Ramsnehi Sant Ramcharan Ji & Ram Sanehi Sampraday In Hindi

Ramsnehi Sant Ramcharan Ji & Ram Sanehi Sampraday In Hindi: मध्यकालीन राजस्थान में जो समाज एवं धर्म सुधार के लिए सम्प्रदाय स्थापित किए गये, उन सम्प्रदायों में रामस्नेही सम्प्रदाय का विशेष महत्व हैं. रामस्नेही सम्प्रदाय की स्थापना रामचरणजी ने की थी. इस सम्प्रदाय में अनेक केंद्र राजस्थान में स्थापित हुए जैसे शाहपुरा भीलवाड़ा में संत रामचरणजी, रैण नागौर में संत दरियावाजी, सिंह्थल बीकानेर में संत हरिदास जी, खेड़ापा जोधपुर में संत रामदासजी आदि.Ramsnehi Sant Ramcharan Ji & Ram Sanehi Sampraday In Hindi

Ramsnehi Sant Ramcharan Ji & Ram Sanehi Sampraday

रामचरण जी निर्गुण भक्ति में विश्वास करते थे. उन्होंने मोक्ष प्राप्ति के लिए गुरु को अत्यधिक महत्व दिया. उनका विचार था कि गुरु ब्रह्म के समान होता हैं और वही मनुष्य को संसार रूपी भवसागर से पार उतार सकता हैं.

रामस्नेही सम्प्रदाय में राम की उपासना पर बल दिया गया हैं. राम से उनका अर्थ निर्गुण निराकार ब्रह्म से हैं, उन्होंने मूर्ति पूजा और बाह्य आडम्बरों का विरोध किया. इस सम्प्रदाय के प्रार्थना मंदिर ‘रामद्वारा’ कहलाते हैं जहाँ समय समय पर मेले भरते हैं तथा भजन संध्या का आयोजन होता हैं.

विक्रम संवत् 1871 में रामस्नेही सम्प्रदाय की स्थापना रामचरण जी के शिष्य रामजन जी द्वारा की गई थी. श्री राम दयाल जी वर्तमान में राजस्थान में रामस्नेही सम्प्रदाय की मुख्य पीठ शाहपुरा भीलवाड़ा के मठाधीश हैं. धर्म को व्यवसाय के रूप में, तथा बाहरी ढोंग का रूप देकर लोगों को भ्रमित करने वालों से दुखी होकर स्वामी जी ने इस नयें सम्प्रदाय की नीव रखी थी.

इनका जन्म रामकृष्ण विजयवर्गीय माघ शुक्ला 14, 1776 बिक्रम संवत (24 फरवरी, 1720 ईस्वी) सोडा गांव, टोंक में हुआ था. इनके पिता जी का नाम कृपाराम जी था.

उच्च आदर्शों तथा मानवीय मूल्यों को अधिक महत्व देने वाले इस सम्प्रदाय के संतों ने लोकभाषा के जरिये ही आम लोगों तक अपनी बात पहुचाई तथा उन्हें एक सूत्र में बाँधने का प्रयत्न किया. हिंदू-मुसलमान, जैन- वैष्णव, द्विज- शूद्र, सगुण-निर्गुण, भक्ति व योग के प्रतिरोध को समाप्त कर एक ऐसे धर्म सम्प्रदाय की स्थापना हुई, जों मानवीय मूल्यों एवं आदर्शों में विश्वास रखता हैं. जिसके मध्य में रुढ़िवादी विचार, ढोंग, अंधविश्वास से परे होकर मानव मात्र को रखा गया.

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