Rights Of Nominee: बैंक, बीमा या शेयर हर खाते में खाताधारक एक नॉमिनी घोषित करता है, पर क्या वाकई नॉमिनी का उस सम्पति पर उसका अधिकार होता है? बैंक, जीवन बीमा के साथ लगभग सभी निवेश खतों में हम सगे-सम्बधियों को नॉमिनी यानी अपने पैसों का उतराधिकारी बनाते है, ताकि किसी अप्रिय स्थिति में यह पैसा हमारे प्रिय व्यक्तियों की कुछ मदद कर सकें. पर क्या वाकई यह पैसा उन्हें मिल पाता है. इन निवेश खातों मे किसी को उतराधिकारी नामित करने में किन बातों का ख्याल रखें.

Rights Of Nominee जानिये आपके द्वारा घोषित नॉमिनी के अधिकार

सिमित है अधिकार

किसी सम्पति, खाते आदि में उतराधिकारी के तौर पर नामांकित कोई भी व्यक्ति असल में ट्रस्टी या देखभाल करने वाले की तरह ही होता है. कानून के अनुसार खाते में नॉमिनी वाली जगह पर दर्शाया व्यक्ति का उस पैसे पर पहला अधिकार होता है, लेकिन असली मायनों में वह उस पर हक़ नहीं जाता सकता. खाताधारक की वसीयत में शामिल लोग या क़ानूनी रूप से उतराधिकारी व्यक्ति ही असल में सम्पति का सही मालिक होता है. नॉमिनी को व्यक्ति का पैसा तो मिलता है लेकिन वह उस पर दावा नहीं कर सकता.

क्यों जरुरी है वसीयत बनाना?

बैंक खाते आदि में किसी व्यक्ति को उतराधिकारी रखना जितना जरुरी है उतना ही जरुरी वसीयत बनाना भी है. इसे एक उदहारण से समझते है. 50 वर्षीय रविन्द्र की एक दुर्घटना में मौत हो गई. उनके बच्चे नौकरीपेशा थे. इसलिए उन्होंने सारे खतों, म्यूचल फण्ड में अपनी पत्नी को उतराधिकारी के तौर पर रखा था. वे चाहते थे की उनकी मौत के बाद सारा पैसा उनकी पत्नी को मिले. हालाँकि रविन्द्र की मौत के बाद ऐसा नहीं हो सका. चूँकि उन्होंने कोई वसीयत नहीं बनाई थी इसलिए सारी राशि पत्नी और बच्चों में बराबर बंटी.

बीमा खाते में नामांकन

एक खाताधारक एक पालिसी में कई लोगों को उतराधिकारी के तौर पर नामांकित कर सकता है, लेकिन इसमें पहला नाम अपने परिवार वालों का ही रखना चाहिए. तीसरे व्यक्ति जैसे दोस्त आदि को उतराधिकारी बनाने पर बीमा कम्पनी को इस सम्बध में लिखित में सबुत देना पड़ता है. बीमा पत्र में कोई व्यक्ति नामित नहीं होने पर पैसा पाने में मुश्किल हो सकती है.

शेयर्स में नॉमिनी को मिलता है पैसा

डीमेट खाते के मामले में नियम थोड़ा अलग है. अगर वसीयत नहीं बनाई है, तो जिसको भी डीमेट खाते में उतराधिकारी बनाया है उसे ही सारा पैसा मिलेगा. ऐसे में उतराधिकारी अधिनियम के तहत बच्चे और पत्नी भी इस पर दावा नहीं कर सकते है.

बाद में जुड़वा सकते है नाम

बैंक खाता खोलते समय अगर किसी व्यक्ति को नामांकित नहीं किया है, तो बाद में DA-1 फॉर्म भरकर किसी व्यक्ति का नाम जुड़वा सकते है. नॉमिनी का नाम बाद में बदलवाने या हटवाने के लिए DA-2 फॉर्म भर सकते है. बैंक खतों में अगर कोई व्यक्ति उतराधिकारी है, तब भी क़ानूनी रूप से हक़दार व्यक्ति जमा राशी के जायज हकदार होंगे, नहीं तो उतराधिकारी कानून के तहत संबधियों को पैसा मिलेगा.

उम्मीद करता हु इस लेख से आप नॉमिनी के अधिकार जान गए होंगे. अगर आपको Rights Of Nominee लेख पसंद आया हो तो इसे शेयर करे और कमेंट बॉक्स में अपने विचार दे. 

News Reporter

प्रोफेशनल ब्लॉग लेखक hihindi.com के सहसंपादक और सहयोगी। तकनीकी ट्रिक्स नई जानकारी और स्वास्थ्य जैसे विषयों पर लिखते है

Leave a Reply