Rajasthan Ki Nadiya Gk In Hindi : राजस्थान की नदियाँ : Rivers of Rajasthan

Rajasthan Ki Nadiya Gk In Hindi राजस्थान की नदियाँ Rivers of Rajasthan : प्रिय दोस्तों आपका स्वागत हैं आज हम rajasthan rivers list in hindi राजस्थान की प्रमुख नदियाँ Rivers के बारें में जानेगे. राजस्थान सामान्य ज्ञान के नदी व झील के इस अध्याय में परीक्षा के लिए उपयोगी प्रश्न उत्तर समरी व gk नोट्स आप पढेगे. चलिए अब हम Rajasthan Ki Nadiya के बारें में जानते हैं.

Rajasthan Ki Nadiya Gk In Hindi

Rajasthan Ki Nadiya Gk In Hindi

राजस्थान की अधिकांश नदियाँ बरसाती हैं. माही व चंबल प्रमुख बारहमासी नदी तथा लूणी व बनास बरसाती नदियाँ हैं. अरावली पर्वत श्रखला राजस्थान की नदियों को दो भागों में विभाजित करती हैं.

  • बंगाल की खाड़ी में जल ले जाने वाली नदियाँ– चंबल, बनास, काली सिंध, पार्वती, बाणगंगा, खारी, बेडच, ग्भीरी अरावली के पूर्वी भाग में प्रवाहित होती हैं.
  • अरब सागर में जल ले जाने वाली नदियाँ– माही, सोम, जाखम, साबरमती, पश्चिमी बनास, लूणी आदि. पश्चिमी बनास व लूनी गुजरात के कच्छ के रण में विलुप्त हो जाती हैं.
  • आंतरिक प्रवाह की नदियाँ– वे नदियाँ जो राजस्थान में अपने प्रवाह क्षेत्र में ही विलुप्त हो जाती हैं तथा जिनका जल समुद्र तक नहीं जा पाता हैं. वे नदियाँ है काकनी, कांतली, साबी, घग्घर, मेंथा, बांडी रूपनगढ़ आदि.

Rajasthan Ki Nadiya Gk Notes 2019

राजस्थान में चुरू व बीकानेर ऐसे जिले हैं जहाँ कोई नदी नहीं हैं. गंगानगर में यदपि कोई पृथक नदी नहीं हैं लेकिन वर्षा होने पर घग्घर की बाढ़ का पानी सूरतगढ़ और अनूपगढ़ तक चला जाता हैं. राज्य में पूर्णतः बहने वाली सबसे लम्बी नदी तथा सर्वाधिक जल ग्रहण वाली नदी बनास हैं.

राजस्थान की सबसे लम्बी नदी व सर्वाधिक सतही जल वाली नदी चंबल हैं. राज्य में कोटा संभाग में सर्वाधिक नदियाँ हैं. सर्वाधिक बाँध चंबल नदी पर बने हुए हैं. चम्बल नदी पर भैंसरोड़गढ़ (चित्तौड़गढ़) के निकट चूलिया प्रपात तथा मांगली नदी पर बूंदी में प्रसिद्ध भीमतल प्रपात हैं.

राज्य के लगभग ६० प्रतिशत क्षेत्र में आंतरिक जल प्रवाह प्रणाली विद्यमान हैं. सर्वाधिक जिलों में बहने वाली नदियाँ चंबल बनास व लूनी प्रत्येक नदी 6 जिलों में बहती हैं. अन्तर्राज्यीय सीमा (राजस्थान व मध्यप्रदेश की सीमा) बनाने वाली राजस्थान की एकमात्र नदी चंबल हैं.

माही, सोम, जाखम नदियों के संगम पर स्थित बेणेश्वर धाम वनवासियों का महातीर्थ हैं. सोम नदी के किनारे डूंगरपुर में सोम नाथ का मन्दिर स्थित हैं.

राजस्थान में नदियों के किनारे संगम पर बनें दुर्ग

  • गागरोन का किला- आहू व कालीसिंध नदियों के संगम पर
  • भैंसरोड़गढ़ दुर्ग – चंबल व बामनी नदियों के संगम पर
  • शेरगढ़ दुर्ग- परवन नदी के किनारे
  • चित्तौड़गढ़ दुर्ग- गम्भीरी बेडच नदियों के किनारे
  • मनोहर थाना दुर्ग- परवन व कालीखाड नदियों के संगम पर
  • गढ़ पैलेस , कोटा दुर्ग- चंबल नदी के किनारें

राजस्थान में नदियों के निकट स्थित अभ्यारण्य

  • राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभ्यारण्य- चंबल नदी
  • जवाहर सागर अभ्यारण्य- चंबल नदी
  • शेरगढ़ अभ्यारण्य – परवन
  • बस्सी अभ्यारण्य- ओरई व बामनी का संगम
  • भैंसरोड़ गढ़- चंबल व बामनी का संगम

