थे, जयपुर थोड़ी दूर ही रहा होगा. कि मेरे साथी जागे और उन्होंने अपना सामान सम्भालना आरम्भ कर दिया. जयपुर पर वे लोग मुझसे विदा ले गये.

कुछ क्षणों के बाद उस स्थान पर अन्य यात्री आ गये तथा उनसे परिचय आरम्भ हो गया. प्रातःकाल का सुहावना समय था. शीतल मंद सुगंध हवा चल रही थी. लगभग 9 बजे मैंने अंतिम हिन्दू सम्राट पृथ्वीराज चौहान की सुंदर एवं आकर्षक नगरी अजमेर में प्रवेश किया. गाड़ी के सामान उतारकर कुली पर रखवाकर प्लेटफोर्म के बाहर आया और धर्मशाला चला गया.

उपसंहार: रेल यात्रा में बड़े आनन्द आते हैं. नवीन दृश्यों से मन मोहित हो जाता हैं. अपरिचित व्यक्तियों से भेंट होती है. विभिन्न प्रकार की वेशभूषा, भाषा तथा बोलियों से परिचय होता हैं. इस प्रकार यात्रा करने से हमारा ज्ञान बढ़ता हैं.

Rail Yatra Essay In Hindi

कहा जाता हैं कि यदि भारत की सैर करनी हो तो सबसे सस्ता एवं सुलभ साधन रेल के सिवाय और दूसरा नहीं हैं. रेल भारत की सबसे अच्छी एवं विविधतापूर्ण तस्वीर प्रस्तुत करती हैं. रेल यात्रा के महत्व एवं पर्यटन से इसके सीधे सम्बन्ध को देखते हुए भारतीय रेलवे समय समय पर विशेष प्रकार की रेलगाड़ियों का परिचालन करवाती हैं.

कुछ ऐसी भी रेलगाड़ियाँ हैं जो अपनी विशेषता के लिए विश्वभर के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं. डेक्कन ओडिसी, पैलेस ओन व्हील्स, हेरिटेज ओन व्हील्स, महाराजा एक्सप्रेस, फेयरी क्वीन एवं रॉयल राजस्थान ओन व्हील्स कुछ ऐसी ही रेल गाड़ियाँ हैं.

इन सबके अतिरिक्त दार्जलिंग में चलने वाली टॉय ट्रेन भी पर्यटन के दृष्टिकोण से विशेष महत्व रखती हैं. रेलवे को भारत की जीवन रेखा कहा जाता हैं. किसी न किसी उद्देश्य से प्रत्येक व्यक्ति को कभी न कभी रेलगाड़ी से यात्रा करनी ही पड़ती हैं.

रेल यात्रा के कई लाभ हैं. इसके माध्यम से लम्बी दूरी को कम समय में तय किया जा सकता है. यह बस से यात्रा करने की अपेक्षा काफी सस्ती होती हैं. लम्बी दूरी का सफर बस से तय करना काफी कष्टप्रद होता हैं, जबकि रेलगाड़ी में लम्बी दूरी के सफर को देखते हुए शौचालय के साथ साथ अन्य कई प्रकार की सुविधाएँ होती हैं, जिससे यात्री लाभान्वित होता हैं.

यदि सपरिवार यात्रा करनी हो तो रेल के अलावा दूसरा कोई बेहतर विकल्प दिखाई नहीं पड़ता. इस तरह रेलगाड़ी से यात्रा करने से न केवल समय की बचत होती हैं, बल्कि धन की बचत भी होती हैं एवं यात्रा सुविधाजनक भी होती हैं.

रेल यात्रा के कई फायदे हैं, तो इसके साथ ही कभी कभी कुछ ऐसी घटनाएं भी जुड़ जाती हैं, जो इस यात्रा को काफी दुखद बना देती हैं. पिछले कुछ वर्षों में रेलगाड़ियों में विभिन्न प्रकार के अपराधों में वृद्धि हुई हैं. जहरखुरानी गिरोहों द्वारा यात्रियों को नशीला पदार्थ खिलाकर उनसे लूटपाट, हिंसा इत्यादि के कारण भारत में रेल यात्रा कभी कभी दुखद बन जाती हैं.

कुछ यात्री जबर्दस्ती आरक्षित सीटों पर कब्जा कर लेते हैं, जिससे अन्य यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता हैं. बिना टिकट यात्रा करने वालों के कारण रेलवे को तो घाटा होता ही हैं, ये लोग अन्य यात्रियों को भी बिना वजह परेशान करते रहते हैं. इसके अतिरिक्त रेलगाड़ियों में भीख मांगने वालों की संख्या में भी दिन प्रतिदिन वृद्धि होना चिंता का विषय हैं.

रेलों में चाय या अन्य सामान बेचने वाले लोग भी यात्रियों के साथ दुर्व्यवहार करते हैं. इन घटनाओं के कारण रेल यात्रा दुःखद हो जाती हैं. इन सबके अतिरिक्त रेलगाड़ियों का देर से परिचालन भी रेल यात्रा का एक दुखद पहलू हैं. कभी कभी डिब्बे के गेट पर खड़े होने वाले कुछ यात्री भी दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं.

किन्तु यदि कुछ सावधानी बरती जाएं, तो इन परेशानियों से काफी हद तक बचा जा सकता हैं. रेल यात्रा को सुखद बनाने के लिए पहले ही सीट आरक्षित करवा लेनी चाहिए. यात्रा के दौरान किसी अजनबी से खाने पीने की सामग्री नहीं लेनी चाहिए. किसी प्रकार की संदेहास्पद वस्तुओं की स्थिति में रेलवे को सूचित करना चाहिए.

