बाल गंगाधर तिलक जयंती पर भाषण – Speech on Bal Gangadhar Tilak Jayanti in Hindi

बाल गंगाधर तिलक जयंती पर भाषण – Speech on Bal Gangadhar Tilak Jayanti in Hindi: 23 जुलाई 2019 के दिन भारत के दो सपूतों ने जन्म लिया था, एक थे चंद्रशेखर आजाद एवं दुसरे थे लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक. आज  हमारा लेख Bal Gangadhar Tilak Jayanti in Hindi लोकमान्य तिलक पर स्पीच भाषण निबंध और उनकी बर्थ एनिवर्सरी जन्म दिन जयंती पर Bal Gangadhar Tilak Jayanti Par Bhashan यहाँ दिया गया हैं. सबसे पहले एक भारतीय नागरिक होने के नाते इस महान स्वतंत्रता सेनानी को हम श्रद्धापूर्वक  नमन करते हैं.

बाल गंगाधर तिलक जयंती पर भाषण – Speech on Bal Gangadhar Tilak Jayanti in Hindi

बाल गंगाधर तिलक जयंती पर भाषण - Speech on Bal Gangadhar Tilak Jayanti in Hindi

1990 और 20 वीं सदी के प्रथम दशक भारत के स्वतंत्रता आन्दोलन को वैचारिक मजबूती तथा   ब्रिटिश साम्राज्य के  विरुद्ध व्यापक जन आन्दोलन की प्रष्टभूमि तैयार करने वाले देशभक्त थे लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक. हिन्दू राष्ट्रवाद के जनक सच्चे समाज सुधारक, अधिवक्ता एवं गीता सार जैसी आध्यात्म ज्ञान के धनी तिलक का जन्म महाराष्ट्र के रत्नागिरी में एक छोटे ब्राह्मण परिवार में हुआ था. 23 जुलाई, 1856 को पिता गंगाधर रामचन्द्र तिलक के यहाँ इनका जन्म हुआ था बचपन में इन्हें बाल तिलक अथवा केशव गंगाधर तिलक के नाम से जाना जाता था. बालपन में तिलक के दादाजी इन्हें 1857 की क्रांति की वीर कहानियां सुनाया करते थे, आठ साल के होते होते तिलक ने संस्कृत भाषा में प्रवीणता पा ली.

कानून में करियर बनाने के उद्देश्य से इन्होने 1879 में कानून की पढ़ाई पूरी की, मगर अंग्रेजी हुकुमत द्वारा भारत पर ढहाए जा रहे अत्याचारों को सहन करना उनके स्वभाव में नहीं था. 90 के दशक में वे कांग्रेस में शामिल हुए तथा महासचिव भी रहे, उनके विचारों का पार्टी पर व्यापक असर पड़ा, परिणामस्वरूप 1907 को सूरत में कांग्रेस गरम दल व नरम दल में विभाजित हो गई, तिलक गरम दल के मुख्य नेता था इनके साथ विपिनचंद्र पाल और लाला लाजपत राय भी थे. स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा नारे के आव्हान के साथ ही बाल गंगाधर तिलक अंग्रेजी हुकुमत के समक्ष विरोधी बनकर प्रस्तुत हुए, उन्होंने समाज संगठित करने के लिए शिवाजी व गणेश उत्सव शुरू किये तथा मराठा व केसरी नामक पत्रों के जरिये समाज को जागृत करते रहे.

उन्होंने हिन्दू समाज में शिक्षा के प्रचार के लिए दक्कन शिक्षा सोसायटी की नींव रखी, पाश्चात्य विचारों एवं अंग्रेजी के प्रबल विरोधी बाल गंगाधर तिलक ने बाल विवाह को रोकने तथा विधवा विवाह को सामाजिक स्वीकृति की दिशा में काम किया, वर्ष 1908 में राजद्रोह के केस में तिलक को मांडले जेल में बंद कर दिया, जहाँ उन्होंने गीता सार पुस्तक लिखी, 1 अगस्त, 1920 के दिन इस वीरात्मा का देहावसान हो गया, उनके विचार आज भी हमारे देश के लिए प्रेरक हैं तिलक राष्ट्रवादी के दिलों में जिन्दा हैं.

# Bal Gangadhar Tilak Jayanti Speech in Hindi

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