नदियों पर बसे प्रमुख नगर

  • चंबल- कोटा
  • जवाई- सुमेरपुर पाली
  • बेडच- चित्तोडगढ
  • खारी- आसींद भीलवाड़ा
  • कालीसिंध- झालावाड़
  • पं बनास- डीसा
  • लूनी- बालोतरा
  • साबरमती- गांधीनगर

नदियों के त्रिवेणी संगम स्थल

  • बनास-मेनाल-बेडच – बागोद भीलवाड़ा
  • माही-जाखम-सोम- बेणेश्वर, डूंगरपुर
  • बनास, चंबल, सीप- रामेश्वर घाट सवाईमाधोपुर
  • बनास, डाई व खारी- राजमहल टोंक

राजस्थान की मुख्य नदियाँ

लूनी

  • उद्गम- अजमेर की नाग पहाड़ियाँ
  • बहाव क्षेत्र- अजमेर, नागौर, पाली, जोधपुर, बाड़मेर, जालौर, गुजरात, कच्छ के रन में विलुप्त हो जाती हैं.
  • 495 किमी लम्बी यह नदी पूर्णतया बरसाती हैं इसका जल बालोतरा बाड़मेर तक मीठा तथा बाद में खारा हैं.
  • सहायक नदियाँ- सूकड़ी, मीठडी, बांडी खारी, जवाई, लीलड़ी, गुहिया एवं सागी जोजड़ी हैं.

जवाई

  • उद्गम- बाली पाली के पास गोरियाँ गाँव की पहाड़ियाँ
  • बहाव क्षेत्र- पाली, जालौर बाड़मेर में यह लूनी में मिल जाती हैं.
  • सुमेरपुर पाली के निकट इस पर जवाई बाँध बना हुआ हैं.

घग्घर (मृत नदी)

  • उद्गम- हिमाचल प्रदेश में शिमला के पास शिवालिका की पहाड़ियाँ
  • राजस्थान में यह हनुमानगढ़ जिले की टिब्बी तहसील के तलवाड़ा गाँव के पास प्रवेश कर हनुमानगढ़ में बहती हुई भटनेर के पास विलुप्त हो जाती हैं लेकिन वर्षा ऋतू में यह गंगानगर में सूरतगढ़ व अनूपगढ़ के कुछ गाँवों तक पहुच जाती हैं. इस नदी में अक्सर बाढ़ आती रहती हैं.
  • यह वैदिकसंस्कृति की सरस्वती नदी कहलाती हैं.

पश्चिमी बनास

  • उद्गम-सिरोही के दक्षिण में नया सानवारा गाँव के निकट अरावली की पहाड़ियाँ
  • प्रवाह क्षेत्र- सिरोही, गुजरात, कच्छ के रण गुजरात में विलुप्त हो जाती हैं. सहायक नदी- सूकली
  • इस नदी के तट पर डीसा नगर बसा हुआ हैं.

माही 

  • उद्गम- मध्यप्रदेश में धार जिले के सरदारपुरा के निकट विध्यांचल की पहाडियों में मेह्द झील
  • बहाव क्षेत्र- यह राजस्थान में बाँसवाड़ा के खांदू के पास प्रवेश करती हैं तथा बाँसवाड़ा डूंगरपुर में सीमा बनाती हुई गुजरात के महीसागर जिले में प्रवेश करती हैं. इस नदी पर कडाना बाँध यही बना हुआ हैं. फिर खम्भात की खाड़ी में गिरती हैं. इसके प्रवाह क्षेत्र को छप्पन का मैदान कहते हैं. यह तीन राज्यों मध्यप्रदेश, राजस्थान व गुजरात में बहती हैं.
  • लम्बाई- 576 किमी इसे वागड़ व कांठल की गंगा तथा दक्षिणी राजस्थान की स्वर्ण रेखा भी कहते हैं.
  • यह नदी कर्क रेखा को दो बार पार करती हैं.
  • इसकी सहायक नदियाँ इरू, सोम, जाखम, अनास, हरण, चाप, मोरेन व भादर हैं.
  • बाँसवाड़ा के बोरखेड़ा ग्राम के पास इस पर माही बजाज सागर बाँध बना हुआ हैं.

सोम 

  • इसका उद्गम तहसील खेरवाड़ा में ऋषभदेव उदयपुर के निकट बिछामेडा की पहाड़िया हैं. बेणेश्वर स्थान पर माही में विलय, जाखम टी डी, गोमती व सारनी इसकी सहायक नदियाँ हैं.

