राजस्थान की प्रमुख नदियाँ | Rivers Of Rajasthan In Hindi

Rivers Of Rajasthan In Hindi राजस्थान की प्रमुख नदियाँ : प्रिय साथियों आपका स्वागत हैं, आज हम Rajasthan Ki Nadiya पढ़ेगे. राज्य में बहने वाली नदियों के में सामान्य ज्ञान होना जरुरी हैं. Rajasthan Rivers में मुख्य नदियों के साथ ही उनके अपवाह तन्त्र को भी समझने का प्रयास करेगे.

राजस्थान की प्रमुख नदियाँ (Rivers Of Rajasthan In Hindi)

राजस्थान की प्रमुख नदियाँ | Rivers Of Rajasthan In Hindi

मुख्य राजस्थान की प्रमुख नदियों के नाम

राजस्थान में वर्ष भर बहने वाली नदी केवल चम्बल है. राज्य में अरावली श्रेणी जल विभाजक का कार्य करती है.राज्य में बहने वाली नदियों की कुल संख्या 16 हैं. ये बड़ी नदियाँ है जो राज्य के अधिकतर भागों में बहती हैं.

चम्बल तथा बनास राज्य में सर्वाधिक बहने वाली लम्बी नदियाँ हैं. राजस्थान की मुख्य नदियों के नाम चम्बल नदी, काली सिंध, बनास नदी, बाण गंगा, पार्वती नदी, गंभीरी नदी, लूनी नदी, माही, घग्घर, काकनी, सोम, जाखम, साबरमती, साबी, काटली, मन्था आदि.

राजस्थान की नदियाँ अपवाह तन्त्र के आधार पर

राजस्थान की प्रमुख नदियों के अपवाह क्रम को तीन भागों में बाँट सकते है.

  1. अरब सागरीय अपवाह क्रम
  2. बंगाल की खाड़ी का अपवाह क्रम
  3. आंतरिक अपवाह क्रम

नदियों के उद्गम स्थान, प्रवाह एवं समाप्ति तक के विभाजन को तीन भागों में बांटा गया है. यहाँ हम तीनों के बारे में सक्षिप्त में जानकारी प्राप्त करेगे.

अरब सागरीय अपवाह क्रम (arabian sea rivers)

इसमें लूनी, माही व साबरमती नदियाँ सम्बन्धित है. लूनी व माही प्रमुख नदियाँ है. लूनी नदी अजमेर के नाग पहाड़ से निकलती है. यह कच्छ की खाड़ी में गिरती है. माही नदी मध्यप्रदेश में अमझोर जिले से निकलती है. यह खम्भात की खाड़ी में गिरती है.

डूंगरपुर व बाँसवाड़ा जिले के मध्य यह नदी सीमा बनाती है. तथा सोम व जाखम नदियों के संगम पर बेणेश्वर मेला भरता है. इस नदी पर बाँसवाड़ा के पास माही बजाज सागर बांध बनाया गया है. इसकी सहायक नदियों में सोम, अम्बा, जाखम आदि है.

बंगाल की खाड़ी का अपवाह क्रम (bay of bengal rivers)

इस क्रम की समस्त नदियाँ यमुना में मिलती है. इसमें प्रमुखतः चम्बल, बनास एवं बाणगंगा नदियाँ सम्मिलित है. चम्बल नदी मध्यप्रदेश के महू के समीप जानापाव पहाडियों (Origin of the river Chambal) से निकलती है. यह चौरासीगढ़ (चित्तौड़) के पास राजस्थान में प्रवेश कर चित्तौड़, कोटा व सवाईमाधोपुर में बहती हुई उत्तर प्रदेश के मुरादगंज के पास यमुना में मिल जाती है.

चम्बल नदी पर गांधी सागर, राणा प्रताप सागर, जवाहर सागर बांध व कोटा बैराज बने हुए है. बनास नदी कुम्भलगढ़ के पास वेरों के मठ से निकलती है. इसे वन की आशा कहते है.

यह सवाईमाधोपुर जिले में रामेश्वर के पास चम्बल में मिल जाती है. इस पर प्रसिद्ध बीसलपुर बाँध बनाया गया है. अन्य नदियाँ बेड़च, गंभीरी, कोठारी, खारी, कालीसिंध, पार्वती आदि है.

आंतरिक अपवाह की नदियाँ (Rivers of internal runoff)

इनमें वे नदियाँ है, जो किसी स्थान से आरम्भ होकर समुद्र तक नही पहुच पाती है. ये कुछ दूर बहने के बाद विलुप्त हो जाती है. सरस्वती, कान्तली, काकनी, घग्घर, साबी, मन्था आदि ऐसी नदियाँ है. मन्था नदी सांभर झील में विलीन हो जाती है.

