Short Essay On Hindi Diwas In Hindi Language | 14 सितम्बर हिंदी दिवस 2019 पर निबंध

Short Essay On Hindi Diwas In Hindi Language दोस्तों आपका स्वागत करता हूँ, 14 नवम्बर 2019 को हर वर्ष की भांति हिंदी दिवस मनाया जा रहा हैं. Short Essay On Hindi Diwas In Hindi Language | 14 सितम्बर हिंदी दिवस 2019 पर निबंध स्टूडेंट्स के लिए यहाँ लिखा गया हैं. कक्षा 1,2,3,4,5,6,7,8,9,10 में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स इन निबंध भाषण के माध्यम से राष्ट्रीय हिंदी डे को अपनी भाषा में समझ सकते हैं.

Short Essay On Hindi Diwas In Hindi Language | 14 सितम्बर हिंदी दिवस 2018 पर निबंध

देवनागरी हिंदी हमारी राष्ट्र भाषा है. 14 सितम्बर 1949 के ऐतिहासिक दिन पर हमारे सविधान द्वारा इसे भारत की आधिकारिक राष्ट्रिय भाषा का दर्जा दिया गया. इस दिन को यादगार बनाने के उद्देश्य से इसे Hindi Diwas (विश्व हिंदी दिवस) के रूप में हर वर्ष मनाया जाता हैं. राष्ट्रभाषा के इतिहास, महत्व तथा इस मुकाम पर पहुचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले लोगों को 14 सितम्बर हिंदी दिवस 2019 पर याद किया जाता है.

हिंदी दिवस निबंध- Short Essay On Hindi Diwas In Hindi Language

essay in hindi language on hindi diwas: किसी भी देश के अधिकतर लोगों द्वारा स्वेच्छा से अपनाई गई व बड़े क्षेत्र में बोली एवं समझी जाने वाली भाषा को राष्ट्रभाषा कहा जाता है. गणतन्त्र भारत द्वारा हिंदी, अंग्रेजी, मराठी, तमिल, तेलगु, मराठी, कन्नड़ समेत 22 भाषाओँ को सविधान द्वारा राष्ट्रिय भाषाओं का दर्जा दिया गया. इन सभी क्षेत्रीय में हिंदी सबसे लोकप्रिय भाषा है. जिन्हें राजभाषा का दर्जा दिया गया है. राज भाषा वह लिपि या भाषा होती है, जिन्हें सरकारी (राजकीय) कार्यो में उपयोग किया जाता है.

हिंदी दिवस के महत्व पर निबंध (hindi diwas ka mahatva in hindi language)

हमारे सविधान द्वारा तो हिंदी को अंग्रेजी के साथ-साथ राज भाषा का पद दिया गया. मगर व्यवहारिक जीवन में हम अधिकतर राज कार्यो में हिंदी की जगह आम तौर पर अंग्रेजी को ही पाते है. हिंदी को अपना वास्तविक सम्मान और स्थति प्राप्त करने के लिए दशकों से संघर्ष करना पड़ रहा है. हिंदीभाषियों द्वारा ही अपनी मातृभाषा कों सम्मानित स्थान प्रदान किया जा सकता है.

क्यों एक उन लोगों की विदेशी भाषा आज भी हम पर अधिपत्य जमाएं बैठी है, जिनसे हम 1947 से ही आजाद है. हमारे आम जन की भाषा जिन्हें अधिकतर लोग जानते है समझते है वो तिरस्कृत क्यों है. यह सब जानने के लिए हमे हिंदी की सवैधानिक स्थति का अवलोकन करना होगा.

हमारे गणतंत्र के आधार सविधान के अनुच्छेद 343 के खंड क में हिंदी को राजभाषा के रूप में देव नागरी लिपि के साथ स्वीकार किया गया है. पूर्व स्थति के अनुसार सविधान के लागू होने के 15 साल बाद तक सहायक राष्ट्र भाषा के रूप अंग्रेजी का उपयोग होता रहेगा. सैकड़ो वर्षो तक अंग्रेजी ही राज काज की मुख्य भाषा होने के कारण आजादी के तदोपरांत हिंदी को पूर्ण रूप से राष्ट्रिय भाषा बनाए जाना व्यवहारिक रूप से कठिन था. इसी उद्देश्य से आरम्भिक 15 वर्षो तक 26 जनवरी 1965 तक हिंदी की सहायक भाषा के रूप में अंग्रेजी में राजकीय कार्य स्वीकार किया गया.

जब 1965 में हिंदी को राष्ट्रभाषा के पद पर प्रतिस्थापित करने का शुभ अवसर आया तो हमारे ही देश के कुछ दक्षिण राज्यों के राजनेताओ और लोगों ने हिंदी के खिलाफ ही विरोध का झंडा खड़ा कर दिया. राजनितिक फायदे के लिए किये गये हिंदी विरोधी इस आंदोलन में बड़े आंदोलन का रूप लेकर शासन व्यवस्था को पूर्ण रूप से ठप सा कर दिया.

