शिक्षक दिवस पर भाषण | Speech on Teacher’s Day

Speech on Teacher’s Day भारत एक प्राचीन संस्कृति का देश हैं जिसका आधार हैं हमारी सभ्यता और संस्कृति हैं. किसी भी देश के भविष्य का आधार उसका अतीत हैं. हमारी सभ्यता का अतीत हमारे प्राचीन वेदों और ग्रंथो में समाहित हैं. और उन पर एक सरसरी द्रष्टि डालने पर हम पाते हैं. कि हम और हमारा अतीत शैक्षिक रूप से अत्यंत समर्द्ध था.

शिक्षक दिवस पर भाषण/Speech on Teachers Day

जिसकी आधार थी हमारी गुरु परम्परा जब कार्बन पद्दति के तथ्यों पर विचार करे तो हम पाते हैं कि हमारे देश के बालक संस्कृत भाषा जो दुनिया की सबसे समर्द्ध भाषा हैं. भाषा के ग्रन्थ मौखिक याद कर लिया करते थे. जब दुनिया की भव्य सभ्यताएं अपने आदिम स्वरूप में थी. इन स्वर्णिम तथ्यों का आधार थी हमारी गुरुकुल व गुरु शिष्य संस्कृति.

वेदों में वर्णित गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु गुरु देवो महेश्वराय हमे इस बात का अहसास दिलाता हैं. कि हमारे गुरुओ का कितना महत्वपूर्ण स्थान था. सम्मान और गुरु पूजा की हमारी यह संस्कृति विश्व के किसी अन्य देश में देखने को नही मिलती हैं.

एक बल्ब में बहुत सा प्रकाश होता हैं. परन्तु वह स्वय: प्रज्वलित नही हो सकता हैं. इस प्रकार दुनिया का सारा बालक के चारो और होता हैं. उस ज्ञान को समझने के लिए बालक की ज्ञानेन्द्रियो का विकास शिक्षक ही करता हैं. हमारी मातृभाषा की कुछ कहावते इस बात की पुष्टि करती हैं. गुरु बिन घोर अँधेरा

आधुनिक युग के महान मनोवैज्ञानिक वाटसन का कथन सारगर्भित हैं. – आप मुझे बालक दो मै उसे वो बना दुगा जो आप चाहते हैं. गुरु शब्द की प्रतिष्टा में चार चाँद लगाने के साथ ही गुरु शब्द अपने आप में एक अतुलनीय व्याख्या हैं.

आज के सन्दर्भ में प्राचीन भारतीय दार्शनिक चाणक्य का कथन याद आता हैं. कुछ ज्यादा अर्जित करने के लालच में सब कुछ खो देने से अच्छा हैं अपने अतीत को सहेज कर रखना.

शिक्षक दिवस भाषण-2

आदरणीय हमारे आदर्श शिक्षक गण महोदय और प्यारे सहपाठी गण जैसा कि आप सभी को विदित हैं कि आज 5 सितम्बर हैं जिसे हम शिक्षक दिवस के रूप में मनाते हैं. प्रिय साथियो आज इस संसार में कोई भी व्यक्ति उंचाइयो पर पंहुचा हैं. तो उनमे माता-पिता के अलावा गुरुजनों का योगदान सर्वाधिक हैं.

हम शिक्षक दिवस हमारे देश के प्रथम उपराष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म दिवस पर मनाते हैं. गुरु का हर किसी के जीवन में महत्व रखता हैं. हमारे समाज में भी गुरुजनों का विशिष्ट महत्व हैं. डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन महान दार्शनिक और शिक्षक थे.

इनका शिक्षा के प्रति गहरा जुड़ाव था. हम सभी जानते हैं कि हमारे जीवन को सवारने तथा ज्ञान, कौशल, विशवास, सामर्थ्य आदि बिन्दुओ पर गहनता से अध्ययन करके जीवन में क्या उपयोगी हैं और क्या अनुपयोगी उन सारी बातो से हमे अवगत करवाते हैं.

शिक्षक बालको को भय दिखाकर अनुशासन तथा नियमों में बंधे रहने के गुणों का विकास शुरूआती जीवन में ही कर देते हैं. जो व्यक्ति के व्यक्तिव निर्माण में बहुत काम आता हैं. दुनिया से अनभिज्ञ बालक को एक अच्छा इंसान बनाने का कार्य एक शिक्षक ही कर सकता हैं.

आज के शिक्षक दिवस अवसर पर मेरे गुरुजनों के सम्मान में एक कविता की दो लाइन बोलना चाहुगा.

ना तारीफ के शब्दों की हैं उसे चाहत,
ना महंगे उपहारों से होती हैं उसकी इबादत
उसे मिलती हैं तब ही आत्मीय शांति
जब फैलती हैं विश्व में शिष्य कान्ति

समय सबसे बड़ा शिक्षक होता हैं, जो हर पल कुछ न कुछ नया और चमत्कारिक ज्ञान देता रहता हैं. समय ही लोगों को निरंतर अपने साथ लिए चलने का डर दिखाता हैं. क्युकि एक बार यदि कोई समय के साथ पिछड़ जाता हैं. तो एक कठोर और ज्ञानवान शिक्षक ही वह अकेला व्यक्ति हो सकता हैं, जो व्यक्ति को पुनः समय के साथ ला सकता हैं.

हमारे मुस्कराने की वजह हैं आप
हमारे लिए बहुत ख़ास हैं आप
हमे मिलेगी जब भी कोई ख़ुशी
हम सोचेगे दुआ करने वाले हैं आप

यह शायरी एक अच्छे शिक्षक के चरित्र को चरितार्थ करती हैं. शिष्य चाहे उद्दंड हो या आज्ञाकारी गुरु हमेशा उनके अच्छे के लिए दुआ करते हैं. तथा उन्हें जो भी ज्ञान देते हैं उनकी बेहतरी के लिए देते हैं. भले ही आज तक शिक्षक विश्व के सर्वोच्च पदों तक नही पहुच पाए हो. मगर वहाँ तक पहुचने वाले लोगों को शिक्षक द्वारा ही तैयार किया जाता हैं.

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