राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का इतिहास Rashtriya Swayamsevak Sangh RSS Full History in Hindi

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का इतिहास Rashtriya Swayamsevak Sangh RSS Full History in Hindi: दुनिया में छोटे बड़े लाखों संगठन हैं जिनके हम नाम तक नहीं जानते, मगर आरएसएस अर्थात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संगठन से हम सभी का परिचय हैं. इसकी ख्याति न केवल भारत में बल्कि संसार के 40 अन्य देशों में इसकी शाखाएं हैं. आकार के लिहाज से सबसे बड़े राजनैतिक और सामाजिक संगठन आरएसएस क्या हैं इसका संगठन इतिहास, स्थापना, सरसंघचालक, स्वयंसेवक का विस्तार तथा विवादों के बारे में इस आर्टिकल में हम परिचर्चा करेंगे. आरएसएस हिस्ट्री के इस लेख में संगठन की पूरी कहानी को संक्षिप्त तथा सरल रूप में आपके समक्ष रखने का प्रयास किया गया हैं.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का इतिहास Rashtriya Swayamsevak Sangh RSS Full History in Hindi

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का इतिहास Rashtriya Swayamsevak Sangh RSS Full History in Hindi

आरएसएस भारत का एक सबसे बड़ा अर्धसैनिक राष्ट्रवादी सामाजिक और राजनैतिक संगठन हैं. वर्तमान में केंद्र में सत्ता रूढ़ भारतीय जनता पार्टी का यह पैतृक संगठन हैं यानी बीजेपी को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की राजनैतिक इकाई कहे तो गलत नहीं हैं. बीबीसी के दावे के मुताबिक़ एक करोड़ से अधिक सदस्यों वाला यह विश्व का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन हैं. यह भारत के सम्रद्ध इतिहास और सनातन के मूल्यों के संवर्द्धन के लिए सामाजिक उत्थान एवं जागृति का कार्य करता हैं. समाज में जातिगत भेद को मिटाकर हिन्दू एकता के लिए यह कई तरह के कार्यक्रम चलाता हैं साथ ही संघ परिवार के सदस्यों को नित्य व्यायाम और सैनिक प्रशिक्षण के साथ ही समाज सेवा के लिए तैयार करता हैं. अखंड भारत और हिन्दू राष्ट्र को संघ के उद्देश्यों के रूप में देखा जाता हैं. हिंदी तथा संस्कृत संघ की आधिकारिक भाषा हैं. नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे यह उक्ति संघ का ध्येय वाक्य हैं.

आरएसएस का फुल फॉर्म क्या है (RSS FULL FORM)

आरएसएस (RSS) का फुल फॉर्म “Rashtriya Swayamsevak Sangh” है, यह गैर सरकारी संगठन तो हैं मगर अन्य NGO से कुछ अलग हैं. कई सारे संगठन स्वयं को गैर राजनैतिक दायरे मे रखते हैं. जबकि आरएसएस राजनैतिक, सामाजिक और अर्ध सैनिक राष्ट्रवादी संगठन हैं. जो खासकर हिंदुत्व के विचार को आगे बढ़ाने का कार्य करता हैं. भारत के प्रत्येक प्रान्त में इसकी शाखाएं हैं.

आरएसएस का मतलब क्या होता है (RSS MEANING)

आमतौर पर यह माना जाता हैं कि यदि किसी संस्था को नेक उद्देश्य के लिए बनाए जाए तो लोग भी जुड़ते हैं तथा वह लम्बे समय तक अपने महत्व को बनाए रखती हैं. अखंड भारत और हिंदुत्व के एजेंडे को लेकर आरएसएस का जन्म हुआ यह उस समय में पनपी मुस्लिम लीग के प्रत्युत्तर के रूप में खड़ा हुआ संगठन हैं. जो न केवल स्वयं को राजनैतिक और सामाजिक क्षेत्रों तक सिमित करता हैं बल्कि आर्थिक, नागरिक, पर्यावरण, शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यावसायिक प्रशिक्षण, नागरिक मुद्दों, ग्रामीण विकास, गौ रक्षा, सांस्कृतिक और साहित्यिक विकास में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा हैं. अन्य शब्दों में कहा जा सकता हैं कि संघ राष्ट्र हित के प्रत्येक मुद्दे पर आवाज उठाता हैं काम करता है तथा अपने उद्देश्यों को पूरा करता हैं.

स्वयंसेवक संघ की स्थापना Establishment of Swayamsevak Sangh

केशव बलराम हेडगेवार आरएसएस के संस्थापक थे जिन्होंने 27 सितम्बर 1925 विजयादशमी के दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की थी.2025 में संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूरे हो जाएगे इन दस दशकों में संघ दो प्रधानमंत्री दे चूका हैं जिन्होंने लगभग 15 वर्षों तक शासन किया गया हैं. नागपुर में हेडगेवार के अपने घर से 17 संस्थापक सदस्यों (विश्वनाथ केलकर, भाऊ जी कावरे, अण्णा साहने, बालाजी हुद्दार, बापूराव भेदी) के साथ आरम्भ हुआ था.

