Sheetalaashtami Essay In Hindi शीतलाअष्टमी पर निबंध भाषण कविता शायरी

Sheetalaashtami Essay In Hindi शीतलाअष्टमी पर निबंध भाषण कविता शायरी : सभी पाठकों को शीतला सप्तमी और अष्टमी 2019 की हार्दिक बधाई. इस साल शीतलाअष्टमी का व्रत 27 और 28 मार्च को पड़ रहा हैं. इनकी तिथियों तथा मनाने का तरीका देशभर में अलग अलग होने के उपारांत भी यह कई सारी समानताएं लिए हुए हैं.

Sheetalaashtami Essay In Hindi शीतलाअष्टमी पर निबंध भाषण कविता शायरी

Sheetalaashtami Essay In Hindi

माताजी शीतला देवी का यह व्रत एक त्योहार के रूप में देश के कोने कोने में मनाया जाता हैं. कई स्थानों पर माघ शुक्ल की षष्ठी को, कोई वैशाख कृष्ण पक्ष की अष्टमी को तो कोई चैत्र के कृष्ण पक्ष की सप्तमी या अष्टमी के दिन शीतलाष्टमी व्रत रखा जाता हैं. सभी कष्टों का निवारण करने वाली तथा पापों से छुटकारा दिलाने वाली शीतला मैया की भक्तजन पूर्ण श्रद्धा भाव से आराधना करते हैं.

इसे बासोड़ा पर्व भी कहा जाता हैं उत्तर भारत के अधिकतर राज्यों में इसे चैत्र कृष्ण सप्तमी अथवा अष्टमी तिथि को मनाते हैं, बासोड़ा का अर्थ होता हैं ठंडा या बासी खाना.

अन्य हिन्दू पर्वों त्योहारों तथा व्रतों से शीतलाअष्टमी का पर्व पूर्णतया भिन्न माना जाता हैं. इस दिन माताजी को मानने वाले किसी भक्त का चूल्हा नहीं जलता हैं. वह एक दिन पहले बने बासी भोजन का माँ को भोग लगाकर प्रसाद के रूप में उदरपूर्ति करते हैं.

शीतला देवी को चेचक की देवी के रूप में भी पूजा जाता हैं मगर माता अथवा चेचक के रोगी को इस दिन व्रत नहीं रखना चाहिए. कई गाँवों में शीतला माता के मंदिर हैं जो आमतौर पर वटवृक्ष के नीचे ही बनाए जाते हैं. माताजी का मुख्य मंदिर चाकसू जयपुर में हैं इसके अतिरिक्त गुरुग्राम में भी इनका प्रसिद्ध धाम हैं.

शीतलाअष्टमी की भौर में वट के वृक्ष के नीचे माताजी की पूजा होती हैं प्रतीक चिहन के रूप में गोबर के गर्दभ बनाए जाते है जो उनकी सवारी हैं. ऐसी मान्यता है कि जो भक्त अपने शुद्ध अंतःकरण से शीतलाजी की पूजा कर व्रत रखते हैं. माँ उनके समस्त कष्टों का हरण कर उन्हें धन धान्य सम्पन्न बना देती हैं.

शीतलाअष्टमी का महत्व

भारत में सदियों से शीतला माता का उत्सव मनाया जाता रहा हैं. स्कन्द पुराण में इनके माहात्म्यं का वर्णन मिलता हैं. शीतला माता की तस्वीर में उन्हें गर्दभ वाहन पर सवार हाथों में हाथों में कलश, सूप, मार्जन (झाडू) तथा नीम के पत्ते धारण किये हुए दिखाया जाता हैं.

यह चेचक के रोग के इलाज के प्रतीक समझे जाते हैं. जिनमें सूप से रोगी को हवा, झाड़ू से छाले फोड़े जाते है तथा नीम उन घावों को सड़ने नहीं देता हैं. इसके अलावा कलश का जल रोगी को आराम दिलाता है गर्दभ की लीद के लेपन से चेचक के दाग समाप्त हो जाते हैं.

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