Rashtrabhasha Hindi Essay In Hindi | राष्ट्र भाषा हिंदी पर निबंध

Rashtrabhasha Hindi Essay In Hindi:- किसी राष्ट्र की सर्वाधिक प्रचलित एवं स्वेच्छा से आत्मसात की गई भाषा को राष्ट्र भाषा- Rashtrabhasha कहा जाता हैं. हिंदी, बांग्ला, उर्दू, पंजाबी, तेलगू, तमिल, कन्नड़, मलयालम, उड़िया इत्यादि भी भारत के संविधान द्वारा मान्य राष्ट्र की भाषाएँ हैं. इन सभी भाषाओं में Hindi का स्थान सर्वोपरी हैं क्योंकि यह भारत की राजभाषा भी हैं. राजभाषा वह भाषा होती हैं, जिसका प्रयोग किसी देश में राज-काज चलाने के लिए उपयोग किया जाता हैं. Essay On Humari Rashtrabhasha Hindi (राष्ट्र भाषा हिंदी पर निबंध) में आपकों हिंदी दिवस 2018 पर बोलने के आसान भाषा में हिंदी पर निबंध उपलब्ध करवा रहे हैं.Rashtrabhasha Hindi Essay In Hindi | राष्ट्र भाषा हिंदी पर निबंध

वैसे तो हिंदी को संवेधानिक रूप से Rajbhasha का दर्जा दिया गया हैं. किन्तु उन्हें यह सम्मान सैद्धांतिक रूप में प्राप्त हैं. वास्तविक रूप में राज भाषा का सम्मान प्राप्त करने के लिए इसे अंग्रेजी से संघर्ष करना पड़ रहा हैं.

एक विदेशी भाषा होने के बावजूद अंग्रेजी में राज-काज को विशेष महत्व दिए जाने और राजभाषा के रूप में अपने सम्मान को प्राप्त करने के लिए Rashtrabhasha Hindi के संघर्ष का कारण जानने के लिए सबसे पहले हमें हिन्दी की संवैधानिक स्थिति जानना होगा.

संविधान के अनुच्छेद के अनुच्छेद 343 के खंड 1 में कहा गया हैं कि भारत संघ की राज भाषा हिंदी एवं लिपि देवनागरी होगी. संघ के राजकीय प्रयोजन के लिए प्रयुक्त होने वाले अंकों रूप भारतीय अंकों का अंतर्राष्ट्रीय रूप होगा. खंड 2 में यह अनुबंध किया गया था कि संविधान के प्रारम्भ से पन्द्रह वर्ष की अवधि अर्थात् 26 जनवरी 1965 तक संघ के सभी सरकारी प्रयोजनों के लिए अंग्रेजी का प्रयोग होता रहेगा, जैसा कि पूर्व में होता था.

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Hindi Diwas 2018 Rashtrabhasha Hindi Essay In Hindi Language

वर्ष 1965 तक राजकीय प्रयोजनों के लिए अंग्रेजी का प्रयोग किये जाने का प्रयोजन का कारण यह था कि भारत 1947 ईस्वी से पूर्व अंग्रेजों के अधीन था. और तत्कालीन ब्रिटिश शासन में यहाँ इसी भाषा का प्रयोग राजकीय प्रयोजन के लिए होता था. स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद अचानक हिंदी का प्रयोग राजकीय प्रयोजनों के लिए कर पाना व्यवहारिक रूप से संभव नही था.

इसलिए 1950 में संविधान लागू होने के बाद से अंग्रेजी के प्रयोग के लिए 15 वर्षों का समय दिया गया और यह तय किया गया कि इन पन्द्रह वर्षों में हिंदी का विकास कर इसे राजकीय प्रयोजनों के लिए उपयुक्त कर दिया जाएगा.

किन्तु ये 15 पन्द्रह वर्ष पूरे होने से पूर्व ही हिंदी को राजभाषा बनाए जाने का दक्षिण भारत के कुछ स्वार्थी राजनीतिज्ञों ने व्यापक विरोध करना प्रारम्भ कर दिया. देश की सर्वमान्य भाषा हिंदी को क्षेत्रीय लाभ उठाने के ध्येय से विवादों में घसीट लेने को किसी भी दृष्टि से उचित नही कहा जा सकता हैं.

भारत में अनेक भाषा भाषी लोग रहते हैं. भाषाओं की बहुलता का अनुमान इसी से लगाया जा सकता हैं कि भारत के संविधान में ही 22 भाषाओं को मान्यता प्राप्त हैं. हिंदी भारत की सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा हैं. इसके बाद बांग्ला सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा हैं.

इसी तरह तमिल, तेलगू, कन्नड़, मलयालम, मराठी इत्यादि अन्य भाषाएँ बोलने वालों की संख्या भी काफी हैं. भाषाओं की बहुलता के कारण भाषाई वर्चस्व की राजनीती ने भाषावाद का रूप धारण कर लिया हैं. इसी भाषावाद की लड़ाई को  Rashtrabhasha Hindi को नुकसान उठाना पड़ रहा हैं. और स्वार्थी राजनीतिज्ञ इसको इसका वास्तविक सम्मान दिए जाने का विरोध करते रहे हैं.

Hindi भारत की Rashtrabhasha क्यों होनी चाहिए ?

देश की अन्य भाषाओं के बदले हिंदी को राजभाषा बनाए जाने का मुख्य कारण यह हैं कि यह भारत में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा होने के साथ साथ देश की एकमात्र सम्पर्क भाषा भी हैं. ब्रिटिश काल में पूरे देश में राजकीय प्रयोजनों के लिए अंग्रेजी का प्रयोग होता था.

पूरे देश में अलग अलग क्षेत्रों में अलग अलग भाषाएँ बोली जाती हैं. किन्तु स्वतंत्रता आन्दोलन के समय राजनेताओं ने यह महसूस किया कि हिंदी एक ऐसी भारतीय भाषा हैं, जो दक्षिण के कुछ क्षेत्रों को छोड़कर पूरे देश की सम्पर्क भाषा हैं. और देश के विभिन्न भाषा-भाषी भी आपस में विचार विनिमय करने के लिए हिंदी का सहारा लेते हैं.

हिंदी की सार्वभौमिकता के कारण राजनेताओं ने हिंदी को राजभाषा बनाने का निर्णय लिया था. हिंदी राष्ट्र के बहुसंख्यक लोगों द्वारा बोली और समझी जाती हैं. इसकी लिपि देवनागरी हैं, जो अत्यंत सरल हैं. और इसमें आवश्यकतानुसार देशी विदेशी भाषाओं के शब्दों को सरलता से आत्मसात करने की शक्ति हैं. यह भारत की एक ऐसी राष्ट्रभाषा हैं, जिसे पूरे देश में भावात्मक एकता स्थापित करने की पूर्ण क्षमता हैं.

Rashtrabhasha Hindi Speech Essay or Article In Hindi

आजकल पूरे भारत में सामान्य बोल चाल की भाषा के रूप में हिंदी एवं अंग्रेजी के मिश्रित रूप हिंगलिश का प्रयोग बढ़ा हैं. हिंगलिश के प्रयोग के कई कारण हैं. पिछले कुछ वर्षों में भर में व्यवसायिक शिक्षा में प्रगति आई हैं.

अधिकतर व्यवसायिक पाठ्यक्रम अंग्रेजी भाषा में उपलब्ध हैं. इसलिए छात्रों के अध्ययन का माध्यम अंग्रेजी ही हैं. इस कारण छात्र हिंदी से पूर्ण रूप में निपुण नही हो पाते हैं. और हिंदी भारत में आम जन की भाषा हैं.

इसलिए अंग्रेजी में शिक्षा प्राप्त युवा हिंदी में बात करते वक्त अंग्रेजी के शब्दों का प्रयोग करने के लिए बाध्य होते हैं. इसके अतिरिक्त आजकल समाचार पत्रों एवं टेलीविजन के कार्यक्रमों में भी ऐसी ही भाषा के उदाहरण मिलते हैं.

