संयुक्त परिवार में परिवर्तन के कारण – Reasons For Change In Joint Family In Hindi

संयुक्त परिवार में परिवर्तन के कारण – Reasons For Change In Joint Family In Hindi: भारत की संयुक्त परिवार प्रणाली में बदलते समय के साथ होने वाले परिवर्तनों पर लेख निबंध के बारे में यहाँ जानकारी दी गई हैं.

Reasons For Change In Joint Family In Hindi

Reasons For Change In Joint Family In Hindi

भारतीय संयुक्त परिवार में होने वाले परिवर्तनों की व्याख्या कीजिए, भारतीय समाज में संयुक्त परिवारों में होने वाले परिवर्तनों का उल्लेख कीजिए. संयुक्त परिवार का बदलता स्वरूप निरन्तरता एवं परिवर्तन पर एक निबंध लिखिए.

Discuss the changes Of Indian Joint Family, Describe The Changes Occurred in Joint Family In Indian Society Write An Essay On Changing Pattern Of Joint Family Continuity And Change.

भारतीय संयुक्त परिवार में होने वाले परिवर्तन

संयुक्त परिवार में संरचना सम्बन्धी परिवर्तनों का विवेचन अग्रलिखित बिन्दुओं के अंतर्गत किया गया हैं.

आकार में परिवर्तन- संयुक्त परिवार में तीन या अधिक पीढियों के कई सदस्य साथ साथ रहने से इनका आकार बड़ा होता था, किन्तु अब शिक्षा के प्रसार परिवार नियोजन एवं जीवन स्तर ऊँचा उठाने की इच्छा आदि के कारण छोटे छोटे परिवार बनने लगे हैं जिनमें पति पत्नी और अविवाहित बच्चे होते हैं.

मुखिया की सत्ता का हास होना– पहले परिवार में मुखिया सर्वेसर्वा माना जाता था. उसके निर्णय को स्वीकार करना प्रत्येक सदस्य का कर्तव्य माना जाता था. परन्तु वर्तमान में संयुक्त परिवारों में मुखिया की सत्ता का हास हुआ हैं क्योंकि परिवार के शिक्षित सदस्य विवाह के शिक्षित सदस्य विवाह एवं व्यक्तिगत मामलों में स्वयं ही निर्णय लगे हैं.

विवाह के स्वरूप में परिवर्तन होना– विवाह साथी चुनने में पहले माता पिता एवं रिश्तेदारों का महत्वपूर्ण हाथ होता था, किन्तु अब लड़के एवं लड़की स्वयं ही जीवन साथी का चुनाव करने लगे हैं. अब विवाह दो परिवारों के स्थान पर दो व्यक्तियों का व्यक्तिगत मामला बन गया हैं. बाल विवाह की समाप्ति, विधवा पुनर्विवाह, प्रेम विवाह एवं विलम्ब विवाह के कारण परिवार का स्वरूप परिवर्तित हुआ हैं.

अस्थायित्व की प्रकृति-वर्तमान समय में परिवारों में गतिशीलता एवं अस्थायित्व में वृद्धि हुई हैं. नौकरी एवं व्यवसाय के कारण लोग स्थान परिवर्तन करने लगे हैं. इससे परिवार, पड़ोस तथा नातेदारी का नियंत्रण शिथिल हुआ है तथा विवाह विच्छेद को बढ़ावा मिला हैं, यौन सम्बन्धी नवीन धारणाओं ने भी संयुक्त परिवार के महत्व को कम किया हैं.

पारिवारिक सम्बन्धों में परिवर्तन– संयुक्त परिवार में सदस्यों के पारस्परिक सम्बन्धों में शिथिलता आई हैं. घनिष्ठता एवं आत्मीय सम्बन्धों के स्थान पर वर्तमान में औपचारिक सम्बन्धों का महत्व बढ़ रहा हैं पारिवारिक नियंत्रण कमजोर हुआ हैं. अब संयुक्त परिवार एक औपचारिक संगठन मात्र होता जा रहा हैं.

