चित्तौड़ की रानी पद्मावती की कहानी | Rani Padmavati in Hindi

Rani Padmavati in Hindi

सोते मन में स्मृति सुन्दरी ,लहर लहर लहरे,
चित्र खीचती चपला क्षितिज पर, कोई न ठहरे,
जौहर की जीत लिए दिल में ,तेज तेगा वेग बढे,
पद्मिनी की सुन्दरता में खलजी की खिल्ली उड़े||

13वी सदी में दिल्ली की गद्दी पर सल्तनत का का शासन था.शासक की यह चाह थी कि पुरे भारत वर्ष पर उसका शासन हो ! इसलिए अधीनता ना स्वीकार करने वाली रियासतों और राज्यों पर आक्रमण करना आरम्भ कर दिया | जिनमे उनकी पहली नजर थी राजपूताने के मेवाड़ की

जिन्होंने कभी भी दिल्ली सल्तनत की अधीनता स्वीकार नहीं की थी अब यह पहली नज़र थी दिल्ली के शासक अलाउदीन खिलजी की एक बार उन्होंने मेवाड़ राज्य पर आक्रमण किया तो उनकी बुरी नजर मेवाड़ की महारानी रानी पद्मावती Padmavati पर पड़ी !

चित्तौड़ की रानी पद्मावती की कहानी | Rani Padmavati in Hindi

  • रानी पद्मावती का जीवन परिचय/इतिहास (rani padmavati life introduction history in hindi)

    रानी पद्मावती उस समय की अद्वतीय सुंदरी थी कहा जाता हैं कि रानी पदमिनी को देखकर अलाउदीन उनकी सुन्दरता पर मोहित हो गया था और उसे पाने के लिए मेवाड़ पर आक्रमण किया और इसी घटना पर आधारित रानी पद्मावती की यह शोर्य गाथा हैं | रानी पद्मावती के माता का नाम चंपावती और पिता का नाम गंधर्वसेन था रानी पद्मिनी के पिता गंधर्वसेन सिंहल प्रान्त के राजा थे बाल्यकाल में पद्मिनी के पास एक तोता हुआ करता था उसका नाम हीरामणि था ..वह उन्ही के साथ अपना अधिकतर् समय व्यतीत करती थी.

    पद्मावती बचपन से ही बहुत सुन्दर थी और विवाह योग्य होने पर पदमिनी के पिता ने स्वय-वर का आयोजन किया गया उनमे भारत वर्ष के सभी राजाओ के राजकुमारों को आमत्रण दिया गया मेवाड़ के राजा रतन सिंह विवाहित होने के बावजूद इस स्वय-वर में पहुचे.इस स्व्य-वर में एक छोटे से प्रदेश के राजा मलखान सिंह और मेवाड़ शासक रतन सिंह का मुकाबला हुआ इसमे रतन सिंह ने मलखान को पराजित कर Padmavati से विवाह कर राजधानी चित्तौड़ ले आये|

  • संगीतकार राघव चेतन का अपमान (Composer Raghav Chetan insult)

    विवाह के बाद रतनसिंह चित्तौड़ पर राजपूत राजा रावल रतन सिंह का शासन था रतनसिंह के दरबार में कई कलाकार और संगीतकार थे. जिनमे Raghav Chetan नाम का एक संगीतकार था.वो एक जादूगर भी था अपनी कला का उपयोग कर विपक्षी को मात देने की कला थी.

    किसी विषय पर विवाद होने के कारण रतनसिंह को संगीतकार राघव चेतन पर गुस्सा आया और उन्हें मुह काला कर उसे गधे पर बिठाकर राज्य से बाहर निकाल दिया इस कारण संगीतकार राघव चेतन रतनसिंह का दुश्मन बन गया और जा कर दिल्ली के शासक खिलजी से जा मिला और रतनसिंह के खिलाफ युद्ध करने की शिक्षा देने लगा|

    रागव ने खिलजी का दिल जितने के लिए एक योजना बनाई. दिल्ली के पास ही एक जंगल में छिप गया जहा खिलजी अपने दल के साथ शिकार खेलने आया करता था .जैसे ही खिलजी का दल जंगल में प्रवेश किया तो राधव ने मधुर धुन में बांसुरी बजाने लगा.यह सुन खिलजी विचार में पड़ गया और उन्हें अपने दरबार में पेश करने का आदेश दे दिया |