भारत में किसी एक भाषा कों राष्ट्रभाषा अभी तक स्वीकार न किये जाने की स्थति का अंदाजा हम इस बात से लगा सकते है. कि भारतीय सविधान द्वारा 22 अन्य भाषाओ को राजभाषा माना गया. जिनमे सरकारी काम-काज संचालित किया जा सकता था. भारत में सबसे अधिक लोग हिंदी बोलते है, इसके बाद सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा में बगला है. इसके बाद तमिल, मराठी, कन्नड़, तेलगु, पंजाबी, गुजराती भाषा को बोलने वालों की संख्या करोड़ो में है.

hamari rashtrabhasha hindi essay in hindi language

इस बहुभाषावाद का सबसे बुरा असर हिंदी को सहन करना पड़ा. राजनितिक स्वार्थ के लिए किये गये विरोधों के कारण हमारी मातृभाषा अपने सम्मानित स्थान तक नही पहुच है. ब्रिटिश भारत में अंग्रेजी का प्रचलन पुरे देश में था. स्वतंत्रता की प्राप्ति के बाद हिंदी ही सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा और पुरे देश की सम्पर्क भाषा के रूप में सामने आई है. उत्तर, दक्षिण पूरब या पश्चिम भारत के किसी कोने में इस भाषा को बोलने व् समझने वाले लोग मिल जाएगे. यही वजह है कि हमारे सविधान निर्माताओ तथा राष्ट्रिय नेताओं ने हिंदी को ही भारत की राष्ट्रभाषा बनाने की पुरजोर वकालत की.

हिंदी की लोकप्रियता व् स्वरूप की बात करे तो भारत के 15 से अधिक राज्यों की मुख्य भाषा हैं. इसकी देवनागरी लिपि बेहद सरल हैं. व्यापक शब्दावली और व्याकरण की इस भाषा ने देशी विदेशी सभी शब्दों को आत्मसात कर अपना विस्तार किया है. भाषा लोगों की  भावनाओं से जुड़ा विषय होने के कारण यह राष्ट्रिय एकता और समरूपता बढ़ाने में भी सहायक हैं.

इन्टरनेट के बढ़ते प्रचलन ने हिंदी और अंग्रेजी भाषा के समन्वयित रूप में हिग्लिश अधिक प्रचलन में है. दूसरी तरफ व्यवसायिक शिक्षा के तीव्र प्रचलन ने भी अंग्रेजी को बढ़ावा दिया हैं. कई बड़े कोर्सेज़ एकमात्र अंग्रेजी में ही हैं. जिस कारण मजबूरन छात्रों को उन्हें अपनाना पड़ता हैं. जिसके परिणामस्वरूप घर में हिंदी तथा संस्थान में अंग्रेजी के बिच वो पूर्ण रूप से सामजस्य नही बिठा पाते हैं.

दूसरी तरफ इन्टरनेट की भाषा कही जाने वाली हिग्लिश मातृभाषा हिंदी के लिए चिंता का विषय साबित हो सकती है, एक तरफ जहाँ अहिंदीभाषी लोग इसके संर्पक में आने से उनका रुझान बढ़ रहा है, वही मूल हिंदी का उपयोग न होने से इसका प्रचलन भी कम हो रहा है. हमारी राष्ट्रिय भाषा पूर्ण रूप से वैज्ञानिक और परिष्कृत भाषा होने के साथ साथ इसकी नियमावली, व्याकरण और विशाल शब्दकोश इसकी महत्ता को दर्शाते है.

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हिंदी भाषी प्रदेशो में हर साल विद्यालय, कॉलेज तथा विभिन्न सरकारी तथा गैर सरकारी संस्थानों में Hindi Diwas मनाया जाता हैं. इसके स्वर्णिम इतिहास और सुनहरे भविष्य को लेकर कई प्रकार की संगोष्टीयों का आयोजन होता है. इस भाषा के छात्रों को हिंदी भाषा के इतिहास, महत्व, आज के समय में इसकी आवश्यकता जैसे विषयों पर निबन्ध और भाषण प्रस्तुत किये जाते हैं.

भले ही आज के युवा अंग्रेजी की तरफ अधिक ललायित हो रहे है, उन्हें अपनी मातृभाषा कों अपने दिलों में बनाए रखना होगा. हमारे प्रधानमन्त्री श्री नरेंद्र मोदी और अटल बिहारी वाजपेयी सर्वोच्च नेता होने के बावजूद राष्ट्रिय और अंतर्राष्ट्रीय मंचो पर सदैव हिंदी में ही अपना वक्तव्य देते हैं. भारत के अलावा नेपाल, त्रिनिदाद, मारीशस में बोली और समझी जाने वाली हिंदी में बोलने या लिखने में हमे हीनता की भावना की बजाय गर्व होना चाहिए.

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