साहस ही जीवन है पर निबंध | Sahas Hi Jeevan Hai Essay in Hindi

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Sahas Hi Jeevan Hai Essay in Hindi

Sahas Hi Jeevan Hai Essay in Hindi

संघर्ष का दूसरा नाम ही जीवन हैं, जीवन में ऐसे सैकड़ों कार्य है जहाँ हमे कई मुश्किलों और परेशानियों का सामना करना पड़ता हैं. बहुत से लोग जीवन में छोटी छोटी समस्याओं पर झुंझला जाते है और वह राह तक छोड़ जाते हैं. हमें जीवन में साहस के साथ हर समस्या का सामना करना चाहिए, क्योंकि ऐसा कोई कार्य नहीं जिसमें जोखिम और परेशानियाँ न हो इसलिए हार मान लेने की बजाय हमें डटकर उसका सामना करना चाहिए.

साहस वह अद्भुत क्षमता है जो तकदीर और तस्वीर दोनों का स्वरूप बदल देती हैं. साहसी व्यक्ति न केवल अपने जीवन को अच्छे ढंग से जीता है बल्कि अपने दोस्तों के लिए भी मददगार होता हैं. साहस रुपी आंतरिक शक्ति को जितना सींचा जाए वह उतना ही अधिक बढ़ता जाता हैं. हर कोई चाहता है कि जीवन में वह कुछ बड़ा करे जैसा कोई न कर पाए मगर उसके लिए भी पर्याप्त साहस की आवश्यकता होती हैं.

बड़े कार्य के आगाज से पूर्व कई सवाल दिमाग में कोंध्ते हैं क्या मैं यह कर पाउगा, क्या मुझे सफलता मिलेगी या विफलता मिलेगी. यदि आप साहस के साथ सकारात्मक सोच रखते हुए कार्य की शुरुआत करे तो निश्चय ही उस कार्य में न सिर्फ आपकों सफलता मिलेगी बल्कि आपका आत्मविश्वास भी बढ़ेगा जो आपकों हमेशा बड़े रिस्क लेने के लिए प्रेरित करेगा.

जीवन में कुछ करना और पाना हो तो रिस्क उठाना ही पड़ता हैं. चाहे वो जीवन का कोई भी क्षेत्र क्यों न हो. संसार में हमें ऐसे हजारों उदहारण मिल जाएगे जिन्होंने शारीरिक अक्षमता, जीवन की कठिनाइयों और विपरीत परिस्थतियों में भी साहस के साथ कार्य करते हुए दुनिया के समक्ष उदाहरण प्रस्तुत किये.

आज के परिपेक्ष्य में यदि ऐसे किसी साहसी व्यक्ति का जीवन जो हमें प्रेरणा दे सकता है वह है नरेंद्र मोदी, भले ही हम किसी एक विचारधारा को मानने वाले हो मगर मोदी का जीवन और दुनियां के सबसे बड़े लोकतंत्र के दूसरे प्रधान बनने की कहानी कम साहसी नहीं हैं. क्या कोई कल्पना कर सकता था कि रेलवे स्टेशन पर चाय की थड़ी पर काम करने वाला बालक आगे जाकर देश का नेतृत्व करेगा तथा दुनिया उसका लोहा मानेगी.

वैसे तो एक बार कोई भी अनजान इन्सान नरेंद्र मोदी के जीवन की साहस भरी कहानी पर यकीन नहीं करेगा, मगर यदि परत दर परत उनके जीवन और पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री बनने और बाद के गुजरात दंगों से उनके जीवन की विपरीत परिस्थतियों को समझना शुरू करे तो हम जान पाएगे कि उनका जीवन सफलता का पर्याय न होकर कथन परिश्रम और संघर्ष पर साहस की विजय के द्योतक के रूप में उभरकर सामने आता हैं.

स्पेन के रहने वाले कोलंबस ने अपने एशों आराम के जीवन, नौकरी आदि का त्याग कर साहसिक यात्राओं के लिए निकल गये, ऐसे अन्य साहसिक यात्रियों में ह्वेनसांग और फाह्यान ने अपने राज्य को छोड़कर हिमालय व पहाड़ी मार्ग होते हुए भारत आए कई बार जान पर जोखिम आने के बाद भी वे अपने लक्ष्य पर डटे रहे.

१० वीं से १५ वीं सदी के मध्य खोजी यात्राओं के लिए काल के समतुल्य दौर था. एक बार घर से निकल जाने के बाद उनके घर में वापिस लौट जाने की संभावना न के बराबर होती थी. खतरनाक समुद्री यात्राओं, डाकुरों तथा लुटरों के भय से बचना लगभग ना मुमकिन था. यदि वो वापिस घर लौट आते तो वाकई उनके लिए यह नया जन्म माना जाता हैं.  फिर भी लोगों के साहस का अनुमान लगाया जा सकता है जो इस तरह की यात्राओं के लिए निकलते थे.

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