संस्कृत दिवस महत्व निबन्ध | World Sanskrit Day

World Sanskrit Day देश की प्राचीन भाषाओं में संस्कृत का मुख्य स्थान हैं. संस्कृत भाषा को सभी आधुनिक भारतीय भाषाओं की जननी माना जाता हैं. इसी से दूसरी अन्य भाषाओं का जन्म माना जाता हैं. भारतीय संस्कृति का आधार कही जाने वाली यह मातृभाषा हमारे सविधान द्वारा सूचीबद्ध 22 राष्ट्रीय भाषाओं में से एक हैं. हमारे अधिकतर धार्मिक ग्रन्थ जिनमे वेद पुराण और गीता की रचना संस्कृत भाषा में हुई. आज विश्व की सबसे सम्पन्न और आधुनिक भाषा कही जाने वाली अंग्रेजी के शब्दकोश के अधिकतर शब्द इसी भाषा से लिए गये हैं. आज से कुछ हजार वर्ष तक संस्कृत भारतीय जन जीवन की आधार भाषा कही जाने वाली संस्कृत आज हासिये पर आ चुकी जिसको जानने और समझने की आज संख्या मुट्ठीभर ही रह गईं हैं.

भले ही संस्कृत को आज वो स्थान प्राप्त नही हैं, जिसकी वो हकदार हैं, मगर इसका महत्व आज भी उतना ही हैं जितना पहले था. क्युकि इसी की मदद से हमे अन्य भाषाओं का ज्ञान प्राप्त हो सका हैं.

संस्कृत दिवस, Sanskrit Diwas date

हमारे भारत देश में मातृभाषा संस्कृत को सम्मान देने के लिए हर वर्ष श्रावण माह की पूर्णिमा के दिन विश्व संस्कृत दिवस मनाया जाता हैं. इस दिन हिंदुओ का एक और मुख्य त्यौहार रक्षा बंधन भी होता हैं. इस वर्ष 2017 में विश्व संस्कृत दिवस 7 अगस्त को मनाया जा रहा हैं. इस पूर्णिमा कों हमारे ऋषि-मुनियों के स्मरण की तिथि भी मानी जाती हैं. विस्तृत संस्कृत साहित्य के वे ही जनक माने जाते हैं. इसलिए संस्कृत दिवस कों ऋषि पूर्णिमा के दिन भी मनाया जाता हैं. इस दिन सभी जिला और ब्लाक स्तर पर विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रतियोगिताओ का आयोजन किया जाता हैं. संस्कृत भाषा के विद्वान कवि और लेखक अपनी अपनी प्रस्तुती देते हैं. संस्कृत के क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन करने वाले प्रतिभाशाली व्यक्तियों को राज्य सरकार द्वारा पुरुस्कृत किया जाता हैं.

संस्कृत दिवस का महत्व (Sanskrit Day Importance)

संस्कृत दिवस को राष्ट्रिय और वैश्विक स्तर पर मनाया जाता हैं. उसके मनाने के पीछे मुख्य आधार यह हैं कि लोग इस भाषा में महत्व को समझे और हमारी नई पीढ़ी को भारत की इस भाषा से परिचय करवाया जाए. बहुत से लोग ये समझते हैं आज अंग्रेजी के बिना काम नही चलने वाला या संस्कृत एक पुरानी भाषा हैं.

समय बदलने के साथ आज इसका कोई महत्व नही हैं. ऐसी बात नही हैं. इन्टरनेट पर आज संस्कृत भाषा अंग्रेजी की द्रष्टि से अधिक सुद्रढ़ हैं.

संस्कृत भाषा का महत्व (Sanskrit Language Mahatv and information)

संस्कृत भाषा भारत की सभ्यता और सुनहरे इतिहास का प्रतीक हैं, जिन्हें आज लोग भुलाते जा रहे हैं. भारत सरकार के शिक्षा विभाग ने 1969 से प्रतिवर्ष राष्ट्रिय और राज्य स्तर पर हर साल संस्कृत भाषा दिवस मनाने का निर्देश जारी किया था. आज भी हमारे देश में इस भाषा के अध्धयन और साहित्य सर्जन के लिए कई विद्यालय और विश्वविध्यालय एस दिशा में महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं. राजस्थान के शिक्षा पाठ्यक्रम में इसकी महत्ता को समझते हुए कक्षा 6 से 9 तक संस्कृत को एक अनिवार्य विषय के रूप में पढाया जाता हैं. विभिन्न अवसरों पर संस्कृत निबन्ध, श्लोक, भाषण और काव्य प्रतियोगिताओ का आयोजन भी करवाया जाता हैं.

भारत के संस्कृत विश्वविध्यालय (List of sanskrit university in India)

  • सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय (वाराणसी)
  • कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय (दरभंगा)
  • जगद्गुरु रामानन्दाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय
  • राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान, नई दिल्ली
  • श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ (नई दिल्ली)
  • राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ, तिरुपति (तिरुपति)
  • श्री जगन्नाथ संस्कृत विश्वविद्यालय (पुरी)
  • कविकुलगुरु कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय (रामटेक)
  • कर्नाटक संस्कृत विश्वविद्यालय (बंगलौर)
  • श्री सोमनाथ संस्कृत विश्वविद्यालय (जूनागढ़)
  • कुमार भास्कर वर्मा संस्कृत एवं पुरातन अध्ययन विश्वविद्यालय
  • गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय (हरिद्वार)
  • डॉ राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय (फ़ैज़ाबाद)

आज के समय में संस्कृत भाषा निबंध (Essay on Sanskrit language in Hindi)

संस्कृत को देवभाषा और सभी भाषाओं की जननी भी कहा जाता हैं.

विश्व की अधिकतर आधुनिक भाषाओं का उद्भव संस्कृत से ही माना जाता हैं. वैदिक काल में जन-जन की भाषा का श्रेय प्राप्त संस्कृत को वैदिक भाषा भी कहा जाता हैं. इस भाषा की प्रथम ज्ञात रचना ऋग्वेद मानी जाती हैं. इनके अतिरिक्त हमारे तीनों वेदों की रचना भी इसी भाषा में हुई. सभी विशेषताओ से पूर्ण परिष्कृत और परिमार्जित भाषा का नाम ही संस्कृत हैं.काव्य रचना, व्याकरण नियमों की द्रष्टि से इसे पूर्ण भाषा का दर्जा दिया गया हैं. सर्वमान्य इसके व्याकरण के नियमों के रचनाकार पाणिनि ही माने जाते हैं.

जिन्होंने अपनी रचना अष्टाध्यायी में इसकी विस्तृत विवेचना की हैं.

आज के समय में इस देवभाषा के सभी आयामो पर फिर अनुसन्धान कर आमजन में इसके प्रति जागृति लाने की आवश्यकता हैं. क्युकी यह मात्र एक भाषा न होकर भारतीय संस्कृति का पर्याय भी हैं. हमारी सभ्यता और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए हमे इस भाषा को अधिक महत्व देना चाहिए.

इसी से हमे शिरोधार्य करना होगा इससे ही हमारी विरासत का विकास और उत्थान हो सकता हैं.

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