सरदार पटेल पर कविता | Sardar Vallabhbhai Patel Poem In Hindi

Sardar Vallabhbhai Patel Poem In Hindi: नमस्कार दोस्तों आज सरदार पटेल पर कविता बता रहे हैं. भारत के लौह पुरुष कहे जाने वाले पटेल के अथक प्रयासों से ही अखंड भारत का स्वरूप मिला था. 31 अक्टूबर 1875 को गुजराती परिवार में जन्मे पटेल के योगदान के कारण इन्हें जन्म दिवस को एकता दिवस के रूप में मनाया जाता हैं. यह तत्कालीन राजनीति का असर और देश का दुर्भाग्य ही समझा जाएगा कि वे प्रधानमंत्री नहीं बन पाएगे थे.

सरदार पटेल पर कविता Sardar Vallabhbhai Patel Poem In Hindi

सरदार पटेल पर कविता | Sardar Vallabhbhai Patel Poem In Hindi

सच्चे अर्थों में सरदार वल्लभ भाई पटेल आधुनिक भारत के निर्माता थे. वे एक दूरदर्शी, विद्वान्, कुशल राजनेता व कूटनीतिज्ञ के साथ ही सच्चे देशभक्त थे. स्टेच्यू ऑफ यूनिटी का निर्माण कर देश उन्हें सदैव याद रखेगा. आज की सरदार पटेल कविता का शीर्षक हैं लौहपुरुष जिसमें हम पटेल के राष्ट्रभक्ति कार्यों एवं उनके व्यक्तित्व को समझ सकेगे. स्कूल के स्टूडेंट्स जो क्लास 1,2,3,4,5,6,7,8,9,10 में पढ़ते है, उनके लिए यह शोर्ट Sardar Patel Poem प्रेरणादायक होगी.

Lohpurush Sardar Vallabhbhai Patel Poem In Hindi

खंड खंड को जोड़ जिसने
अखंड राष्ट्र का सृजन किया
उन शिल्पी वल्लभ को सबने
लोहपुरुष कह नमन किया

बापू के अनुयायी थे
खेड़ा से रण में रखे कदम
भर हुंकार बरदौली में बोले
न दे लगान की रत्ती हम

वाणी में थी सिंह गर्जना
उर में थे अनुराग नरम
बढ़ी ख्याति अखिल हिन्द में
चूर किया सत्ता का भ्रम

अत्याचार के शासन का
दृढ होकर जिसने दमन किया
उन युग शिल्पी को सबने
लौहपुरुष कह नमन किया

सदियों से जो नहीं था हुआ,
चंद दिनों में सफल किया
पांच सौ पैसठ रजवाड़ों को
कूटनीति से विलय किया.

जूनागढ़ से जनमत लेकर
कश्मीर से सुलह किया
सबक सिखा करके निजाम को
हैदराबाद में समर किया.

इस्पात के ढाँचे की सेवा का
नए रूप में गठन किया
उन युग शिल्पी वल्लभ को सबने
लोहपुरुष कह नमन किया.

साहस धैर्य की अनुपम दृष्टि
हिय में थे संजोय हुए
धरा से उठकर बने हिमालय
जिनकी गुरुता गगन छुए

अतुल त्याग की मूरत थे वे
लोभ न जिनके निकट गये
अखंड राष्ट्र एकता हेतु
तन मन धन से अर्पित भए

उर में धारण कर सेवा भाव
फिर कुरीतियों का दमन किया
उन युग शिल्पी वल्लभ को सबने
लोहपुरुष कह नमन किया.

कायम रखने राष्ट्र एकता
उच्च पदों का त्याग किया
विजयी होकर लोभ क्रोध पर
देशहित का साथ दिया

दूरदर्शिता की शक्ति थी
चीन के प्रति चेताया था
अमर हुए जब ज्ञात तब
खुद को घर न बनाया था

धन्य हो गई धरा हिन्द की
जो भारत भू पर जन्म लिया
उन युग शिल्पी वल्लभ को सबने
लोहपुरुष कह नमन किया.

खंड खंड को जोड़ के जिसने
अखंड राष्ट्र का सृजन किया
उन युग शिल्पी वल्लभ को सबने
लोहपुरुष कह नमन किया. Veer The Winner

लौहपुरुष – एक अनसुनी कविता । Statue of Unity Special, LauhPurush, Sardar Patel

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