सिन्धु सभ्यता का इतिहास | Sindhu Sabhyata History In Hindi

सिन्धु सभ्यता का इतिहास Sindhu Sabhyata History In Hindi: बीसवी सदी की शुरुआत तक पुरातत्ववेत्ताओं की यह धारणा था कि वैदिक सभ्यता भारत की प्राचीनतम सभ्यता हैं. लेकिन बीसवी सदी के तीसरे दशक में खोजे गये स्थलों से साबित हुआ कि वैदिक सभ्यता से पूर्व भी भारत में एक सभ्यता विद्यमान थी, इसे हड़प्पा सभ्यता या सिन्धु घाटी सभ्यता के नाम से जाना गया. क्योंकि इसके प्रथम अवशेष हड़प्पा नामक स्थान से प्राप्त हुए थे तथा आरम्भिक स्थलों में से अधिकांश सिन्धु नदी के किनारे अवस्थित थे.

History Of harappan civilization & Sindhu Sabhyata In Hindiसिन्धु सभ्यता का इतिहास | Sindhu Sabhyata History In Hindi

हड़प्पा या सिन्धु सभ्यता का जन्म व इतिहास (Origin & Discovery timeline Of harappan civilization & Sindhu Sabhyata In Hindi)

रेडियोकार्बन c-१४ विश्लेष्ण पद्धति द्वारा सिन्धु सभ्यता की सर्वमान्य तिथि २४००-१७०० ई.पू. मानी गई हैं. इस सभ्यता को प्राकप्रह्गेतिहासिक अथवा कास्य युग में रखा जा सकता हैं. इस सभ्यता के मुख्य निवासी द्रविड़ एवं भूमध्यसागरीय थे. सर्वप्रथम १९२१ में रायबहादुर दयाराम साहनी ने हड़प्पा नामक स्थान पर इसके अवशेष खोजे थे. इसके बाद १९२२ में राखाल दास बनर्जी ने मोहनजोदड़ों की खोज की. इन्ही खोजो के आधार पर १९२४ में भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण के डायरेक्टर जनरल जॉन मार्शल ने पूरे विश्व के समक्ष सिन्धु घाटी एक नवीन सभ्यता की खोज की घोषणा की.

हड़प्पा या सिन्धु सभ्यता के प्रमुख स्थल (Sites of Indus Valley Civilization In Hindi)

इस सभ्यता का विस्तार पंजाब, सिंध, बलूचिस्तान, गुजरात, राजस्थान, जम्मू और पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक था. यह सभ्यता सिंध और पंजाब में परिपक्व हुई, और वहां से यह दक्षिण और पूर्व की ओर फैली. इसका क्षेत्रफल मिस्र और मेसोपोटामिया की सभ्यता से बड़ा था. उत्तर में मांदा (जम्मू), दक्षिण में दाइमाबाद (अहमदनगर, महाराष्ट्र), पश्चिम में मकरान समुद्र तट सुत्कागेंडोर (बलूचिस्तान) उत्तर में आलमिपुर (मेरठ, उत्तर प्रदेश) इस सभ्यता का विस्तार था. सिन्धु सभ्यता का क्षेत्र त्रिभुजाकार था इसका क्षेत्रफल १२,९९,६०० वर्ग किमी था.

हड़प्पा या सिन्धु सभ्यता की नगर योजना (town planning of indus valley civilization pdf)

इस सभ्यता की महत्वपूर्ण विशेषता नगर योजना थी. नगरों में सड़के व मकान विधिवत बनाए गये थे. मकान पक्की ईटों के बने थे तथा सड़के सीधी थी. हड़प्पा शहरों की सबसे अनूठी विशेषताओं में एक नियोजित जल विकास प्रणाली थी. सड़को और गलियों को लगभग एक ग्रिड पद्धति में बनाया गया था. और फिर उनहें एक दूसरे को समकोण पर काटती थी.

ऐसा प्रतीत होता है कि नालियों के साथ गलियों को बनाया गया था और फिर उनके अगल बगल आवासों का निर्माण किया गया था. नालियाँ इंटों या पत्थरों से ढकी होती थी, इनके निर्माण में मुख्यतः इंटों और मोटारों का प्रयोग होता था. पर कभी कभी चूने और जिप्सम का प्रयोग भी मिलता हैं. सिन्धु घाटी की ईटे एक निश्चित अनुपात में बनती थी, वे अधिकाशः आयताकार थी, जिनकी लम्बाई चौड़ाई और मोटाई का अनुपात 4:2:1 था. घरों के दरवाजे और खिड़कियाँ सड़क की ओर न खुलकर पीछे की ओर खुलते थे.