सामूहिकता के तत्वों कमी– परम्परागत संयुक्त परिवार की एकता बनाये रखने के लिए सामूहिक निवास, सामूहिक सम्पति, पूजा एवं सामूहिक जीवन, सामूहिक भोजन ने महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं किन्तु वर्तमान में परिवार के सदस्यों द्वारा अलग अलग स्थानों पर रहने के कारण सामूहिक पूजा एवं रसोईघर सम्भव नहीं है और सम्पति का विभाजन होने लगा हैं. इसके फलस्वरूप परिवार सामूहिकता समाप्त हुई है एवं एकाकी प्रवृति प्रबल हुई हैं.

स्त्रियों की शक्ति में वृद्धि– पहले संयुक्त परिवारों में स्त्रियों का स्थान घर का चारदीवारी ही था. परन्तु वर्तमान में स्त्री शिक्षा के प्रसार के कारण स्त्रियाँ घर की चारदीवारी से बाहर निकलकर विभिन्न स्थानों पर नौकरियां करने लगी हैं. जिससे वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो गई हैं. नवीन विधानों के अंतर्गत आजकल स्त्रियों को पुरुषों के समान ही सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक अधिकार दिए हैं. जिससे पुरुषों की सत्ता में कमी आई हैं. इससे संयुक्त परिवारों की स्त्रियों की स्थिति में भी परिवर्तन आया हैं.

संयुक्त परिवार के कार्यों में परिवर्तन

वर्तमान समय में संयुक्त परिवार के कार्यों में भी परिवर्तन आए हैं जिन्हें निम्न शीर्षकों के अंतर्गत स्पष्ट किया जा रहा हैं..

शिक्षा एवं सांस्कृतिक कार्यों में परिवर्तन– पहले संयुक्त परिवार ही अपने सदस्यों को शिक्षा प्रदान करने, उनका समाजीकरण करने एवं उन्हें प्रथाओं, परम्पराओं, रीति रिवाजों, धर्म एवं संस्कृति से परिचित कराने का कार्य करता था, किन्तु अब यह कार्य शिक्षण संस्थाओं एवं सांस्कृतिक संस्थाओं द्वारा किया जाने लगा हैं.

धार्मिक कार्यों में परिवर्तन- पहले संयुक्त परिवार सदस्यों के धार्मिक कार्यों की पूर्ति करता था. वह यज्ञ हवन पूजन, उपासना, व्रत एवं त्योहार तथा धार्मिक उत्सवो के द्वारा धार्मिक आवश्यकताओं को पूर्ण करता ता, किन्तु धर्म का महत्व घटने से परिवार के धार्मिक कार्यों में भी आई हैं. न तो लोगों के पास पूजा अर्चना हवन आदि को करने के समय हैं न ही उनकी श्रद्धा. त्योहारों पर भी अब औपचारिक ता नजर आती हैं नई पीढ़ी महत्वहीन मानती हैं.

आर्थिक कार्यों में परिवर्तन- पहले संयुक्त परिवार उत्पादन एवं उपभोग की इकाई था, जिसमें परिवार के प्रत्येक सदस्य को योग्यतानु सार ही कार्य का विभाजन किया जाता था. लेकिन अब परिवार उत्पादन की इकाई न रहकर मात्र उपभोग की इकाई तक सीमित रह गया हैं.

मनोरंजन के कार्यों में परिवर्तन- पहले संयुक्त परिवार ही अपने सदस्यों को मनोरंजन प्रदान करता था किन्तु अब सिनेमा, रेडियो, टेलीविजन, क्लब एवं मनोरंजक व्यापारिक संस्थाओं ने यह कार्य अपने हाथ में ले लिया हैं.

परम्परागत संयुक्त परिवार संरचना एवं प्रकार्य दोनों ही दृष्टि से संयुक्त थे, किन्तु वर्तमान में संयुक्त परिवार में दोनों ही दृष्टि से परिवर्तन आये हैं. गोरे तथा देसाई का मत हैं कि वर्तमान में संरचनात्मक दृष्टि से संयुक्त परिवार तो घटे हैं. किन्तु प्रकार्यात्मक दृष्टि से अब भी संयुक्त परिवारों की संख्या कम नहीं हुई. इस प्रकार भारतीय समाज में संयुक्त परिवार परिवर्तनों के साथ निरंतर बने हुए हैं.

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