संघ के संस्थापक केशवराम बलिराम हेडगेवार का जन्म वर्ष 1889 में तथा मृत्यु 1940 में हुई थी. ये प्रोफेशन से डोक्टर थे तथा अंग्रेजों के प्रति उनमें बचपन से ही गहरा आक्रोश था. ये सावरकर के हिंदुत्व से बेहद प्रभावित थे तथा एक ऐसे संगठन की कल्पना को साकार करने का प्रयत्न किया जो हिन्दू समाज को संघठित कर सके. आरएसएस की स्थापना से ही नियमित रूप से सुबह और शाम की शाखाएं लगाई जाने लगी जिसमे प्रार्थना, खेल व व्यायाम की गतिविधियाँ की जाने लगी. धीरे धीरे उनके विचारों से प्रेरित होकर देश के कई शहरों में आरएसएस की शाखाएं खुलने लगी.

लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक,डॉक्टर मुंजे और लोकनायक एम.एस. अने के करीबी रहे हेडगेवार प्रारम्भ में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य थे बाद में हिन्दू महासभा से जुड़े. राष्ट्रीय आंदोलनों में भाग लेने के कारण ब्रिटिश सरकार ने इन्हें कई बार कैद भी किया. डोक्टर केशव के बाद माधव जी संघ के सरसंघचालक बने. संघ का यह सबसे बड़ा पद किन्हें किन्हें मिला इनका विवरण यहाँ दिया गया हैं.

समयनाम
1925 से 1940 तकडॉक्टर केशवराव बलिराम हेडगेवार
1940 से 1973माधवराव सदाशिवराव गोलवरकर
1973 से 1994बाला साहेब देवरस
1994 से 2000प्रोफेसर राजेन्द्र सिंह
2000 से 2009के.एस. सुदर्शन
2009 से वर्तमानडॉक्टर मोहनराव भागवत

आरएसएस के नामकरण का इतिहास History of naming of RSS

संघ का नाम क्या रखा जाए शुरूआती सदस्यों के लिए ये एक बड़ा सवाल था. मात्र हिन्दू समाज को संगठित करने के उद्देश्य से इसके गठन का विचार था. 17 अप्रैल 1926 को हेडगेवार समेत 26 में से 20 सदस्यों के बहुमत से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ नाम रखा गया. दो अन्य नामों जरीपटका मंडल और भारतोद्वारक मंडल पर भी मंथन हुआ, मगर आरएसएस नाम ही रखा गया तथा हेडगेवार को उसी दिन आरएसएस का संघ प्रमुख बनाया गया, नवंबर 1929 में उन्हें सरसंघचालक बनाया गया.

आरएसएस का विस्तार RSS expansion

ऐसा कहा जाता हैं कि संघ में करीब एक करोड़ से अधिक प्रशिक्षित सदस्य हैं. संघ परिवार के तहत 80 से अधिक छोटे बड़े संगठन आते हैं. दुनिया के 40 से अधिक देशों में सक्रिय संघ की 57 हजार दैनिक शाखाएं हैं. 50 लाख से अधिक सदस्य रोज शाखा में आते हैं. देश की प्रत्येक तहसील एवं 60 हजार गाँवों में संघ की नित्य शाखाएं लगती हैं.आरएसएस की बुनियाद शाखा को ही माना जाता हैं जिस पर यह विशालकाय संगठन खड़ा हैं. यहाँ नित्य स्वयंसेवकों का मिलन होता हैं. सुबह तथा शाम को एक एक घंटे आयोजित इस शाखा में खेल, योग, प्रार्थना और सांस्कृतिक पहलुओं पर चर्चा परिचर्चा होती हैं. सरसंघचालक का मनोनयन होता हैं तथा प्रत्येक सरसंघचालक अपने उत्तराधिकारी की घोषणा करते हैं. वर्तमान में आरएसएस के सरसंघचालक श्री मोहन भागवत जी हैं. जो संघ की शाखा में स्वेच्छा से आता हैं उन्हें ही स्वयंसेवक कहा जाता हैं.

आरएसएस पर प्रतिबंध RSS ban

समय समय पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को आलोचना और विवादों में डालने के प्रयास चलते रहे. पहली बार जब 1948 में नाथू राम गोडसे ने महात्मा गांधी की हत्या कर दी तो पंडित नेहरु ने इसके लिए आरएसएस को जिम्मेदार ठहराया और प्रतिबन्ध लगा दिया था. जांच समिति की रिपोर्ट आने पर संघ को आरोप मुक्त कर प्रतिबन्ध वापिस लिए गये. आलोचक हमेशा से संघ को दक्षिणपंथी फासीवादी कट्टर हिन्दू संगठन के रूप में इसकी आलोचना करती हैं. जबकि आरएसएस राजनीतिक तुष्टीकरण के खिलाफ हिन्दुओं के हितों को उठाता हैं. शाहबानों, हज सब्सिडी और बाबरी मस्जिद पर सदा से आरएसएस ने अपना विरोध दर्ज कराया हैं.

संघ भारत के ध्वज को तिरंगे के स्थान पर भगवा ध्वज अपनाने का पक्षधर रहा हैं. सम्भवतः यही कारण रहा होगा कि संRashtriya Swayamsevak Sanghघ के मुख्यालय पर तिरंगा नहीं फहराया जाता हैं. संघ पर कुल तीन बार भारत में प्रतिबंध लगाया गया था. दूसरी बार 1975 में गांधी ने आपातकाल के समय तथा तीसरी बार 1992 में बाबरी मस्जिद ध्वंस के समय प्रतिबंध लगाया गया था.

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उम्मीद करता हूँ दोस्तों राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का इतिहास Rashtriya Swayamsevak Sangh RSS Full History in Hindi का यह लेख आपकों पसंद आया होगा. आरएसएस फुल स्टोरी हिस्ट्री में दी गई जानकारी अच्छी लगी हो तो अपने दोस्तों के साथ जरुर शेयर करें

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