इन सबका प्रभाव आम आदमी पर पड़ता हैं. भले ही हिंगलिश के बहाने हिंदी बोलने वालों की संख्या बढ़ रही हैं. हिंगलिश का प्रचलन हिंदी भाषा की गरिमा की दृष्टिकोण से गंभीर चिंता का विषय हैं. कुछ वैज्ञानिक शब्दों जैसे मोबाइल, कंप्यूटर, साईकिल, टेलीविजन एवं अन्य शब्दों जैसे स्कूल कॉलेज स्टेशन इत्यादि तक तो ठीक हैं.

किन्तु अंग्रेजी के अत्यधिक एवं अनावश्यक शब्दों का हिंदी में प्रयोग सही नही हैं. हिंदी व्याकरण के दृष्टिकोण से एक सम्रद्ध भाषा हैं. यदि इसके पास शब्दों का अभाव होता, तब तो इसकी स्वीकृति दी जा सकती थी. शब्दों का भंडार होते हुए भी व्यक्ति यदि इस तरह की मिश्रित भाषा का प्रयोग करते हैं, तो निश्चय ही भाषाई गरिमा के दृष्टिकोण से यह एक बुरी बात हैं.

कोई भी भाषा अपने यहाँ की संस्कृति की संरक्षक एवं वाहक होती हैं. भाषा की गरिमा नष्ट होने से उस स्थान की सभ्यता संस्कृति पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता हैं.

हिंदी दिवस भाषण 2018

हिंदी को राष्ट्र भाषा बनाए जाने के सन्दर्भ में गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर ने कहा था ”भारत की सारी प्रांतीय बोलियाँ जिनमें सुंदर साहित्य की रचना हुई हैं, अपने घर या प्रान्त की रानी बनकर रहे, प्रान्त के जनगण के हार्दिक चिन्तन की प्रकाशभूमि स्वरूप कविता की भाषा होकर रहे और आधुनिक भाषाओं के हार की मध्यमणि हिंदी भारत भारती होकर विराजती रहे”

प्रत्येक देश की पहचान का एक मजबूत आधार उसकी भाषा होती हैं. और राष्ट्रभाषा की संज्ञा से अभिहित यह देश के अधिक से अधिक व्यक्तियों के द्वारा बोली जाने वाली व्यापक विचार विनिमय का माध्यम होने के कारण ही राष्ट्र भाषा का पद ग्रहण करती हैं. राष्ट्र भाषा के द्वारा आपस में सम्पर्क बनाए रखकर देश की एकता एवं अखंडता को बनाए रखने के लिए ऐसा किया जाना भी अनिवार्य हैं.

हिंदी देश की सम्पर्क भाषा तो है ही इसे राजभाषा का वास्तविक सम्मान भी दिया जाना चाहिए. जिससे कि यह पूरे देश को एकता के सूत्र में बाँधने वाली भाषा बन सके.

(राष्ट्रभाषा हिंदी एस्से इन हिंदी लैंग्वेज)

आशा करता हूँ आपको यहाँ Rashtrabhasha Hindi पर Essay का यह लेख पसंद आया होगा. सभी हिंदी भाषियों को Hindi Diwas 2018 की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई देते हैं. आप इस निबंध का प्रयोग हिंदी डे स्पीच के रूप में उपयोग कर सकते हैं.

Hindi Bhasha के राष्ट्र भाषा अथवा राजभाषा के महत्व को कभी नकारा नही जा सकता हैं. यह भारत के विकास, राष्ट्र की एकता एवं विश्व ख्याति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं. हम भी एक अच्छे नागरिक बने एवं सदा हमारे निजी जीवन में अपनी मातृभाषा हिंदी को ही वरीयता दे.

यदि आप हिंदी दिवस एवं राष्ट्र भाषा हिंदी एस्से के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो आप निचे दिए गये हमारे सभी लेख को पढ़ सकते हैं.

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