    राघव चेतन ने चालाकी से रतनसिंह को बर्बाद करने के लिए खिलजी के सामने रानी पद्मावती की अदितीय सुन्दरता का बखान करने लगा | यह सब सुनकर खिलजी को मोह वासना जाग्रत हो उठी और उन्होंने रानी पद्मावती को पाने का प्रण ले लिया और अपनी सेना को चितोड़ पर आक्रमण कर Padmini को अपनी पत्नी बनाने की सोची |

  • रानी पद्मावती और खिलजी का चित्तौड़ पर आक्रमण (Alauddin Khalji and Padmavati Love Story in Hindi) रानी पद्मावती को पाने की ललक ने खिलजी ने चितोड़ के लिए पर आक्रमण की ठानी| रानी पद्मिनी को पाने के लिए खिलजी ने एक चाल चली और रतनसिंह को पत्र लिख कर कहा की रानी पद्मिनी को वह अपनी बहिन समान मानता हैं और एक बार उनके दर्शन करना चाहता हैं.

    इस पर रतनसिंह ने सहमती जताई और रानी पद्मावती ने काच में अपना चेहरा दिखाने को राजी हो गया खिलजी अपने रक्षको के साथ महल में प्रवेश किया और रानी पद्मिनी की सुन्दरता देखकर खिलजी पागल सा हो गया और उसने राजा रतनसिंह को बंदी बना दिया उसी समय सेनापति गोरा और बादल ने एक चाल को चलते हुए खिलजी को पत्र लिखा की कल सुबह रानी पद्मिनी को खिलजी के हाथो सोप दिया जायेगा|

    अगले दिन सुबह होते ही 150 पालकी के साथ रतनसिंह की सेना के सेनापति गोरा और बादल साथ थे उस समय रतनसिंह खिलजी के अधिकार में बंदी थे.इन पालकियो को देखकर खिलजी उत्साहित हुआ और सोचा इसी में ही पद्मावती को लेकर आये हैं.

    मगर इस मे गोरा बादल की चाल थी इन पालकियो में राजा रतन सिंह को बचाने पहुचे गोरा और बादल और मेवाड़ की सशस्त्र सेना बाहर निकली और खिलजी के चगुल से रतनसिंह को आजाद करवा लिया इस मुठभेड़ में गोरा मेवाड़ी महानायक शहीद हो गया और बादल खिलजी के अस्तबल से घोड़े निकालकर चितोड़ की तरफ चल पड़े|

  • चित्तौड़ पर खिलजी का आक्रमण (Khilji Attack On Chittorgarh)

    जब खिलजी को मिले इस धोके का पता चला कि रतनसिंह भी हाथ से निकल गये और पद्मिनी का सपना भी धरा भी रह गया तो उसे बहुत गुस्सा आया और चित्तौड़ पर आक्रमण करने की ठान ली. खिलजी की सेना चित्तौड़ आ पहुची मगर चित्तौड़ के किले में प्रवेश करना उसके लिए असम्भव था.

    इस वजह खिलजी की सेना ने चित्तौड़ के किले की घेराबंदी कर दी और खाद्य और जल आपूर्ति को बाधित कर दिया ! खाद्य आपूर्ति की कमी पड़ने के कारण रतनसिंह ने दुर्ग के द्वार खोलने का आदेश दे दिया और दोनों सेनाये मैदान में भीड़ पड़ी इस युद्ध में मेवाड़ी सेना के सारे सिपाही मारे गये और अब खिलजी ने आदेश दिया दुर्ग के भीतर की राजपूत महिलाओ को बंदी बनाया जाये

  • रानी पद्मावती का जौहर (Rani padmavati ka johar)

    राजपूत सेना के हारने की खबर पाकर रानी पद्मावती ने चित्तौड़ दुर्ग के अन्दर एक बड़ी चिता जलाने को कहा गया और जैसे ही खिलजी की सेना महिलाओ को बंदी बनाने के लिए दुर्ग के भीतर प्रवेश करने लगी | राजपूती महिलाओ ने अपनी आबरू की खातिर उस जलती अग्निकुंड में सभी महिलाओ के साथ कूद पड़ी और देखते ही देखते सभी ने जोहर कर दिया मेवाड़ के इस जोहर को आज भी लोकगीतों ,में याद किया जाता हैं

रानी पद्मावती के सम्बंध में एक दोहा देखिये.

 सोते मन में स्मृति सुन्दरी ,लहर लहर लहरे |
चित्र खीचती चपला क्षितिज पर, कोई न ठहरे ||
जौहर की जीत लिए दिल में ,तेज तेगा वेग बढे |
पद्मिनी की सुन्दरता में खलजी की खिल्ली उड़े ||

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