किसी भी व्यक्ति से किसी प्रकार की अनावश्यक बहस से जहाँ तक हो सके बचना चाहिए. ट्रेन आने के नियत समय से पहले प्लेटफार्म पर पहुँच जाना चाहिए. रेल में सवार होने से पहले टिकट की भली भांति जांच कर लेनी चाहिए. जिस डिब्बे की सीट आरक्षित हो उसी डिब्बे में सवार होना चाहिए.

डिब्बे के गेट पर यात्रा नहीं करनी चाहिए. शरीर का कोई भी अंग खिड़की से बाहर नहीं निकलना चाहिए, यदि बच्चे साथ हो तो उनका विशेष ख्याल रखने की आवश्यकता होती हैं. उन्हें कभी भी अपने से अलग नहीं करना चाहिए. यात्रा के दौरान खाने पीने के सामानों का भी उचित प्रबंध करके चलना चाहिए. इन बातों का ध्यान रखकर अपनी रेल यात्रा को सुखद बनाया जा सकता हैं.

भारतीय रेल के इतिहास पर नजर डालें तो भारत में रेलवे की शुरुआत 1853 में की गई थी. तब से लेकर अब तक इसमें कई प्रकार के परिवर्तन किये गये है और आज भारतीय रेलवे का दुनिया में एक विशेष स्थान हैं. इस समय भारत में कई प्रकार की रेलगाड़ियां चलाई जाती हैं.

मेल एवं एक्सप्रेस रेलगाड़ियों के अतिरिक्त पर्यटन के लिए विशेष रेलगाड़ियाँ भी चलाई जाती हैं. पैसेंजर रेलगाड़ियाँ महानगरों की जीवन रेखा का कार्य करती हैं महानगरों के अतिरिक्त भी कुछ क्षेत्रों में पैसेन्जर रेलगाड़ियों का परिचालन किया जाता हैं इन सबके अतिरिक्त राजधानी एक्सप्रेस, गरीब रथ जनशताब्दी एक्सप्रेस शताब्दी एक्सप्रेस इत्यादि कुछ विशेष प्रकार की भारतीय रेलगाड़ियाँ हैं.

वैसे तो हर प्रकार की यात्रा आनन्ददायक होती हैं, किन्तु रेल यात्रा का अपना अलग ही आनन्द हैं. इसलिए लोग रेल से की गई अपनी यात्रा को कभी भी भूलते नहीं. यदि यह यात्रा लम्बी हो और किसी विशेष रेल मार्ग पर तय की गई हो तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता हैं.

मुझे तो वर्ष में प्रायः हर महीने रेल से यात्रा करनी ही पड़ती हैं. इनमें से दिल्ली से शिमला मेरी एक ऐसी भी रेल यात्रा हैं, जिसे मैं कभी भूल नहीं सकता. उस दिन मैं नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंचकर अपनी ट्रेन की प्रतीक्षा कर रहा था. तय समय पर मेरी ट्रेन पहुँच गई.

मैं निर्धारित डिब्बे में अपने सामान के साथ सवार हो गया. मेरे साथ मेरे दो मित्र भी थे. थोड़ी देर बाद सिटी बजाते हुए ट्रेन चल पड़ी. ट्रेन के चलने के बाद हम आपस में बातें करने लगे. मैं खिड़की के पास बैठा था. ट्रेन की खिड़की के पास बैठने का भी अपना एक अलग ही मजा होता हैं.

खिड़की के बाहर झांकते हुए पेड़ पौधों को देखना काफी आनन्ददायक होता हैं. कुछ देर बाद हम लोगों ने मिलकर खाना खाया. रेलगाड़ी के हिमाचल प्रदेश की सीमा में प्रवेश करने के बाद पहाड़ों का अप्रितम सौन्दर्य वास्तव में देखने लायक था.

बड़े बड़े खूबसूरत पेड़ चलती ट्रेन से और भी खूबसूरत नजर आ रहे थे. पहाड़ों का सौन्दर्य भी बढ़ा हुआ प्रतीत होता था. ट्रेन कई स्टेशनों पर रूकते हुए जा रही थी. हर स्टेशन पर अपना एक अलग ही रूप रंग दिखाई पड़ता था. किसी स्टेशन की कोई चीज मशहूर होती, तो किसी अन्य स्टेशन की कोई अन्य चीज.

नया स्टेशन आते ही लोग आपस में इन्ही चीजों के बारें में बातें करने लगते. इन बातों के अतिरिक्त देश की वर्तमान राजनीति भी लोगों की बातचीत का मुख्य विषय था. हम सभी दोस्तों ने आपस में बात करने की बजाय उन लोगों की बातों का आनन्द लेना शुरू किया.

यह यात्रा वास्तव में कई अर्थो में मजेदार थी, शिमला पहुँचने के साथ ही मेरी रेल यात्रा समाप्त हो गई. हम लोगों ने पहले बस से वापस होने का निर्णय लिया था. इतनी मजेदार रेलयात्रा के बाद हमने सोचा फिर से रेल से वापस जाना अच्छा रहेगा. इसलिए हम शिमला की यात्रा शुरू करने से पहले वापसी का टिकट लेने टिकट काउन्टर पर पहुँच गये. मेरी यह रेल यात्रा मजेदार ही नहीं सुखद एवं यादगार भी रही.

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