रामनवमी पर्व पर निबंध | Ram Navami Festival Essay In Hindi

रामनवमी पर्व पर निबंध | Ram Navami Festival Essay In Hindi : रामनवमी एक महत्वपूर्ण हिन्दू पर्व हैं वर्ष 2019 में इसे 14 अप्रैल को मनाया जाना हैं. हिन्दू कलेंडर के मुताबिक़ चैत्र माह की शुक्ल नवमी के दिन भगवान राम का जन्म हुआ था इसी उपलक्ष्य में रामजन्मोतस्व अथवा राम नवमी का पर्व भारत में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता हैं. यहाँ Ram Navami Festival Essay In Hindi में हम रामनवमी के इतिहास कथा पर्व महत्व को संक्षिप्त में जानेगे.

रामनवमी पर्व पर निबंध | Ram Navami Festival Essay In Hindiरामनवमी पर्व पर निबंध Ram Navami Festival Essay In Hindi

मर्यादापुरुषोत्तम राम का जन्म चैत्र शुक्ल नवमी को महारानी कौशल्या की कोख से हुआ था. इसलिए यह रामनवमी के नाम से पुकारी जाती हैं. पूरे भारतवर्ष के हिन्दू परिवार में खासतौर पर राम का यह जन्म महोत्सव मनाया जाता हैं.

प्रत्येक राम मंदिर में भक्तो द्वारा राम का गुणगान किया जाता हैं. श्री राम को पंचामृत में स्नान कराके धूप, दीप, नैवेद्य इत्यादि के द्वारा अभ्यर्चना करनी चाहिए.

गोस्वामी तुलसीदास ने अपने अमर काव्य रामचरितमानस मानस की रचना इसी दिन अयोध्या में आरम्भ की गई थी. अयोध्या में इस दिन बड़ा भारी मेला लगता हैं. दूर दूर अंचलों से आये हुए यात्री राममूर्ति दर्शन, सरयू स्नान तथा आदि पुरुष की अतीत लीलाओं में खो जाते हैं.

भक्तजनों को इस दिन मध्यान्ह तक उपवास रखना चाहिए, रामचरित मानस का पाठ कर दोपहर के समय भगवान की आरती उतारी जाती हैं.

2019 Ram Navami Festival Essay In Hindi Language

रामनवमी हिन्दुओं का सांस्कृतिक पर्व हैं. यह पर्व मर्यादापुरुषोत्तम भगवान् राम के जन्मदिन के रूप में प्रति वर्ष चैत्र शुक्ल नवमी को धूमधाम से मनाया जाता हैं. भगवान राम अयोध्या में आज से हजारों वर्ष पहले राजा दशरथ के पुत्र के रूप में उत्पन्न हुए थे. उनकी माता का नाम कौसल्या तथा शेष तीन भाइयों के नाम क्रमशः भरत, लक्ष्मण तथा शत्रुघ्न थे. भरत की माता कैकेयी तथा शत्रुघ्न और लक्ष्मण की माँ सुमित्रा थी.

राजकुमार श्रीराम तथा उनके भाइयों को शिक्षा दीक्षा का प्रबंध विशिष्ठ मुनि के आश्रम में हुआ. वे उनके पूज्य गुरू थे. कुछ विशेष शस्त्रासत्रों की जानकारी उन्हें महर्षि विश्वामित्र से प्राप्त हुई थी. विश्वामित्र के साथ ही वे अपने भाई लक्ष्मण के साथ महाराज जनक की राजधानी मिथिला में हो रहे धनुषयज्ञ में शामिल होने के लिए गये थे.

यहाँ पर भगवान शंकर का दिया हुआ एक दिव्य धनुष जनक के पास था. जनक ने घोषणा की थी कि जो राजकुमार इस धनुष प्रत्यंचा चढ़ा देगा, उसके साथ वे अपनी पुत्री सीता का विवाह कर देगे. देवयोग से वहां आए राजपुत्रों में से कोई भी यह दुष्कर कार्य नहीं कर सका, जनक निराश थे अंत में उन्हें कहना पड़ा.

तजहु आस निज गृह जाहू
लिखा न विधि वैदेहि विवाहू

तभी उचित अवसर जानकर विश्वामित्र जी ने राम से कहा कि वे उठकर धनुष भंग करके जनक की परेशानी दूर करे.

उठहु राम भंजहु भव चापू
मेटहु तात जनक परितापु

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