Sardar Vallabhbhai Patel In Hindi | सरदार वल्लभ भाई पटेल के बारे में

Sardar Vallabhbhai Patel In Hindi | सरदार वल्लभ भाई पटेल के बारे में

Sardar Vallabhbhai Patel History Biography Essay In Hindi: भारत की स्वतंत्रता के समय अंग्रेजों ने 562 देशी रियासतों को यह अधिकार दिया, कि वे चाहे तो स्वतंत्र रहे, चाहे तो भारत के साथ मिले या पाकिस्तान के साथ मिले. इस स्थति से निपटने के लिए जिस महान भारतीय स्वतंत्रता सेनानी को सदैव याद किया जाएगा वे है, सरदार वल्लभ भाई पटेल (Sardar Vallabhbhai Patel). Sardar Vallabhbhai Patel In Hindi | सरदार वल्लभ भाई पटेल के बारे में

सरदार वल्लभ भाई पटेल

शिक्षा पूर्ण कर सर्वप्रथम उन्होंने गोधरा में प्रांतीय राजनैतिक सम्मेलन का आयोजन किया. देश में यह पहला सम्मेलन हुआ जिसमें केवल भारतीय भाषाओं का उपयोग हुआ. उनके प्रयत्न से गुजरात में बेगार प्रथा बंद हुई, इन्होने अनेक आंदोलनों का नेतृत्व किया. बारदौली के प्रसिद्ध किसान आंदोलन की सफलता के बाद गांधीजी ने वल्लभ भाई को ”सरदार” की उपाधि दी और तब से वल्लभ भाई ”सरदार पटेल” के नाम से प्रसिद्ध हुए.

15 अगस्त 1947 को भारत देश स्वतंत्र हुआ, सरदार पटेल पहले गृहमंत्री बने, सूचना तथा प्रसारण विभाग तथा भारतीय रियासतों का विभाग भी इन्हें सौपा गया. फिर वे उपप्रधानमंत्री बने. अपनी सगठनात्मक कुशलता का परिचय देते हुए उन्होंने अधिकांश रियासतों को भारत में मिलाने की सफलता पाई.

केवल कश्मीर, हैदराबाद और जूनागढ़ में कुछ कठिनाई आई. हैदराबाद में पुलिस का एक्शन हुआ. नवाब ने पांच दिन में घुटने टेक दिए और हैदराबाद भारत में मिल गया. जूनागढ़ का नवाब प्रजा के विद्रोह से घबराकर पाकिस्तान भाग गया. सभी रियासते भारत का अभिन्न अंग बन गई. अपने 75 वें जन्मदिन पर सरदार वल्लभ भाई पटेल ने देश को संदेश दिया था “उत्पादन बढ़ाओं, खर्च घटाओं” वह आज भी सबके लिए सार्थक है.

(Sardar Vallabhbhai Patel Jayanti History Biography Quotes Kavita In Hindi)

1 life duration 31 अक्टूबर 1875 – 15 दिसम्बर 1950
2 birth death place नाडियाड- बॉम्बे
3 father name झावर भाई
4 mother name लाड़ बाई
5 wife name झवेरबाई
6 brothers सोम भाई, बिट्ठल भाई, नरसीभाई
7 sister दहिबा
8 son दह्याभाई
9 daughter मणिबेन

वल्लभ भाई पटेल को सरदार पटेल के रूप में याद किया जाता है. तथा लौह पुरुष की उपाधि से प्रतिष्ठित किया गया. वह केवल एक निर्भीक व समर्पित स्वतंत्रता सेनानी ही नही थे अपितु वे सामाजिक सेवा के कार्यों में भी उसी प्रकार समर्पित थे. इनकी अद्वितीय उपलब्धी थी, एक नये भारत के निर्माण की यात्रा” उनके सतत प्रयासों के कारण ही स्वतंत्रता प्राप्ति के एक वर्ष के भीतर ही अखंड भारत का निर्माण हुआ.

वल्लभ भाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नाडियाड़ में एक कृषक झावर भाई पटेल के घर हुआ था. झावर भाई पटेल 1857 के प्रथम स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान रानी झाँसी की सेना में कार्यरत थे. बड़ी उम्रः में स्कूल जाने वाले वल्लभभाई पटेल ने 1897 में मैट्रिक की परीक्षा पास की.

सामाजिक क्षेत्र में पटेल की भूमिका (Sardar Vallabhbhai Patel Jayanti History Biography Quotes Kavita In Hindi)

जिला अधिवक्ता (DISTRICT PLEADERS) परीक्षा का प्रारम्भिक कानूनी कोर्स पास करने के बाद उन्होंने गोधरा के कोर्ट में एक नामी वकील के रूप में स्वयं को स्थापित किया. वह एक बचाव पक्ष के वकील (DEFENCE LAWYER) के रूप में शीघ्र प्रतिष्ठित हो गये तथा 1910 के कानून में उच्च शिक्षा के अध्ययन के लिए इंग्लैंड की यात्रा की. सरदार वल्लभ भाई ने अपने आप को रोमन कानून के अच्छे विद्वानों की श्रेणी में पाया तथा वह 3 वर्ष की बजाय 2 वर्ष में ही वकील बन गये. भारत वापिस आने के बाद सरदार पटेल वकालत करने लगे.