जाखम

  • उद्गम स्थल छोटी छादडी, प्रतापगढ़, विलय बेणेश्वर के पास सोम नदी में

चंबल/चमर्णवती/कामधेनु

  • उद्गम- मध्यप्रदेश में इंदौर जिले के महू के निकट विध्यांचल पर्वत की जानापाव पहाड़ियाँ
  • बहाव क्षेत्र- उद्गम स्थल से 320 किमी उत्तर में बहने के बाद यह मध्यप्रदेश के मदसौर जिले से राजस्थान के चौरासीगढ़ के निकट प्रवेश करती हैं. तथा दक्षिणी पूर्वी राजस्थान चित्तौड़गढ़, कोटा, बूंदी, सवाईमाधोपुर, करौली व धौलपुर में बहती हुई उत्तर प्रदेश मे इटावा के निकट यमुना में मिल जाती हैं. यह सवाईमाधोपुर से धौलपुर जिले तक राजस्थान व मध्यप्रदेश की सीमा बनाती हैं. चंबल यमुना की सहायक नदी हैं. चंबल तीन राज्यों मध्यप्रदेश राजस्थान तथा उत्तरप्रदेश में बहती हैं.
  • यह बारहमासी नदी हैं इसकी कुल लम्बाई 1051 किमी, राजस्थान में केवल 322 किमी बहती हैं.
  • सहायक नदियाँ- मध्यप्रदेश में मिलने वाली सीवान, रेतम, शिप्रा, राजस्थान में मिलने वाली आलनिया, परवन, बनास, काली सिंध, पार्वती, बामनी, कुराल, मेज, छोटी काली सिंध आदि.
  • इस पर भैंसरोड़गढ़ के निकट चूलिया प्रपात हैं सर्वाधिक बीहड़ इसी नदी क्षेत्र में हैं.
  • इस नदी पर गांधी सागर, राणाप्रताप सागर, जवाहर सागर बाँध व कोटा बैराज बने हुए हैं.
  • इस नदी का बहाव क्षेत्र उत्खात स्थलाकृति का हैं.

पार्वती

  • उद्गम- सेहोर में विध्यांचल श्रेणी, सवाई माधोपुर व कोटा की सीमा में चंबल में विलय

काली सिंध

  • उद्गम- देवास मध्यप्रदेश के पास बांगली गाँव की पहाड़ियाँ
  • यह नदी झालावाड में रायपुर के निकट राजस्थान में प्रवेश करती हैं राज्य में यह झालावाड़ तथा फिर कोटा बारां की सीमा पर बहती हुई कोटा में चंबल में मिल जाती हैं.
  • आहू, परवन, आमझार, चौली, उजाड़ इसकी सहायक नदियाँ हैं.

आहू

  • यह सुसनेर के निकट से निकलकर झालावाड़ में नंदपुर के समीप प्रवेश करती हैं तथा कोटा व झालावाड़ की सीमा में बहती हुई गागरोन झालावाड़ में काली सिंध में मिल जाती हैं.

बनास/वन की आशा

  • उद्गम- राजसमन्द में कुम्भलगढ़ के निकट खमनौर की पहाड़ियाँ
  • यह राजसमन्द, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, अजमेर, टोंक में बहकर सवाईमाधोपुर में रामेश्वर के निकट चंबल में मिल जाती हैं.
  • पूर्णतः राजस्थान में बहने वाली यह सबसे लम्बी नदी हैं. यह बरसाती नदी हैं राज्य में इसका जलग्रहण क्षेत्र सर्वाधिक हैं.
  • सहायक नदियाँ- दाई तरफ से मिलने वाली नदियाँ- बेडच व मेनाल
  • बायीं तरफ से मिलने वाली नदियाँ- कोठारी, खारी, डाई, ढील, सोहादरा, मोरेल व कालीसिल
  • टोंक जिले में बीसलपुर बाँध इसी नदी पर निर्मित हैं.

बेडच

  • यह उदयपुर के उत्तर में गोगुन्दा की पहाड़ियों से निकलती हैं. तथा उद्य्पुर्म चित्तौड़गढ़ में बहती हुई भीलवाड़ा में मांडलगढ़ तहसील में बीगोद के निकट बनास नदी में मिल जाती हैं. वहीँ मेनाल नदी भी इसमें मिलती हैं इनके संगम स्थल को त्रिवेणी कहते हैं.
  • प्रारम्भ में इसे आयड़ नदी के नाम से तथा उदयसागर झील के उपरान्त इसे बेडच नदी कहते हैं.
  • चित्तौड़गढ़ की गम्भीरी, गुजरी, ओराई व वामन नदियाँ इसकी सहायक नदियाँ हैं.
  • चित्तौड़गढ़ के अप्पवास गाँव के निकट इस नदी पर घोसुंडा बाँध बना हुआ हैं.

गंभीर

  • उद्गम- करौली तहसील
  • प्रवाह- करौली, भरतपुर, उत्तरप्रदेश, धौलपुर, उत्तरप्रदेश के मैंनपूरी जिले में यमुना में मिल जाती हैं. पांचना व पार्वती इसकी सहायक नदियाँ हैं.

पार्वती

  • यह करौली जिले की सपोटरा तहसील की पहाड़िया से निकलकर धौलपुर में गंभीर नदी में मिल जाती हैं, इस नदी पर धौलपुर में पार्वती बाँध बनाया गया हैं.

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