अर्थव्यवस्था में मुद्रा की भूमिका | role of currency in economy in hindi

अर्थव्यवस्था में मुद्रा की भूमिका | role of currency in economy in hindi: अर्थव्यवस्था में मुद्रा की भूमिका अपरिहार्य है. यदि यह कहा जाए कि मुद्रा के बिना अर्थव्यवस्था का अस्तित्व ही नहीं तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी. मुद्रा के सम्बन्ध में प्रत्येक व्यक्ति द्वारा किया जाने वाला यह विश्वास कि इसे अर्थव्यवस्था में अन्य सभी के द्वारा स्वीकार कर लिया जाएगा, मुद्रा की उपयोगिता स्वयं सिद्ध कर देता है.

role of currency in economy in hindiअर्थव्यवस्था में मुद्रा की भूमिका | role of currency in economy in hindi

वस्तुतः अर्थव्यवस्था में मुद्रा वह कोई भी वस्तु हैं जिसे वस्तुओं और सेवाओं के भुगतान की क्रिया हेतु सामान्य स्वीकृति प्राप्त हैं. यह सामान्य स्वीकृति ही अर्थव्यवस्था में मुद्रा की भूमिका को प्रतिष्ठित स्थान प्रदान करती हैं.

अर्थव्यवस्था में मुद्रा के अनेक रूप है जो भुगतान के साधन के रूप में प्रयुक्त होते है. यदपि आम जनता के लिए मुद्रा का सामान्य अर्थ केवल करेंसी बैंक नोट और मुद्रा से है, अर्थव्यवस्था में मुद्रा की भूमिका धीरे धीरे होने वाले विकास तथा अर्थव्यवस्था के सम्बन्ध में अस्तित्व में आई अवधारणाओं के परिणामस्वरूप अपरिहार्य बनी.

वस्तु विनिमय से लेकर वर्तमान की साख मुद्रा तक मुद्रा विनिमय का माध्यम, खाते की इकाई या मूल्य मापक, मुद्रा का भंडार आदि बन गई है. इसके कारण अर्थव्यवस्था तीव्र गति से आगे बढ़ी है. पूंजी को गतिशीलता प्रदान करना मुद्रा का अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य हैं. अर्थव्यवस्था में मुद्रा की भूमिका को और अच्छी तरह समझने के लिए निम्नलिखित बिन्दुओं द्वारा इसे समझते हैं.

अर्थव्यवस्था में मुद्रा की भूमिका | role of currency in economy in hindi

  • लोककल्याणकारी अर्थव्यवस्था का मूल– इसके तहत बचतों को मुद्रा के रूप में वित्तीय संस्थाओं में जमा करवा दिया जाता है. यह बचत बचतकर्ताओं को उस समय मदद पहुचाती है, जब वह संकट में होता है,
  • निवेश योजनाओं का संचालन- मुद्रा के द्वारा निवेश योजनाओं का संचालन किया जाता हैं. वित्तीय संस्थाएं निर्धारित नियमों के अनुसार निवेश योजनाओं में हिस्सा बनती हैं.
  • राज्य के कल्याणकारी स्वरूप को बल प्रदान करना- राज्य या सरकार द्वारा नागरिकों के कल्याण हेतु अनेक प्रकार की योजनाएं संचालित की जा रही है. इन योजनाओं पर सरकार को बहुत अधिक व्यय करना पड़ता है. इसकी पूर्ति मुद्रा के माध्यम से ही संभव हो पाती हैं.
  • मुद्रा का क्षेत्र अत्यंत व्यापक– वर्तमान में मानव का विकास जिस स्तर पर पंहुचा है. वह मुद्रा के आविष्कार से ही संभव हुआ है, मनुष्य के जीवन का ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है जहाँ मुद्रा की कोई भूमिका न हो.

उपर्युक्त विवरण से अर्थव्यवस्था में मुद्रा की भूमिका पूर्णतया स्पष्ट हो जाती हैं.

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