1917 में वल्लभभाई पटेल ने गंभीरतापूर्वक सामाजिक कार्य क्षेत्र में अपने आप को समर्पित कर दिया. उन्हें नगर निगम का पार्षद चुना गया तथा न्यू गुजरात सभा के सचिव नियुक्त किये गये. उसके बाद पटेल ने किसान आंदोलन में अपने आप को झोंक दिया तथा खेड़ा सत्याग्रह की शुरुआत कर दी. उन्होंने मांग की कि किसानों से राजस्व कर की वसूली को कुछ दिन के लिए टाल दिया जाए क्योंकि फसल की पैदावार सिर्फ 25 प्रतिशत हुई थी. पटेल इस तरह गांधी के एक नजदीकी दोस्त व सहयोगी के रूप में हो गये.  तथा किसानों को प्रोत्साहित किया कि पूरी दृढता के साथ एक अहिंसात्मक संघर्ष को शुरू कर दे.

महात्मा गांधी एवं सरदार पटेल के आंदोलन (Mahatma Gandhi and Sardar Patel’s movement)

इन दोनों व्यक्तित्वों ने किसानों की मांगों को अन्तः मनवाने के लिए ब्रिटिश सरकार पर जबर्दस्त दवाब डाला. बारदोली में किसानों के अधिकारों के संघर्ष करने के लिए राष्ट्र के लोगों ने उन्हें अपने सरदार की उपाधि से विभूषित किया. इस प्रकार सरदार पटेल ने सूरत जिले की एक तहसील के अस्सी हजार किसानों के साथ आंदोलन का नेतृत्व किया तथा ब्रिटिश सरकार को मजबूर किया कि वे किसानों के लिए 22 प्रतिशत से लेकर 50 या 60 प्रतिशत तक राजस्व कर माफ़ कर दिया जाए. इस तरह इस बार भी ब्रिटिश सरकार को झुकना पड़ा तथा उचित कर वसूलने के आदेश जारी कर दिए थे. उसके बाद पटेल ने अपने कानूनी पेशे को छोड़ दिया.

सरदार वल्लभ भाई पटेल ने साइमन कमीशन का बहिष्कार सम्बन्धी आंदोलन में बहुत ही सक्रिय भूमिका निभाई तथा गांधीजी व अन्य नेताओं के साथ नमक सत्याग्रह आंदोलन में जमकर भाग लिया. मार्च 1930 में इस आंदोलन वह पहले राष्ट्रीय नेता थे, जिन्हें गिरफ्तार किया गया. स्वाधीनता संग्राम के इस चितेरे नायक को मार्च 1931 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया. जब 1937 में कांग्रेस मंत्रीमंडल बनाया गया. उस समय कांग्रेस संसदीय उपसमिति के सभापति रहते हुए वह प्रांतीय सरकार के साथ साथ कांग्रेस की नीतियों के सम्बन्ध में एक पथ प्रदर्शक की भूमिका निभाते रहे.

वल्लभ भाई का भारतीय आजादी में योगदान (ESSAY ON Vallabh Bhai’s Contribution to Indian Independence)

सरदार वल्लभ भाई पटेल ने ब्रिटिश सरकार का जमकर विरोध करने के लिए 1939 में मंत्रालयों को भंग करने का आदेश दिया. सरदार पटेल गांधीजी द्वारा संचालित व्यक्तिगत सविनय अवज्ञा आंदोलन में भाग लेने के कारण 17 नवम्बर 1940 को गिरफ्तार कर लिए गये, परन्तु स्वास्थ्य ठीक न होने के कारण शीघ्र ही जेल से मुक्त कर दिए गये. भारत छोड़ों आंदोलन 1942 में सक्रिय रूप से पुरे दमखम के साथ भाग लेने के कारण सरदार पटेल को एक बार फिर गिरफ्तार कर लिया गया. इस बार इन्हें लगभग 3 वर्ष तक जेल में रखा गया.

द्वितीय विश्वयुद्ध की समाप्ति के बाद कांग्रेस के प्रतिनिधि के रूप में इन्होने ब्रिटिश सरकार से मांग की कि वे भारत की स्वतंत्रता के लिए स्थायी रूप से शान्ति के साथ समाधान कर लिया जाए. इसी का परिणाम था, कि 15 अगस्त 1947 को भारत को आजादी मिल गई और उन्हें उप प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया, इसके साथ ही उन्होंने गृह मंत्रालय, दूर संचार विभाग भी संभाला तथा प्रांतीय समस्याओं का समाधान भी अपने संरक्षण में किया.

प्रथम गृहमंत्री के रूप में योगदान (Contributions as First Home Minister)

वल्लभ भाई पटेल ने लोक परीक्षा को पुनर्स्थापित करते हुए भारतीय प्रशासनिक सेवा तथा भारतीय विदेश सेवा के रूप में चित्रित किया. हिंदी भाषा को कुछ राज्यों में उसी माध्यम से सरकारी काम-काज करने के लिए प्रोत्साहित किया. राज्यों के मंत्री पद पर रहते हुए उनकी सबसे महान देन यह थी कि 365 दिनों में ही उन्होंने 562 राज्यों एवं रियासतों को भारतीय संघ के रूप में ढ़ालकर पूरे देश को एकता के सूत्र में पिरो दिया.

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