सरदार वल्लभ भाई पटेल की जीवनी | Sardar Vallabhbhai Patel Biography

Sardar Vallabhbhai Patel Biography अजेय लौह पुरुष और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महानायक सरदार वल्लभभाई पटेल की जीवनी में उनके जीवन परिचय, कार्यो तथा विशेष उपलब्धियों पर प्रकाश डाला गया है. प्रत्येक भारतीय के दिलों पर राज करने वाले पटेल अपनी सुझबुझ और कार्यकुशलता में अद्वितीय थे. आजादी के समय तक भारत में 600 देशी रियासते थी, जिनका संघ भारत के साथ विलय में सरदार वल्लभ भाई का महत्वपूर्ण योगदान रहा ,जिन्हें कभी भुलाया नही जा सकता है.

सरदार वल्लभ भाई पटेल की जीवनी | Sardar Vallabhbhai Patel Biography In Hindi

सरदार पटेल का जन्म-सरदार पटेल का जन्म गुजरात राज्य के नाडियाड तालुके के करमसंद गाँव में सन 1875 को हुआ था. इनके पिताजी श्री झवेर भाई एक साधारण किसान थे. जो कि साहसी और धार्मिक प्रवृति के इंसान थे.

बचपन-वल्लभभाई बचपन से साहसी और संघर्ष प्रिय थे. वे विद्यालय में भारतीय छात्रों के साथ होने वाले अन्याय का प्रबल विरोध करते थे. इनकी आरम्भिक शिक्षा अपने पैतृक गाँव नाडियाड में ही हुई, बड़ोदा से इन्होने मैट्रिक पास की और पहले गोधरा में मुख्तारी का काम करने लगे.

फिर बोरसद जाकर फौजदारी मुकदमे की पैरवी करने लगे. पटेल का विवाह 18 वर्ष की आयु में हुआ. विवाह के कुछ समय बाद इनकी पत्नी का आसमयिक निधन हो गया. इस तरह उनकी पत्नी एक पुत्र और पुत्री को छोड़कर चली गई, इसके बाद पटेल ने कभी दुबारा विवाह नही किया.

अद्भुत सहिष्णुता-वल्लभभाई दिल के सच्चे इंसान थे, जो सहिष्णुता के परम पुजारी थे. पत्नी के निधन का दुःख झेलने के बाद वे अपने परिवार तथा बच्चों का लालन पोषण स्वय करते रहे. इसी समय एक कम्पनी द्वारा आर्थिक मदद दिए जाने पर पटेल विदेश चले गये.वहां उन्होंने कानून की पढ़ाई के तहत बैरिस्टरी की पढ़ाई पूरी की और स्वदेश लौटकर अहमदाबाद से इन्होने वकालत करने का कार्य शुरू किया.

राजनीति में प्रवेश – कुछ वर्षो तक सरदार वल्लभ भाई पटेल ने वकालत का कार्य किया. जब 1919 में केन्द्रीय असेम्बली का चुनाव हुआ, जिसमे उन्होंने भाग लिया और सफल रहे. उसी समय महात्मा गांधी ने दक्षिण अफ्रीका से लौटकर असहयोग आंदोलन शुरू किया था. जिसमे पटेल भी सम्मलित हो गये, उन्होंने गोधरा में बेगार प्रथा को समाप्त करने के लिए कई प्रयत्न किये.

फिर पटेल को अहमदाबाद नगरपालिका का अध्यक्ष बनाया गया, तथा असहयोग आंदोलन में सक्रिय भूमिका और इस संग्राम के सफल रहने के बाद पटेल की गिनती अखिल भारतीय नेताओं में की जाने लगी. उन्होंने बारडोली के किसान आंदोलन, नमक कानून के विरुद्ध चले आंदोलन में भी नेतृत्व किया. राजनीती तथा अंग्रेज सरकार के विरुद्ध प्रखर आवाज उठाने वाले सरदार पटेल को इसी समय तीन महीने की कठोर कारावास की सजा सुनाई गई.

कांग्रेस के अध्यक्ष-वर्ष 1931 के राष्ट्रिय कांग्रेस के अधिवेशन में सरदार वल्लभ भाई पटेल को पार्टी अध्यक्ष बनाया गया. लगातार तीन गोलमेज आंदोलन की असफलता के बाद अंग्रेज सरकार के दमनकारी चक्र में पटेल को भी अन्य राष्ट्रिय नेताओं के साथ जेल में बंद कर दिया. जब 1937 को फिर से प्रांतीय चुनाव हुए उनमे पटेल ने सक्रिय भूमिका निभाते हुए कांग्रेस को सबसे बड़ी राष्ट्रिय पार्टी के रूप में विजयी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

भारत के गृहमंत्री-वर्ष 1942 में शुरू किये गये भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भूमिका के चलते 1942 में ही पटेल जी को जेल में बंद कर दिया गया. जिन्हें तीन वर्ष की लम्बी कारावास के पश्चात 1945 में जाकर रिहा किया. उसी वर्ष अंतरिम सरकार निर्माण के लिए चुनाव हुए.जिनमे पटेल को सुचना मंत्री का प्रभार दिया गया था. जब देश 1947 में जाकर आजाद हो गया तो उस समय सरदार वल्लभ भाई पटेल को पंडित नेहरु की मंत्रीमंडल में देश के पहले गृहमंत्री के रूप में कार्य करने की जिम्मेदारी मिली.

आज भी बहुत से लोग इस बात से सहमती देते है कि सरदार पटेल आजादी के समय जब पहले प्रधानमन्त्री का चुनाव किया जाना था, सबसे योग्य उम्मीदवार थे. काश उस समय नेहरु के स्थान पर सरदार पटेल भारत के पहले प्रधानमन्त्री बनते तो आज देश की तस्वीर कुछ और होती.

मृत्यु-सरदार वल्लभ भाई पटेल ने गृहमंत्री के पद पर रहते हुए कई साहसिक और बुद्धिमता पूर्ण कदम उठाए. यदि आजादी के बाद से भारत एक है तो इसका श्रेय इन्ही को जाता है. पटेल के अथक प्रयासों की वजह से ही 600 से अधिक देशी रियासतों का भारत में विलय हो पाया. लौहपुरुष हमेशा से भारतीय जनता के दिलों के सरदार बनकर जियें वर्ष 1950 में इनका देहांत हो गया था.

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