राष्ट्रीय एकता का महत्व | rashtriya ekta par nibandh

राष्ट्रीय एकता का महत्व | rashtriya ekta par nibandh वर्तमान में कौमी एकता तथा राष्ट्रीय एकता को लेकर काफी विवाद चल रहा है. भारत की ऐतिहासिक प्रष्टभूमि को देखा जाए, तो प्राचीन काल में यहाँ अनेक गणराज्य थे उसमें भौगोलिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक कारणों से पारस्परिक सहयोग एवं एकता की भावना थी. और उस एकता के कारण वे गणराज्य संघ अजेय थे. लेकिन वर्तमान काल में धार्मिक आस्था, भाषावाद, जातिवाद, वर्गवाद, सांस्कृतिक नस्लवाद एवं क्षेत्रवाद आदि का राजनितिक कुचक्र चलने से राष्ट्रीय एकता की जो स्थति है, जो आपके सामने है. यह सारे राष्ट्र के लिए हानिकारक सिद्ध हो रही है.

राष्ट्रीय एकता का महत्व | rashtriya ekta par nibandh

स्वतंत्र भारत में राष्ट्रीय एकता (Independent national unity in India)

स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद हमारे देश में लोकतंत्र की प्रतिष्ठा हुई. शासन व्यवस्था में किसी जाति विशेष या धर्म विशेष को प्रमुखता न देकर सभी देशवासियों को समानता का अधिकार दिया गया. और राजनितिक वैचारिक एवं आर्थिक स्वतंत्रता एवं समानता का प्रतिपादन कर राष्ट्रीय एकता को मजबूत किया गया.

भारत की इस स्थति को देखकर पाकिस्तान आदि कुछ राष्ट्र इससे इर्ष्या रखते है. और वे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप में भारत की एकता को कमजोर करना चाहते है. यह सत्य है कि जब भी भारत पर आक्रमण हुआ है. सभी भारतियों ने राष्ट्रीय एकता का परिचय दिया है. संकटकाल में यहाँ के हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई आदि सभी धर्मावलम्बियों ने क्षेत्रवाद, जातिवाद और धर्मवाद से उपर उठकर राष्ट्रीय भावना का प्रचार किया है.

पाकिस्तान ने जितनी बार आक्रमण किया, उसका भारतीयों ने मुहतोड़ जवाब दिया है. इससे हमारी राष्ट्रीय एकता मजबूत हुई है.

राष्ट्रीय एकता की समस्या (The problem of national unity)

इतना कुछ होने पर भी आज भी हमारे देश में राष्ट्रीय एकता का प्रश्न उतना ही प्रबल बना हुआ है. क्योकि आज भी देश की सीमाओं पर शत्रुओं की छल कपटमयीं कुचालें दिखाई दे रही है. कुछ बड़े राष्ट्रों की खुफियां एजेंसिया आतंकवाद को बढ़ावा दे रही है. और कुछ देश धर्म के नाम पर गुप्त तरीके से धन लगा रहे है. और उसके बल पर भारत की राष्ट्रीय एकता को समाप्त करने की चेष्टा की जा रही है.

कही पर साम्प्रदायिक दंगे करवाए जाते है. तो कही पर जातिगत विद्वेष भड़काया जाता है. कुछ कट्टर धार्मिक द्रष्टिकोण वाले माफिया अपराधी हमारी सरकार एवं आम जनता के साथ छदम युद्ध कर रहे है.कुछ राष्ट्र विरोधी संगठन पूर्वोतर एवं पश्चिमोत्तर भाग में भय का वातावरण बना रहे है. इन सभी कारणों से आज हमारी राष्ट्रीय एकता समस्याग्रस्त बन चुकी है.

वर्तमान में राष्ट्रीय एकता की आवश्यकता (The current requirement of national unity)

प्रायः देखा गया है कि जब भारत पर विदेशी या बाहरी शत्रुओं का आक्रमण हुआ तो सारे देश में एकता की लहरें सी उठ गई थी. चीनी एवं पाकिस्तानी आक्रमणों के अवसर पर जनता ने सोना-चांदी, आभूष्ण, धन आदि कुछ अपने सामर्थ्य के अनुसार राष्ट्रीय सुरक्षा कोष में दान कर दिया था.

लेकिन इसके बाद आंतरिक विभेद, प्रांतवाद, जातिवाद, साम्प्रदायिकता एवं आतंकवाद आदि कारणों से देश की एकता को हानि पहुचाई गई है. परन्तु हमे अभी सावधान रहना चाहिए. लोकतंत्र की स्थिरता, स्वतंत्रता की रक्षा और राष्ट्र के चुहुमुखी विकास के लिए राष्ट्रीय एकता की महती आवश्यकता है.

संक्षेप्त भारत में जब जब राष्ट्रीय एकता की न्यूनता रही, तब तब विदेशी शक्तियों ने यहाँ अपने पैर जमाने की चेष्टा की और हमारी आपसी फूट का उन्होंने पूरा फायदा उठाया. अब स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत में अनेकता में एकता का स्वर गूंजने लगा है, उसकी रक्षा के लिए राष्ट्रीय एकता की महती आवश्यकता है.

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