स्नानागार प्रायः मकान के उस भाग में बनाये जाते थे, जो सड़क और गली के निकटतम होते थे. मोहनजोदड़ो में एक विशाल स्नानागार मिला हैं जो ११,५८ मीटर लम्बा, ७.०१ मीटर चौड़ा एवं २.४३ मीटर गहरा था, इस स्नानागार का उपयोग अनुष्ठानिक स्नान के लिए होता था. नगर दो भागों में विभाजित थे, एक छोटा लेकिन उंचाई पर बनाया गया दूसरा कही अधिक बड़ा लेकिन नीचे बनाया गया था. इन्हें क्रमशः दुर्ग और निचला शहर का नाम दिया गया हैं. दुर्ग की ऊँचाई का एक कारण यह था कि यहाँ भी भिन्न सरंचनाएं कच्ची ईंटो के चबूतरे पर बनी थी. दुर्ग को दीवार के घेरा गया था. जिसका अर्थ है कि निचले शहर को अलग किया गया था. दुर्ग में जन इमारते, खाद्य भंडार गृह महत्वपूर्ण कार्यशालाएं तथा धार्मिक इमारते स्थित थी. निचले भाग में लोग रहा करते थे.

हड़प्पा या सिन्धु सभ्यता का आर्थिक जीवन (economy of indus valley civilization In Hindi)

सैन्धव निवासियों के लिए जीवन का मुख्य उद्यम कृषि कर्म थी. सिन्धु तथा उसकी सहायक नदियाँ प्रतिवर्ष उर्वरा मिट्टी बहाकर लाती थी. तथा पाषाण व कास्य निर्मित उपकरणों की सहायता से खेती की जाती थी. यहाँ के प्रमुख खाद्यान्न गेहूं व जौ थे. यहाँ के किसान अपनी आवश्यकता से अधिक अन्न उत्पन्न करते थे. अतिरिक्त उत्पादन को नगरों में भेजते थे. नगरों में अनाज के भण्डारण के लिए अन्नागार बने होते थे.

फलों में केला, नारियल, खजूर, अनार, नीबू, तरबूज आदि का उत्पादन होता था. कृषि के साथ साथ पशुपालन का भी विकास हुआ था. कुबड़दार वृषभ का मुहरों पर अंकन बहुतायत मिलता हैं. अन्य पालतू पशुओं में बैल, गाय, भैस, कुत्ते, सूअर, भेड़, बकरी, हिरण खरगोश आदि थे. सुरकोटड़ा से प्राप्त अश्व अस्थि तथा लोथल और रंगपुर से प्राप्त अश्व की मर्णमूर्तियों के आधार पर अब यह निष्कर्ष निकाला जा रहा है कि सैन्धव निवासी अश्व से भी परिचित थे. ये हाथी तथा गैंडे से भी परिचित थे.

कृषि तथा पशुपालन के साथ साथ उद्योग एवं व्यापार भी अर्थव्यवस्था के प्रमुख आधार थे. वस्त्र निर्माण सिन्धु सभ्यता का प्रमुख उद्योग था. सूती वस्त्रों के अवशेषों से ज्ञात होता हैं कि यहाँ के निवासी कपास उगाना भी जानते थे. विश्व में सर्वप्रथम सिन्धु सभ्यता के निवासियों ने ही कपास की खेती प्रारम्भ की थी. इस सभ्यता के लोगों की मुहरें एवं वस्तुएं पश्चिम एशिया तथा मिस्र में मिली हैं, जो यह दिखाती हैं कि उन देशों के साथ इनका व्यापारिक सम्बन्ध था. अधिकाँश मुहरों का निर्माण सेलखड़ी से हुआ हैं.

हड़प्पा सभ्यता के लोग व्यापार में धातु के सिक्कों का प्रयोग नही करते थे. सारे आदान प्रदान वस्तु विनिमय द्वारा किया करते थे. सुमेर के लेखों से ज्ञात होता है कि उन नगरों के व्यापारी मेलुहा के व्यापारियों के साथ वस्तु विनिमय करते थे. मेलुहा आशय सिंध प्रदेश से ही था. विनिमय बाटों के द्वारा नियंत्रित था. ये बाट सामान्यतया चर्ट नामक पत्थर से बनाए जाते थे. और आमतौर पर ये किसी तरह के निशान से रहित घनाकार होते थे.