राजस्थान की प्रमुख नदियों के उद्गम स्थल

राजस्थान की प्रमुख नदियों के उद्गम स्थल

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चम्बल नदी

चम्बल का उद्गम स्थल मध्यप्रदेश में विध्यांचल पर्वत के पास जानापाव से हैं. यह राजस्थान की सबसे लम्बी एवं एकमात्र वर्ष भर बहने वाली नदी हैं. राजस्थान में यह नदी भैसरोड़गढ़ से प्रवेश कर कोटा, बूंदी, सवाईमाधोपुर एवं धौलपुर जिलों में बहने के बाद उत्तरप्रदेश में यमुना नदी में मिल जाती हैं. इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ बनास, बेडच, कोठारी, कालीसिंध, पार्वती आदि हैं. राजस्थान की औद्योगिक नगरी कोटा इस नदी के किनारे स्थित हैं.

बनास नदी

यह चम्बल की एक प्रमुख सहायक नदी हैं. राजसमंद जिले के खमनौर की पहाड़ियों से निकलती हैं. यह राजसमन्द, चित्तौड़, भीलवाड़ा, टोंक जिलों में बहकर सवाई माधोपुर में रामेश्वर के निकट चम्बल नदी में मिल जाती हैं. इसका जल ग्रहण राज्य में सर्वाधिक हैं और पूर्णतः राजस्थान में बहने वाली सबसे लम्बी नदी हैं.

इसकी लम्बाई लगभग 480 किलोमीटर हैं, बनास, बेडच और मेनाल नदियों का संगम स्थल जिसे त्रिवेणी के नाम से जाना जाता हैं. बीगोद भीलवाड़ा के पास स्थित हैं. टोंक व सवाईमाधोपुर बनास नदी के किनारे स्थित हैं. बनास की अन्य सहायक नदियाँ कोठारी, गम्भीरी, खारी, मोरेल आदि हैं.

लूनी नदी

यह राजस्थान की तीसरी सबसे बड़ी नदी हैं. अजमेर जिले में गोविन्दगढ़ के निकट सरस्वती और सागरमती नामक दो धाराओ के मिलने इस लूनी नदी का उद्गम होता हैं. अजमेर नागौर पाली जोधपुर, बाड़मेर, जालोर जिलों में बहने के बाद यह नदी कच्छ की खाड़ी में मिल जाती हैं.

लूनी नदी का जल बाड़मेर के बालोतरा तक मीठा होता हैं. औद्योगिक फैक्ट्रियों के केमिकल नदी में सीधे ही प्रवाहित करने के बाद लूनी का जल खारा व बदबूदार हो जाता हैं. इसकी सहायक नदियों में जोजरी, बाँडी, जवाई, मीठ्दी, खारी, सूकड़ी, सागी गुहिया आदि हैं.

माही नदी

मध्यप्रदेश में विध्यांचल पर्वत में अमरोरू नामक स्थान पर इस नदी का उद्गम स्थल हैं. यह नदी राजस्थान में बाँसवाड़ा एवं प्रतापगढ़ जिलों में बहने के बाद खम्भात की खाड़ी में मिलती हैं. बाँसवाड़ा जिले में इस नदी पर माही बजाज सागर बाँध बनाया गया हैं. इसकी सहायक नदियाँ सोम एवं जाखम हैं.

बाणगंगा नदी

इस नदी का उद्गम जयपुर जिले में स्थित अरावली की बैराठ पहाड़ी से होता हैं. इस नदी का पानी भरतपुर में घना पक्षी राष्ट्रिय उद्यान में भूमिगत होकर नम भूमि का निर्माण करता हैं. इस नदी को अर्जुन की गंगा भी कहा जाता हैं.

घग्घर नदी

इस नदी का उद्गम हिमाचल प्रदेश में हिमालय पर्वत की शिवालिक श्रेणी से होता हैं. उत्तरी राजस्थान में यह नदी हनुमान गढ़ में प्रवेश कर श्रीगंगानगर में भूमिगत हो जाती हैं. इस नदी को प्राचीन सरस्वती नदी की सहायक नदी माना जाता हैं. यह राज्य में आंतरिक प्रवाह प्रणाली की सबसे लम्बी नदी हैं.

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राजस्थान सामान्य ज्ञान के महत्वपूर्ण अध्याय Rivers Of Rajasthan In Hindi में दी गई जानकारी आपकों कैसी लगी को कमेन्ट कर जरुर बताए. river of rajasthan in hindi का लेख पसंद आया हो तो अपने दोस्तों के साथ इसे जरुर शेयर करे.

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