संत रामानंद जी का इतिहास व जीवन परिचय | Sant Ramanand Ji Biography In Hindi

संत रामानंद जी का इतिहास व जीवन परिचय | Sant Ramanand Ji Biography History Song Death In Hindi

रामानंद भक्ति आंदोलन के क्षेत्र में उत्तर एवं दक्षिण भारत के बिच में एक एक कड़ी तथा सेतु के समान थे. ये उत्तरी भारत के भक्ति आंदोलन के प्रवर्तक माने जाते हैं. इन्होने भक्ति के द्वारा जन जन को नया मार्ग दिखाया. संत रामानंद जी ने एकेश्वरवाद पर जोर देकर राम की भक्ति पर बल दिया. जाति भेद का विरोध करते हुए सामाजिक समानता पर बल दिया. रामानन्द जी ने संस्कृत की बजाय बोलचाल की भाषा में उपदेश दिए, जिससे जन साहित्य का विकास हुआ. संत रामानंद के शिष्यों में सभी जातियों के लोग थे, जिनमें रैदास. बीर, धन्ना तथा पीपा आदि प्रमुख थे. संत रामानंद जी का इतिहास व जीवन परिचय में एक नजर इस महान समाज सुधारक की जीवनी पर.

संत रामानंद जी की जीवनी (Sant Ramanand Ji Biography)संत रामानंद जी का इतिहास व जीवन परिचय | Sant Ramanand Ji Biography In Hindi

स्वामी रामानंद जी को एक अन्य नाम स्वामी रामानन्दाचार्य के रूप में भी जाना जाता हैं. इनके जन्म वर्ष तथा जन्म स्थान के बारे में कोई प्रमाणिक जानकारी नही मिलती हैं. माना जाता हैं कि 1236 के आस-पास इनका जन्म हुआ था. इनके पिता का नाम पुण्यसदन तथा माँ का नाम सुशीला देवी था.

संत रामानंद जी की देन

  • इन्होने ग्याहरवी बाहरवी सदी के दौरान अपने विचारों एवं कार्यों से एक नवीन युग की अवधारणा रखी, इन्होने ज्ञान मार्ग की अपेक्षा ईश्वरीय कृपा को मोक्ष के अधिक आवश्यक माना.
  • रामानंद जी ने ईश्वर को सगुण मानते हुए भक्ति मार्ग पर बल दिया तथा भक्ति को सभी के लिए उपलब्ध करवाया.
  • इनके शिष्यों में सभी जातियों के लोग थे. इन्होने भक्ति पर को वैदिक परम्परा से जोड़ा तथा भक्ति पर आधारित जन आंदोलन तथा वेद आधारित उच्च जातीय आंदोलन के बिच सेतु का काम किया.
  • इन्होने विशिष्टाद्वैत दर्शन का प्रतिपादन कर शंकराचार्य के अद्वैतवाद का खंडन किया. रामानंद के अनुसार ईश्वर जीव तथा जगत तीनों सत्य हैं तथा तीनों में विशिष्ट संबंध हैं.

स्वामी रामानंद की शिष्य परंपरा

इनका जन्म इलाहबाद के ब्राह्मण परिवार में हुआ था. रामानंद जी के गुरु का नाम राधवानन्द बताया जाता हैं, उन्ही की श्रीमठ में स्वामी जी ने शिक्षा प्राप्त की थी. कठोर तपस्या तथा विभिन्न धार्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन से प्रसिद्ध विद्वान बने. सगुण तथा निर्गुण दोनों भक्ति धारा इनकी छत्र छाया में पनपी इनके 12 शिष्य हुए, जो निम्न हैं अनंतानंद,  भावानंद,  पीपा,  सेन,  धन्ना, नाभा दास, नरहर्यानंद, सुखानंद, कबीर, रैदास, सुरसरी, पदमावती.

इनके द्वारा स्थापित रामानंद सम्प्रदाय या रामावत संप्रदाय भारत के सबसे बड़े वैष्णवी मत के रूप में जाना जाता हैं, जिनकी वर्तमान में 36 उपशाखाएँ हैं. इस मत के भक्त संत, संत बैरागी के नाम से जाने जाते हैं. इनकी मुख्य मठ, श्रीमठ ही हैं इसके अतिरिक्त अन्य मठे वाराणसी, हरिद्वार, अयोध्या सहित सम्पूर्ण भारत में फैली हुई हैं. लगभग 112 वर्ष की आयु में वर्ष 1411 ई. में रामानन्द का निधन हो गया.

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