Reality Shows Essay In Hindi | रियलिटी शो पर निबंध

Reality Shows Essay In Hindi रियलिटी शो टेलीविजन पर प्रसारित होने वाले ऐसे कार्यक्रम हैं, जिनमे सामान्यत किसी सम्मान या पुरूस्कार प्राप्त करने के उद्देश्य से इसमे भाग लेने वाले प्रतिभागी अपना कला और योग्यता का प्रदर्शन करते हैं. टेलीविजन के धारावाहिकों में भी ऐसे कलाकार अपना हुनर दिखाते हैं. दोनों में मुख्य रूप से फर्क यह हैं कि जहाँ एक धारावाहिक कार्यक्रम किसी निर्धारित कहानी पर आधारित होता हैं. वही दूसरी तरफ रियलिटी शो किसी पटकथा पर आधारित न होकर किसी नियमावली अथवा शर्त पर आधारित होते हैं.reality shows essay में हम इसके बारे में विस्तार से जानेगे.

रियलिटी शो पर निबंध

(Reality Shows Essay In Hindi)

धारावाहिक कार्यक्रमों में शूटिंग निर्देशक के आदेश के अनुसार उस कहानी के अनुसार ही होती हैं. इसमे अनुभवी कलाकार मुख्य रूप से भूमिका निर्वहन करते हैं. दूसरी तरफ रियलिटी शो की शूटिंग टर्म और कन्डीशन के अनुरूप ही होती हैं. इसमे कोई भी साधारण कलाकार या वक्ता हिस्सा ले सकता हैं.

धारावहिक की शूटिंग के समय यदि कोई कलाकार कहानी के अनुरूप परफॉर्म नही कर पाता हैं. या सीन का शॉट ठीक से नही लिया गया हो तो विकल्प के तौर पर उस सीन को कैंसिल कर दिया जाता हैं. वही रियलिटी शो में ऐसा नही होता हैं. बिना किसी पठकथा के कलाकार को अपना हुनर दिखाना होता हैं. इस दौरान यदि वह किसी तरह की कोई गलती कर देता हैं. या ठीक से शॉट नही आता हैं तो उन्हें कट नही किया जा सकता, बल्कि मजबूरन उन्हें यह स्वीकार कर दिखाना होता हैं.

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यदि किसी डांसिंग या सिंगिंग रियलिटी शो में कोई कलाकार गाना या नृत्य करता हैं. परफॉर्म के बिच में वो अपने विषय से भटक जाता हैं. अथवा आगे नही परफॉर्म कर पाता हैं, तो उन्हें दुबारा गाने या डांस करने के लिए नही कहा जाता हैं. इस प्रकार के टीवी शो को रियलिटी शो कहा जाता हैं.

2017 में भारत के पोपुलर टीवी रियलिटी शो की बात करे तो इसमे गाने के टॉप 10 शो ये हैं. Jo Jeeta Wahi Superstar, Airtel Super Singer Junior,Music Ka Maha Muqqabla,The Voice of India,Amul Star Voice of India,India’s Raw Star,India’s Got Talent,Sa Re Ga Ma Pa Li’l Champs,Indian Idol,Sa Re Ga Ma Pa. जबकि अन्य श्रेणी के रियलिटी शो की बात करे तो इसमे अभिताब बच्चन का कौन बनेगा करोड़पति,  सलमान खान का बिग बॉस, सोनी टीवी का दी कपिल शर्मा शो, लोफ्टर चैलेन्ज, कोमेडी सर्कस आदि भारत में प्रसारित होने वाले मुख्य रियलिटी शो के नाम हैं.

भारत में रियलिटी शो की शुरुआत

1960 के दशक में टेलीविजन की शुरुआत का एक उद्देश्य लोगो का मनोरजन करना भी था. इसी क्रम में फिल्मो का निर्माण किया जाने लगा. कई टीवी चैनल्स ने पटकथा आधारित छोटे धारावहिक कार्यक्रमों की शुरुआत की. धीरे-धीरे लोग लगातार एक ही तरह के कार्यक्रम देख-देखकर उब से गये. इसी दिशा में 1970 के दशक में यूरोपीय देशों में रियलिटी शो की शुरुआत हुई थी.

उस समय फिल्म, संगीत और नृत्य के सिकंदरो ने लाइव शो टेलीकास्ट करने का प्रयोग किया, जो काफी हद तक सफल रहा. इनके भारत में आते आते काफी समय लग गया. भारत का पहला टीवी रियलिटी शो सन 2000 में अभिताब बच्चन द्वारा शुरू किया गया कौन बनेगा करोड़पति था. इसके बाद कालांतर में कई नये विशेष और सोच को लेकर शो आए जो आज बेहद लोकप्रिय भी हैं.

रियलिटी शो के लाभ-हानि

एक शो सभी श्रेणी के दर्शक वर्ग के लिए लाभदायक हो यह कोई जरुरी नही हैं. मगर बेशक अधिकतर रियलिटी शो से बहुत से प्रतिभावान कलाकार और कला के पारखी लोगो के लिए मार्गदर्शक और ज्ञानवान भी होते हैं. उदाहरन के लिए नन्हे बालको में प्रतिभा तराश रहे लिटिल चैम्प्स और इन्डियन आइडल जैसे लोकप्रिय रियलिटी शो में प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को प्रसिद्धि तो मिलती ही हैं, साथ ही कई नन्ही प्रतिभाओं के प्रेरक भी बन जाते हैं.

