शिशुनाग वंश के बारे में | Shishunaga Dynasty History In Hindi

Shishunaga Dynasty History In Hindi शिशुनाग वंश विकिपीडिया के इस लेख में हम Shishunaga Dynasty History में वंश की स्थापना, राजधानी, वंश के शासकों तथा अंतिम शासक सहित महत्वपूर्ण जानकारी व इतिहास के बारे में संक्षिप्त में जानेगे. मगध पर नंदवंश के शासक के पूर्व बिहार से लेकर बंगाल तक शिशुनाग का राज्य था, जिन्होंने  ४१२ई॰ में एक नयें राजवंश की स्थापना की जिन्हें शिशुनाग वंश के नाम से जाना गया था. शिशुनाग वंश के बारे में | Shishunaga Dynasty History In Hindi

शिशुनाग वंश के बारे में | Shishunaga Dynasty History

अवन्ति राज्य के शासक को पराजित कर शिशुनाग ने अपने राज्य की शुरुआत की. इसके राज्य का विस्तार मगध, मालवा, वत्स, अवन्ति व बंगाल तक फैला हुआ था.  कालाशोक इस वंश का दूसरा महत्वपूर्ण शासक माना जाता है जो शिशुनाग का पुत्र था.  एक व्यक्ति द्वारा इसकी चाक़ू मारकर हत्या कर दी जाती हैं. कालाशोक के 10 पुत्र थे जिन्होंने अगले २२ वर्षों तक शासन किया इसके बाद मगध पर नंद वंश का शासन स्थापित हो गया.

शिशुनाग वंश का इतिहास

  • हर्यक वंश के एक सेनापति शिशुनाग ने मगध के सिंहासन पर अधिकार करके शिशुनाग वंश की स्थापना की.
  • शिशुनाग वंश के शासनकाल में राजधानी पाटलिपुत्र को बदलकर वैशाली ले जाया गया.
  • इस वंश के शासक कालाशोक के शासन में दूसरी बौद्ध महासभा का आयोजन वैशाली में हुआ था.
  • इस वंश की प्रमुख उपलब्धि अवन्ति को जीतकर मगध साम्राज्य में मिलाना था. नागदशक शिशुनाग वंश का अंतिम शासक था.

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