राजस्थान की प्रसिद्ध छतरियां- Rajasthan Ki Chhatriyan

राजस्थान की प्रसिद्ध छतरियां- Rajasthan Ki Chhatriyanराजस्थान में राजाओं का राज्य रहा एवं यहाँ का श्रेष्ठी वर्ग सम्पन्न रहा, अतः मरणोप्रान्त उनकी याद में स्थापत्य की दृष्टि से विशिष्ट स्मारक बनाएं गये, जिन्हें छतरियाँ और देवल के नाम से जाना जाता हैं. 8,32,12,80 एवं 84 (चौरासी खम्भों की छतरी बूंदी) खम्भों की छतरियां राजस्थान में प्रसिद्ध हैं.

प्रसिद्ध राजस्थान की छतरियां- Rajasthan Ki Chhatriyan In Hindiराजस्थान की प्रमुख छतरियां- Rajasthan Ki Chhatriyan

अलवर में मूसी महारानी की छतरी, करौली में गोपालसिंह की छतरी, बूंदी में चौरासी खम्भों की छतरी, बूंदी में चौरासी खम्भों की छतरी, रामगढ़ में सेठों की छतरी, गेटोर में ईश्वर सिंह की छतरी, जोधपुर में जसवंत सिंह का थड़ा, उदयपुर में आयड़ की छतरियों का स्थापत्य व सौन्दर्य देखते ही बनता हैं.

Rajasthan Ki Chhatriyan- मुख्य छतरियां व स्थान

शेखावटी की छतरियाँ-

शेखावटी की छतरियों में चित्रित मानव जीवन के विविध द्रश्य अतीव आकर्षक हैं. राजाओं पर बने स्मारक भी इस क्षेत्र में संख्या में अधिक हैं. सीकर के शासकों देवीसिंह और लक्ष्मण सिंह पर विशाल छतरियाँ सीकर में बनी हुई हैं.

माधोसिंह, कल्याण सिंह और हर दयाल सिंह की छतरियों की सादगी, विशालता, उन्नत, अधिष्ठान आदि इसके मुलभुत तत्व हैं. शेखावटी की छतरियाँ शेखावत काल के वीरों का मुहं बोलता इतिहास हैं.

रामगढ़ शेखावटी धनाढ्य सेठों की नगरी कहलाती हैं. सेठ देश विदेशों में व्यापार से संचित अपार धन का सदुपयोग बड़ी बड़ी आलिशान हवेलियों को बनवाने में करते थे. रामगोपाल पोददार की छतरी शेखावटी संभाग की सबसे बड़ी मानी जाती हैं.

अलवर की छतरियाँ

अलवर के नेड़ा अंचल की छतरियों में कला और शिल्प का अनूठा संसार चित्रित हैं. ये भीति चित्रण की तत्कालीन दक्षता के साथ शिल्पकला के वैशिष्ट्य को भी दर्शाती हैं.

मंडोर की छतरियाँ-

लम्बे समय तक मारवाड़ की राजधानी रहे मंडोर में स्थापत्य कला की नक्काशी से युक्त विशाल देवल व पास ही बने पंचकुडा में भव्य छतरियाँ भी हैं, जो मंडोर के नैसर्गिक सौन्दर्य को चार चाँद लगाती हैं.

मंडोर में देवलों के नाम से विख्यात स्मृति स्मारक हैं. जिसमें राव मालदेव से लेकर तख्तसिंह तक के मारवाड़ के शासक शासकों के विख्यात स्मारक हैं. ये स्मारक लाल घोटू के पत्थरों से निर्मित हैं, जिन पर पाषाण के शिल्पियों के सुंदर तक्षण कला स्पष्ट तौर पर देखी जा सकती हैं. विशालकाय देवलों में महाराजा जसवंतसिंह, अजीतसिंह व तखतसिंह के देवल तो यहाँ विशेष निधि बन गये हैं.

chaurasi khambon ki chhatri, bundi

बूंदी में स्थित इस छतरी का निर्माण बूंदी के राव राजा अनिरुद्ध सिंह ने अपने धायभाई देवा की स्मृति में सन 1683 ई में सम्पूर्ण करवाया था. यह छतरी अपनी भव्यता और नक्काशी के कारण देश भर में विख्यात हैं.

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