राष्ट्रीय एकता और अखंडता | Rashtriya Ekta In Hindi

Rashtriya Ekta In Hindi: राष्ट्रीय एकता और अखंडता

हमारा देश अलग अलग राज्यों भाषाओं एवं विभिन्न संस्कृतियों का राष्ट्र है भिन्न भिन्न रूप रंग, आचार विचार भाषा और धर्म के लोग इस भारतवर्ष की समूचे विश्व में अपनी एक अनूठी पहचान बनाते है। भाषा, रंग, जाति, सम्प्रदाय आदि अलग होने के होने उपरान्त भी इस देश के लोग एक भारतीय के रूप में अपनी पहचान दिखाते है, सदियों से हमारे देश की यही एकता हमारी मजबूती एवं पहचान रही है.

राष्ट्रीय एकता और अखंडता पर निबंध

राष्ट्रीय एकता और अखंडता का अर्थ (Meaning of National Integration and Integrity)

राष्ट्रीय एकता का अर्थ भारतीय के रूप में हमारी पहचान, सभी धर्मो, परम्पराओं, आचार-विचारों, भाषाओं और उपसंस्कृतियों का सम्मान हर भारतीय के दिल में रहता है, इसी विशिष्ट को अपने में समाएं एक नईं संस्कृति का उद्भव होता है, यही हमारे भारत देश की संस्कृति है. अनेकता में एकता, बंधुत्व, साम्प्रदायिकता और मेल जोल कर रहना इस देश की नस नस में बसा है.

सच्चे अर्थों में राष्ट्रीय एकता का अर्थ तन मन धन से अपने राष्ट्र को समर्पित होना है, देश की आंतरिक एवं बाहरी मौर्चे पर देश को विभाजन करने वाली शक्तियों से लड़कर इन्हें मुह्तौड जवाब देना तथा मिल जुलकर रहना ही हमारी राष्ट्रीय एकता और अखंडता है.

 

यदि किसी देश को प्रगति की राह पर आगे बढ़ना है, तो उस देश के नागरिकों में एकता तथा साम्प्रदायिक सद्भाव जैसे मूल्यों को अपनाना होगा, हमारे देश में अतीत काल से इन मूल्यों को उच्च स्थान प्रदान किया गया है. यही हमारे देश की राष्ट्रीय एकता और अखंडता का सबसे बड़ा सबूत है.

राष्ट्रीय एकता और अखंडता पर संकट (The crisis on national unity and integrity)

आज हमारी राष्ट्रीय एकता और अखंडता खतरे में है. इस स्थति के लिए सर्वाधिक दोषी हमारे राजनेता है. जिन्होंने अपने वोटबैंक की खातिर देश की जनता को विभिन्न वर्गों में विभाजित कर दिया है. किसी भी मुद्दे या घटना को एक राजनितिक मोड़ देकर अपनी रोटियां सेकने का कोई अवसर ये नेता नही छोड़ना चाहते है.

इसी का परिणाम है, कि हाल ही वर्षों में घटित कुछ घटनाओं को एक राष्ट्रीय मुद्दे के रूप में बनाकर इसे किसी जाति या सम्प्रदाय का रंग देकर हमारे देश की राष्ट्रीय एकता और अखंडता में छेद करने के हर संभव प्रयास इन नेताओं द्वारा किये जाते रहे है.

प्राचीन भारत में राष्ट्रीय एकता और अखंडता का इतिहास (History of national unity and integrity in ancient India)

देश के हर एक नागरिक के सामने एक बड़ा सवाल है, आखिर धर्म, जाति वर्ग के नाम पर समाज को विभाजित करना कहाँ तक सही है. हम अपने बच्चों को ऐसी परवरिश दे, जो हमारे एवं दूसरों के धर्मं, जाति, भाषा संस्कृति इत्यादि का सम्मान करे. हमारे देश में प्राचीन काल से ही सर्वे सन्तु निरामयाः जैसे श्लोक को चरितार्थ करने वाली यहाँ की शिक्षा पद्दति रही है. हम अपनी क्षेत्रीय संस्कृति को भी बढ़ावा दे, मगर राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता की कीमत पर नही. हमे अपने राष्ट्रीय मूल्यों को उपर रखना होगा.

हमारे देश का प्रतीक तिरंगा, एक बात को सैकड़ो सालों से इंगित कर रहा है. तीनों बड़े सम्प्रदाय (हिन्दू, मुस्लिम, सिख, बौद्ध) के तीन रंग पर बना तिरंगा आज हर भारतीय की शान है. देश के जाबाज इस तिरंगे की आबरू की खातिर हंसते हँसते अपने प्राण न्यौछावर कर देते है. यही हमारे भारत देश की विविधता में एकता और अखंडता है, जो हमे निरंतर बनाए रखने की आवश्यकता है.

राष्ट्रीय एकता दिवस (National Integration Day or Rashtriya Ekta Diwas)

वर्ष 2014 से भारत में प्रतिवर्ष 31 अक्टूबरः के दिन सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जाता है. भारत की गिनती विश्व के सबसे बड़े राष्ट्रों में की जाती है. दुनिया का दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाला देश होने के साथ विविध धर्मों के लोग इतनी संख्या में किसी देश में भाईचारे के साथ रहते है, तो वह मेरा भारत देश ही है.

कश्मीर से कन्याकुमारी तक देश के कोने कोने में 1652 लगभग बोलिया बोली जाती है. यहाँ हिंदू,  बौद्ध, ईसाई,  जैन,  इस्लाम,  सिख और पारसी जैसे धर्मों के अलग अलग धार्मिक रीतिरिवाज, खान पान, बोल चाल, रहन सहन अलग अलग परम्पराओं की भिन्नता होने के बाद भी भारतीय संविधान में सभी का विशवास और आस्था बरकरार है.

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