बाटों के निचले मापदंड द्वियाधारी (१,२,४,८,१६,३२ इत्यादि १२,८००तक) थे. जबकि ऊपरी दशमलव प्रणाली का अनुसरण करते थे. छोटे बाटों का प्रयोग संभवतः आभूषण और मनकों को तोलने के लिए किया जाता था. धातु के बने तराजू के भी पलड़े मिले हैं. लोथल हड़प्पाकालीन बन्दरगाह नगर था, यहाँ चावल उगाने के प्रमाण मिले हैं. सिन्धु सभ्यता के लोग यातायात के रूप में दो पहियों एवं चार पहियों वाली बैलगाड़ी तथा भैसगाड़ी का उपयोग करते थे.

हड़प्पा या सिन्धु सभ्यता के शिल्प तथा उद्योग धंधे (indus valley civilization art and craft)

कृषि तथा पशुपालन के अतिरिक्त यहाँ के निवासी शिल्पों तथा उद्योग धंधों में रूचि लेते थे. सिन्धु सभ्यता के निवासी धातु निर्माण उद्योग, आभूषण निर्माण उद्योग, बर्तन निर्माण उद्योग, औजार निर्माण उद्योग एवं परिवहन उद्योग से परिचित थे. भारत में चांदी सर्वप्रथम सिन्धु सभ्यता में पाई गई हैं. खुदाई में प्राप्त कताई बुनाई के उपकरणों से पता चलता है कि कपड़ा बुनना एक प्रमुख उद्योग था. चाक पर मिटटी के बर्तन बनाना, खिलौने बनाना, मुद्राओं का निर्माण करना, आभूषण एवं गुरियों का निर्माण करना आदि कुछ अन्य प्रमुख उद्योग धंधे थे.

इस काल में कुम्हार के चाक का खूब प्रचलन था और इसके म्रदभांड चिकने और चमकीले होते थे. लकड़ी की वस्तुओं से पता चलता हैं कि बढईगिरी का व्यवसाय होता हैं.

हड़प्पा या सिन्धु सभ्यता का सामाजिक जीवन (society of indus valley civilization)

हड़प्पा और सिन्धु घाटी के निवासियों का सामाजिक जीवन सुखी और सुविधापूर्ण था. व सामाजिक व्यवस्था का मुख्य आधार परिवार था. खुदाई से प्राप्त बहुसंख्यक नारी मूर्तियों से अनुमान लगाया जा सकता हैं कि उनका परिवार मातृसत्तात्मक था. समाज व्यवसाय के आधार पर अनेक वर्गों में विभाजित था. पुरोहित, व्यापारी, शिल्पकार और श्रमिक. हड़प्पा की खुदाई में अत्यंत विशाल और लघु मकान पास-पास मिले हैं, जो इस बात प्रमाण है कि धनी निर्धन का भेदभाव नही था.

सैंधव निवासी शाकाहारी और मांसाहारी दोनों प्रकार के भोजन करते थे. गेहूं, जौ, चावल, तिल तथा दाल उनके प्रमुख खाद्यान्न थे. सोनें, चांदी, हाथीदाँत, ताम्बें एवं सीप से निर्मित आभूषण जैसे कंठहार, कर्णफूल, हंसुली, भुजबंद तथा कड़ा आदि प्रचलन में था. जिन्हें स्त्री पुरूष समान रूप से पहनते थे. सिन्धु सभ्यता के निवासी आमोद प्रमोद के प्रेमी थे. जुआ खेलना, शिकार करना, नांचना, गाना बजाना आदि उनके मनोरंजन के साधन थे. पासा इस युग का प्रमुख खेल था.

मछली पकड़ना तथा चिड़ियों का शिकार करना नियमित क्रियाकलाप था. मिट्टी के अतिरिक्त सोने चांदी व ताम्बें से निर्मित बर्तनों का प्रयोग होता था. लघु मृणमुर्तिया- सिंधु घाटी में भारी संख्या में आग में पकी मिट्टी की मूर्तियाँ मिली हैं. इसका प्रयोग या तो प्रतिमाओं के रूप में होता था. यदपि नर और नारी दोनों की मूर्तियाँ मिली हैं, जिनमें नारी की मिट्टी की बनी मूर्तियों की संख्या अधिक हैं.

हड़प्पा या सिन्धु सभ्यता का धार्मिक जीवन (indus valley civilization Religion and Culture)

मातृ देवी के सम्प्रदाय का सेन्धव संस्करती में प्रमुख स्थान था मातृ देवी की ही भाति देवता की उपासना में भी बलि का विधान था. यहाँ पर पशुपतिनाथ लिग योनी वृक्षों व पशुओ की पूजा की जाती थी ये लोग भुत-प्रेत अन्धविश्वास व जादू-टोना पर भी विश्वास करते थे. मोहनजोदड़ो से प्राप्त एक मुहर पर पदमासन लगाए एक तीन मुख वाला पुरुष ध्यान मुद्रा में बैठा हुआ है, जिसके सिर पर तीन सिंग हैं. बाई और एक गैंडा तथा भैसा दाई और एक हाथी और बाघ हैं. आसन के नीचे दो हिरण बैठे हुए हैं. इसे पशुपति महादेव का रूप माना गया हैं.

हड़प्पा से पकी मिट्टी की स्त्री मुर्तिकाएं भारी संख्या में मिली हैं. एक मूर्तिका में गर्भ स्त्री के गर्भ से निकला पौधा दिखाया गया हैं, जिससे माना गया हैं कि धरती की उर्वरता की देवी माना जाता हैं. हड़प्पा में पशु पूजा का भी प्रचलन था. इसमें सबसे अधिक महत्व का हैं एक सींग वाला जानवर, जो गैंडा हो सकता है इसके बाद का महत्व वाला जानवर हैं कूबड़ वाला सांड. फाख्ता एक पवित्र पक्षी माना जाता हैं.

लोथल (गुजरात) और कालीबंगा (राजस्थान) के उत्खननों के परिणामस्वरूप कई अग्निकुंड एवं अग्निवेदिकाएं मिली हैं. वृक्ष पूजा भी प्रचलित थी, परन्तु सिन्धु सभ्यता में मन्दिर के प्रमाण नही मिले हैं. स्वास्तिक चिह्न सभवतः हड़प्पा सभ्यता की देन हैं. शवाधान: सामान्यतः मृतकों को कब्रों में दफनाया जाता था. कुछ कब्रों में मृदभांड व आभूषण मिले हैं. जों संभवतः एक ऐसी मान्यता की ओर संकेत करते हैं जिसके अनुसार इन वस्तुओं का म्रत्युप्रांत प्रयोग किया जा सकता था.

हड़प्पा या सिन्धु सभ्यता का राजनीतिक जीवन (Indus Valley Civilization Political System)

सिन्धु सभ्यता में राजनितिक संगठन का स्पष्ट अभाव था. यहाँ अस्त्र शस्त्रों का भी अभाव था. इन लोगों का ध्यान विजय की ओर उतना नही था, जितना वाणिज्य की ओर था. हड़प्पा का शासन संभवतः वणिक वर्ग के हाथों में था.

हड़प्पा या सिन्धु सभ्यता की लेखन कला (indus valley writing system)

दुर्भाग्यवश, अभी तक सिन्धु सभ्यता की लिपि को नही पढ़ा जा सका हैं. इस लिपि में कुल मिलाकर २५० से ४०० तक चित्राक्षर हैं और इसके चित्र के रूप में लिखा हर अक्षर किसी ध्वनी भाव या वस्तु का सूचक हैं. यह लिपि वर्णात्मक नही बल्कि चित्रलेखात्म्क हैं. यह लिपि प्रथम लाइन में दाएं से बाएँ तथा द्वितीय लाइन में बाएँ से दाएं लिखी गयी हैं. यह तरीका बॉस्टरोंफिडन कहलाता हैं.

हड़प्पा या सिन्धु सभ्यता का अंत (decline of harappan civilization indus valley In Hindi)

यह सिन्धु सभ्यता तकरीबन एक हजार साल रही. सिन्धु सभ्यता आंतरिक एवं बाह्य व्यापार के संतुलन पर आधारित थी. विभिन्न कारणों से यह संतुलन टूट गया तथा सभ्यता का पतन हो गया. इसके अंत के कारणों के बारे में इतिहासकार एकमत नही हैं और अलग अलग मत दिए जाते हैं जिनमें प्रमुख है जलवायु परिवर्तन, नदियों के जलमार्ग में परिवर्तन, आर्यों का आक्रमण, बाढ़, सामाजिक ढाँचे में बिखराव, भूकम्प आदि. सिन्धु सभ्यता के पतन का अर्थ सभ्यता की समाप्ति न होकर सभ्यता का रूप परिवर्तन हैं. बाद के काल में यह सभ्यता एक बार फिर से नगरीय चरण से ग्रामीण चरण पहुच गई.

हड़प्पा कालीन प्रमुख स्थल (list of indus valley civilization sites in hindi)

  • हड़प्पा- यह पाकिस्तान के मोंटगोमरी जिले में रावी नदी के तट पर स्थित था. १९२१ में दयाराम साहनी ने इस स्थल की खोज की. हड़प्पा से स्वास्तिक चिह्न प्राप्त हुआ है. हड़प्पा में छः अन्नागार मिले हैं जो ईंटो के बने चबूतरें पर दो पांतों में हैं. प्रत्येक की लम्बाई १५.२३ मीटर एवं चौड़ाई ६.०९ मी हैं. यहाँ फर्श की दरारों में गेहूं और जौ के दाने मिले हैं. हड़प्पा में दो कमरे वाले बैरक मिले है जो कि श्रमिकों के रहने के लिए बने थे. यहाँ से प्राप्त मोहरों पर सबसे अधिक टंकन श्रंगी पशु का हैं.
  • मोहनजोदड़ो (मृतकों का टीला)– यहाँ एक मुहर मिली हैं जिस पर पशुपति अंकित हैं यहाँ एक विशाल स्नानागार मिला हैं. मोहनजोदड़ो लो सबसे बड़ी इमारत अन्नागार है जो कि ४५.७१ मी लम्बा एवं १५.२३ मीटर चौड़ा हैं. एक अन्य मुहर पर कूबड़ वाले बैल की आकृति बनी हुई हैं. यहाँ से सीप का पैमाना, कांसे की नृत्यांगना नारी की मूर्ति, सूती वस्त्र के साक्ष्य, घोड़े के अस्तित्व का संकेत प्राप्त हुआ हैं.
  • कालीबंगा (काले रंग की चूड़ियाँ)– कालीबंगा में जूते हुए खेत के साक्ष्य मिले है, जहाँ दो अलग अलग फसलें उगाई जाती थी, यहाँ पर जल निकास प्रणाली का अभाव मिलता हैं. यहाँ युगल शवाधान का प्रमाण मिलता हैं. यहाँ के मकानों में एक पल्लेवाला दरवाजा लगा हैं. कालीबंगा में अलंकृत ईंटें एवं अग्निकुंड भी प्राप्त हुए हैं.
  • लोथल- इसे लघु हड़प्पा ता लघु मोहनजोदड़ो भी कहा जाता हैं. यह हड़प्पा कालीन बंदरगाह नगर था. यहाँ चावल उपजाने के अवशेष पाए गये हैं यहाँ से अन्न पीसने की चक्की, युगल शवाधान के साक्ष्य, फारस की मुहरें, नाव के साक्ष्य, अग्निवेदी के प्रमाण, हाथीदांत का पैमाना आदि भी प्राप्त हुए हैं. लोथल में एक चित्रित म्रदभांड मिला हैं जो पंचतन्त्र की कहानी चालाक लोमड़ी की याद दिलाता हैं.
  • चन्हूदड़ों- चन्हूदड़ों सिन्धु सभ्यता एवं संस्कृति के बाद झुकर और झांगर संस्कृति विकसित हुई. यहाँ मनके बनाने का कारखाना, लिपस्टिक, एक इंट पर बिल्ली का पीछा करते हुए कुत्ते के पैर के निशाँ, गुडिया बनाने का कारखाना आदि प्राप्त हुए हैं. चन्हूदड़ों में वक्राकार ईंटें व कास्य की बैलगाड़ी एवं इक्कागाड़ी के अवशेष भी प्राप्त हुए हैं.
  • रंगपुर- यह गुजरात के मादर नदी के तट पर अवस्थित था. यहाँ धान की भूसी का साक्ष्य एवं कच्ची ईंटों का दुर्ग मिला हैं.
  • धौलावीरा- यहाँ से हड़प्पा संस्कृति के उत्थान और पतन के साक्ष्य साथ साथ मिले हैं. यह भारत में सबसे बड़ा हड़प्पा कालीन स्थल (largest site of indus valley civilization) हैं.

आशा करता हूँ मित्रों सिन्धु सभ्यता का इतिहास में दी गई जानकारी आपकों अच्छी लगी होगी. Sindhu Sabhyata History In Hindi में हमने सभ्यता के जन्म से लेकर लोगों के जीवन तथा सभ्यता के विस्तार व पतन मुख्य स्थलों के बारें में आपकों विस्तृत जानकारी दी हैं, यदि आपकों हमारा यह लेख अच्छा लगा हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करे.


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