इस प्रकार के मंचो का उपयोग कर कोई भी प्रतियोगी बड़ा कलाकार बन सकता हैं.रातोरात उन्हें जानने वालों की संख्या लाखों करोड़ो तक चली जाती हैं. दूसरी तरफ सबसे प्रसिद्ध रियलिटी शो कौन बनेगा करोड़पति में शामिल प्रत्याशी न सिर्फ टीवी पर आने का सपना पूरा होता हैं, बल्कि बहुत सारा धन भी कमाने में कामयाब हो जाता हैं.

दूसरी तरफ यदि हम आलोचनात्मक द्रष्टि से रियलिटी शो को देखे तो इन फायदों के पीछे कई नुक्सान भी छुपे होते हैं. रातोरात अमीर बनने और लोकप्रियता हासिल करने के लिए लोग किसी हद तक गुजर जाते हैं. आजकल कई ऐसे रियलिटी शो हैं, जिनमे अश्लीलता सर चढ़कर बोलती हैं, इसके पीछे निर्माताओं का यह कहना रहना रहता हैं, कि जैसा दर्शक देखना चाहते हैं. हमे वैसा ही दिखाना पड़ता हैं. मगर इसका सबसे बड़ा नुक्सान दर्शक वर्ग को ही होता हैं.

दूसरी तरफ सनसनीखेज खबरों और समाचारों के जरिये भी कुछ चैनल अपना दर्शक वर्ग बढ़ा रहे हैं. इस प्रकार के नए परीक्षणों का सबसे बड़ा नुक्सान यह है कि अब अधिकतर कार्यक्रम पुरे परिवार के साथ देखे जाने के लायक नही रह गये हैं. दूसरी तरफ इसका सबसे बुरा असर बच्चो पर पड़ता हैं, बड़े होकर वो इस प्रकार की चीजो का अनुकरण करना शुरू कर देते हैं. समाज में जिसका गलत संदेश जाता हैं.

आज के

 (paragraph on reality show in hindi )

वर्तमान में भारत में चल रहे टीवी चैनल्स के कार्यक्रम अंग्रेजी टीवी कार्यक्रमों की नकल और उनकी कहानी से मिले जुले भी हैं. भारतीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड द्वारा ऐसे कार्यक्रमों को अनुमति से पूर्व विचार करना चाहिए. आखिर ये भारतीय संस्कृति के अनुसार हैं अथवा नही. आज का बिग बॉस जो अंग्रेजी टीवी के हु वांट्स टू बी ऐ मिलेनियर का प्रतिरूप हैं. तथा हमारी सभ्यता और संस्कृति के कतई अनुरूप नही हैं.

यदि हम टेलीविजन प्रसारण के मुख्य उद्देश्यों पर नजर डाले तो इसमे मनोरंजन के साथ-साथ शिक्षा तथा समाज कल्याण के भाव जुड़े होते हैं. मगर इस तरह के रियेलिटी शो से किसी तरह का उद्देश्य पूर्ण होता दिखाई नही दे रहा हैं. पिछले कुछ वर्षो में हमारी संसद द्वारा इस सम्बन्ध में नियम बनाकर इस प्रकार के कार्यक्रमों की सूची बनाई गई, जो परिवार के सभी सदस्य एक साथ बैठकर नही देख सकते. इस प्रकार के शो का प्रसारण समय रात 11 बजे से सुबह 5 बजे के मध्य रखने का निर्णय किया गया.

वैसे तो प्रत्येक कार्यक्रम के अच्छे और बुरे पक्ष को लेकर अदालत में बहस नही हो सकती. बजाय इसके सेसरशिप को इस प्रकार के कदम उठाने चाहिए. जिनमे वो कार्यक्रम निर्माताओं कों निर्देश देने का कार्य किया जा सकता हैं.

सार

इसमे कोई दो राय नही कि टीवी एक व्यवसाय था, और आगे भी रहेगा. लेकिन पैसे कमाने की हौड में नैतिकता और आदर्शो को भूल जाना गलत हैं. हमेशा ऐसी चीजों का नकारात्मक प्रभाव ही पड़ता हैं. इसलिए भारत के सुचना एवं प्रसारण मंत्रालय को चाहिए कि वो इस प्रकार के कार्यक्रमों को प्रसारित करने की अनुमति देवे, जिन्हें सभी सदस्य एक साथ बैठकर देख सके.

टीवी चैनल्स और कार्यक्रम निर्माताओ को भी चाहिए. कि सविधान द्वारा प्रदत अभिव्यक्ति के अधिकार का समुचित उपयोग किया जाए. जिससे किसी दुसरे पर नकारात्मक प्रभाव नही पड़े. दूसरी तरफ केवल सरकार और नियम सब कुछ नही कर सकते. दर्शक वर्ग को जागरूक रहकर. उन्हें अपने विवेक से यह निर्णय करना होगा. आखिर उन्हें क्या देखना चाहिए, बेकार व् अश्लीलता वाले कार्यक्रमों को यदि दर्शकों ने इग्नोर कर दिया तो यक़ीनन इस तरह के कार्यक्रम बनने बंद हो सकते हैं.

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