Smartphone’s Side Effect Danger For Eyes | स्मार्टफोन ले सकती है आपकी आँखों की रोशनी

Smartphone’s Side Effect Danger For Eyes:  क्या रात को सोने से पहले और सुबह उठने के बाद आप अपने Smartphone को चेक करते है? अगर इस सवाल का जवाब हाँ है तो आपको सावधान हो जाने की जरूरत है, क्योंकि हो सकता है जिस Smartphone को आप रात के अँधेरे में यूज़ कर रहै है उसने सुबह होने तक आपकी आँखों की रौशनी को अस्थाई तौर पर खत्म कर दिया हो. वैज्ञानिक और Doctor इसे Smart Phone Blindness कहते है. यह तब होती है जब अँधेरे में कोई व्यक्ति अपना Smartphone चेक करता है और ऐसा करते वक्त आपकी एक आँख ढकी हुई हो और दूसरी खुली हो तो आप अस्थाई तौर पर अंधे हो सकते है.

Smartphone’s Side Effect Danger For Eyes Smartphone आँखों के लिए खतरा

दो महिलाओं का अँधा होना

डॉक्टरों द्वारा की गई रिसर्च में 22 वर्ष और 40 वर्ष की दो महिलाओं का जिक्र था, जो एक आँख से दिखाई ना देने की शिकायत लेकर Doctor के पास पहुंची थी. शुरुआत में Doctor इसे किसी और बीमारी का लक्षण मानते रहै, लेकिन कई तरह के स्कैन और जांच करने के बाद  भी Doctor किसी नतीजे पर पहुँच नहीं पाए. इसके बाद उन दोनों मरीजों से Smartphone इस्तेमाल करने की आदत के बारे में पूछा गया. दोनों महिलाओं ने Doctor को बताया की वे रात को अपने बेडरूम की लाइट ऑफ करने के बाद अपना Smartphone चेक किया करती थी. ऐसा करते वक्त उनकी एक आँख तकिये से ढकी रहा करती थी. जबकि दूसरी आँख से वो Mobile Phone चेक किया करती थी.

डॉक्टरों की रिसर्च (Doctor’s Research)

डॉक्टरों ने पता लगाया की जब कोई व्यक्ति अँधेरे में एक आँख से Smartphone से निकलने वाली Artificial रौशनी की तरफ देखता रहता है तो उसे आँख से दिखाई देना बंद हो जाता है. यह परेशानी रात में भी हो सकती है और सुबह उठने के बाद भी Smart Phone Blindness की वजह से प्रभावित आँखों की रौशनी करीब 15-20 मिनट तक जा सकती है. हमारी आँखों का रेटिना बहुत संवेदनशील होता है. रौशनी से अँधेरे में जाने पर या अँधेरे से रौशनी में आने पर रेटिना खुद को Adjest करता है. अँधेरे से निकलकर रौशनी में आने के बाद आँखों को पूरी तरह संवेदनशील होने में 5-7 मिनट लग जाते है. जबकि रौशनी से अँधेरे में जाने के बाद आँखों को पूरी संवेदनशीलता हासिल करने में 30-40 मिनट लग जाते है. ज्यादा Brightness वाले मोबाइल फोन को देर रात तक देखने के बाद आँखों को अँधेरे के लिए Adjest होने में और भी ज्यादा वक्त लग जाता है.

आँखों के बारे में (About Eyes)

आपकी आँखे दरअसल जो भी देखती है वो आँखों तक उलटे आकार में पहुँचता है. लेकिन आपका दिमाग उस दृश्य या तस्वीर को सीधा कर देता है यानी आपका दिमाग आँखों की मदद ना करे तो आपको पूरा DNA और लोग उलटे ही दिखाई देंगे. जो भी दृश्य आप देखते है वे रेटिना तक दो बराबर हिस्सों में पहुँचती है और बिखरी हुयी होती है. आपका दिमाग तस्वीरों के दोनों हिस्सों को जोड़ देता है और एक पूरी तस्वीर आपके सामने होती है.

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