समर्थ गुरु रामदास जी का जीवन परिचय व इतिहास | Samarth Ramdas Biography History In Hindi

समर्थ गुरु रामदास जी का जीवन परिचय व इतिहास | Samarth Ramdas Biography History In Hindi

Samarth Ramdas Biography History In Hindi: नव चेतना के जनक व हनुमान जी के परम भक्त समर्थ रामदास मराठा शासक शिवाजी के गुरु थे. जिन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन सादगी भरे साधु के रूप में व्यतीत किया, मराठी भाषा में इन्होने दासबोध नामक ग्रंथ की रचना की जो बेहद लोकप्रिय भक्ति रचना हैं. गुरु रामदास जी के बचपन का नाम नारायण सूर्याजीपंत कुलकर्णी था, इनका जन्म रामनवमी तिथि को १५३० सन १६०८ में सूर्याजी पन्त के घर ब्राह्मण परिवार में हुआ था.  जो पेशे से पटवारी थे. उनकी माता का नाम राणुबाई था. पूरा परिवार भगवान सूर्यदेव का उपासक था. इनके एक भाई भी थे जिनका नाम गंगाधर था, जिन्होंने सुगमोपाय नामक ग्रथ की रचना की, अच्छे आध्यात्मिक वक्ता होने के कारण समर्थ गुरु रामदास जी के बड़े भाई को लोग श्रेष्ठ कहकर पुकारते थे. रामदास जी का जीवन परिचय व इतिहास में उनके जीवन अभंग तथा धार्मिक कार्यों का ब्यौरा मराठी में दिया गया हैं.

समर्थ गुरु रामदास जी का जीवन परिचय व इतिहाससमर्थ गुरु रामदास जी का जीवन परिचय व इतिहास | Samarth Ramdas Biography History In Hindi

Samarth Ramdas In Hindi

समर्थ गुरु स्वामी रामदास जी का जीवन भक्ति व वैराग्य से ओत प्रेत था. उनके मुख से सदैव राम नाम का जाप चलता रहता था. वे संगीत के उत्तम जानकार थे. ऐसा माना जाता हैं कि स्वामी रामदास प्रति दिन एक हजार दौ सो सूर्य नमस्कार करते थे. इसलिए उनका शरीर अत्यंत बलवान था.

उनका ग्रंथ दासबोध एक गुरु शिष्य के संवाद के रूप में हैं. स्वामी जी अद्वैत वेदान्ति और भक्ति मार्गी संत थे. उन्होंने अपने शिष्यों की सहायता से समाज में एक चेतना दायी संगठन खड़ा किया. कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक 1100 मठ तथा अखाड़े स्थापित कर स्वराज्य की स्थापना के लिए जनता को तैयार किया.

कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक भारत में रामदास जी ने 1100 मठ तथा अखाड़े स्थापित कर स्वराज्य स्थापना के लिए जनता को तैयार किया, ये छत्रपति शिवाजी के गुरु थे. आप भक्ति व शक्ति के प्रतीक हनुमान जी के उपासक थे. इन्होने भारत भर में 600 से अधिक हिन्दू देवी देवताओं के मन्दिरों का निर्माण करवाया. माघ नवमी तिथि को समर्थ गुरु रामदास जी का देहवसान हो गया.

चौदह शतक, जन्स्वभावा, पञ्च समाधी, पुकाश मानस पूजा, जुना राय बोध्ह रामगीत आदि ग्रंथों की रचना के साथ ही इन्होने वाल्मीकि रचित रामायण को भी स्वयं के हाथों से लिखा, जिनकी हस्तलिपि आज भी संग्रहित हैं. इनके बारे में कहा जाता हैं कि इन्होने जल में खड़े होकर “जय जय रघुवीर समर्थ” मंत्र का तेरह लाख बार जाप किया जिससे स्वयं भगवान श्रीराम उनके सामने प्रकट हो गये थे.

राजस्थान में भक्ति आंदोलन | Rajasthan Me bhakti Movement In Hindi... राजस्थान में भक्ति आंदोलन | Rajasth...
संत चोखामेला का इतिहास | History & Biography Of Sant Chokhamela I... संत चोखामेला का इतिहास | History &a...
मीरा बाई पर निबंध | Essay On Meera Bai In Hindi Language... मीरा बाई पर निबंध/ Essay On Meera B...
करत करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान – Practice Makes a Man Perfec... करत करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान ...
महाराजा सूरजमल इतिहास | maharaja surajmal history in hindi... महाराजा सूरजमल इतिहास | maharaja su...
स्वामी रामचरण जी महाराज के बारे में | About Swami Ramcharan Ji Maharaj... स्वामी रामचरण जी महाराज के बारे में...
बाबा रामदेवजी महाराज का जीवन परिचय | baba ramdev runicha history in hi... बाबा रामदेवजी महाराज का जीवन परिचय ...
प्लीज अच्छा लगे तो शेयर करे

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *