Sagarmal Gopa History In Hindi | सागरमल गोपा का परिचय व इतिहास

Sagarmal Gopa History In Hindi | सागरमल गोपा का परिचय व इतिहास : जैसलमेर के क्रांतिकारी गोपा ने वतन की स्वतंत्रता की खातिर अपनी जान दे दी थी. आजादी के दीवाने व जैसलमेर में गुंडाराज पुस्तकों से अंग्रेजी व सामंती शासन की पोल खोलने वाले गोपा ने सम्पूर्ण पश्चिमी राजस्थान में क्रांति की लहर पैदा कर दी थी. उन्होंने सौगंध खाई थी कि वे कभी अंग्रेजों की दासता स्वीकार नहीं करेगे, जैसलमेर के भारत विलय में उनका बड़ा योगदान था. इन्ही कारणों से वहां का सामन्ती शासक जवाहर सिंह ने बदले की भावना से गोपा के साथ अमानवीय व्यवहार के चलते गोपा को जेल में जिन्दा जला दिया गया था. Sagarmal Gopa History In Hindi

Sagarmal Gopa History In Hindi

सागरमल गोपा का जीवन परिचय: (Biography of Sagarmal Gopa in Hindi): सागरमल गोपा का जन्म 3 नवम्बर 1900 को जैसलमेर में हुआ. 1915 ई में सागरमल गोपा ने अपने मित्रों के साथ मिलकर सर्वहितकारीवाचनालय की स्थापना की. लेकिन राज्य ने इस वाचनालय में देशभक्तिपूर्ण साहित्य को मंगवाने की अनुमति नहीं दी.
फिर भी सागरमल गोपा गुप्त रूप से राष्ट्रीय साहित्य मंगवाकर उसका प्रचार करते रहे. 7 जनवरी 1918 को जैसलमेर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए गोपा ने राज्य में मिडिल स्तर की शिक्षा उपलब्ध करवाने की मांग की. गोपा ने 1920 ई में महारावल से भेंटकर जनता की पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं यातायात की समस्याओं को दूर करने का आग्रह किया.

1920-21 ई में गोपा ने नागपुर में असहयोग आंदोलन में भाग लिया. उसने नागपुर से समाचार पत्रों के माध्यम से जैसलमेर राज्य की स्थिति से पूरे देश को अवगत कराया. दिल्ली से प्रकाशित विजय एवं वर्धा से राजस्थान केसरी के माध्यम से गोपा ने जैसलमेर में राजनीतिक एवं सामाजिक सुधारों की मांग करना शुरू कर दिया.

गोपा ने 1932 ई में रघुनाथसिंह मेहता के साथ मिलकर जैसलमेर में माहेश्वरी नवयुवक मंडल की स्थापना की यह संस्था गुप्त रूप से राष्ट्रीय भावनाओं के प्रचारार्थ राष्ट्रीय साहित्य वितरण एवं राष्ट्रीय भावना जागृत करने का कार्य करती थी. महारावल ने इस संस्था के पुस्तकालय को जब्त कर इसे गैरकानूनी घोषित कर दिया तथा मंडल अध्यक्ष रघुनाथसिंह मेहता को गिरफ्तार कर उन पर मुकदमा चलाया, जिसका लोगों ने प्रबल विरोध किया.

सागरमल गोपा ने नागपुर में जैसलमेर प्रजामंडल की स्थापना की तथा 1936-37 ई में जैसलमेर राज्य प्रजा परिषद की स्थापना की. गोपा अपने भाई शिवशंकर गोपा के साथ मिलकर नागपुर से ही जैसलमेर में जन चेतना जागृत करने एवं राजनीतिक सुधारों की मांग करते रहे.

22 जून 1941 ई को गोपा को गिरफ्तार कर लिया गया. एवं मुकदमा चलाकर साढ़े सात वर्ष की सजा दी गई. जैसलमेर में उन्हें अमानुषिक यातनाएं दी गई. मारवाड़ लोकपरिषद् के कार्यकर्ताओं पं नेहरु एवं जयनारायण व्यास ने उनकी रिहाई के प्रयास किये मगर राज्य ने उन्हें रिहा नहीं किया.

3 अप्रैल 1946 को गोपा को मिट्टी का तेल डालकर जला दिया गया. समुचित चिकित्सा के अभाव में मातृभूमि का यह सच्चा सपूत 4 अप्रैल 1946 को सदा सदा के लिए चिरनिद्रा में सो गया.

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