Speech On Guru Purnima In Hindi | गुरु का महत्व पर निबंध

Speech On Guru Purnima In Hindi -गुरु पूर्णिमा एक भारतीय पर्व हैं, जो हजारों सालों से मनाते आ रहे हैं, हिन्दू सिख और बोद्ध धर्म अनुयायी इसे हर्षोल्लास से मनाते हैं, महाभारत के रचनाकार और आदि गुरु वेद व्यास जी की जन्म तिथि पर गुरु पूर्णिमा का त्यौहार आधारित हैं. हिन्दू कैलेंडर के मुताबिक आषाढ़ महीने की पूर्णिमा को यह पर्व मनाया जाता हैं.

प्रत्येक इंसान के जीवन में मार्गदर्शक (शिक्षक, गुरु) का महत्वपूर्ण स्थान होता हैं, जिन्हें भगवान् के समकक्ष समझा जाता हैं. इसी गुरु शिष्य परम्परा को आगे बढ़ाते हुए, अपने गुरुजनों का मान सम्मान कर इस त्यौहार को मनाया जाता हैं.

Guru Purnima Speech In Hindi

गुरु शब्द दो शब्दों के संयोग से बना हैं, गु+रु जिनमे गु का अर्थ अन्धकार और रु से आशय उजाला होता हैं.

इन्ही पावन शब्दों के मेल से बनने वाला गुरु शब्द हमे अन्धकार रूपी जीवन से निकालकर उजाले की ओर ले जाता हैं.

इस दिन देशभर में अलग-अलग तरीके से अपने गुरुजन को सम्मानित किया जाता हैं,

कही पूजा पाठ तो कही मेले. शिक्षण संस्थाओ में नन्हे मुन्ने बालक अपने गुरुजनों के सम्मान में कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन कर अपने गुरूजी को गुरु दक्षिणा में अपने सामर्थ्य के मुताबिक़ उपहार भेट करते हैं.सभी धर्मों में अपने-अपने पूजा स्थल पृथक हो सकते हैं.

मगर गुरु को धर्म की सीमाओं में नही बाधा जा सकता हैं.

गुरु किसी भी धर्म से हो सकता हैं.

सभी धर्मो से उपर उठकर एकता और भाईचारे का संदेश हमे गुरु ही तो देता हैं.

गुरु कोई भी हो सकता हैं, आपके बड़े भाई पिताजी या प्राथमिक शाला के शिक्षक भी, गुरु का अर्थ मात्र पुस्तक में लिखी बात को सुनाने वाला भर नही, बल्कि गुरु तो वह हैं, जो अपने शिष्य को जीवन में आगे बढ़ने की सही राह बताए. गुरु पुर्णिमा की परम्परा उस समय से चली आ रही हैं,

जब आज कि तरह पढने के लिए विद्यालय नही हुआ करते थे.

बालक पढने के लिए गुरुकुल जाया करते थे.

एक निश्चित समयावधि में अपनी शिक्षा पूरी करने बाद वे आज ही के दिन गुरु पुर्णिमा को ही अपनी श्रद्धा के अनुसार गुरु को गुरु दक्षिणा देकर गृह प्रस्थान करते थे.

आज हम सदियों पुरानी एक परम्परा के सारथी हैं,

गुरुजी हमारे लिए भगवान , अल्लाह,ईश्वर, रब,गॉड से भी बढ़कर हैं,

क्युकि इन्होने ही तो हमे इनकी पहचान कराई हैं. दुनिया के इस ढंग से परिचित करवाया हैं.

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शिर्डी वाले साई बाबा

साई बाबा यह नाम तो शायद ही कोई होगा, जो नही जानता.

शिर्डी के सच्चे दरबार हर कोई भक्त अपने जीवनकाल में एक बार दर्शन अवश्य करना चाहता हैं.

अपने जीवन काल में साईं बाबा मात्र एक फक्कड थे और भगवान् की भक्ति किया करते थे.

उनके परिवार वालों को भी साईं से कोई विशेष लगाव नही था.

जब साईं बाबा ने योग धारण किया तब वे महाराष्ट्र के शिर्डी नामक गाँव में आकर रस-बस गये.

इंतकाल तक वे यही रहे.

15 अक्टूबर 1918 शिर्डी के इस बाबा का देहांत हो गया था.

Shirdi Sai Baba के मन्दिर हर वर्ष आषाढ़ की गुरु पूर्णिमा को विशाल मेला भरता हैं,

देश विदेश से लाखों यात्री गुरु पूर्णिमा के ही दिन साईं का दर्शन करते हैं.

अपनी म्रत्यु के बाद उन्होंने कई चमत्कार दिखाए.

जिनसे आधुनिक युग के लोगों में भी साईं बाबा के प्रति श्रद्धा और भक्ति की अटूट भावना पैदा हो गईं.

कई दशक पहले राज्य में फैली महाबिमारी से Shirdi Sai Baba ने ही तो असंख्य की जान बचाई थी.

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