Speech On Hindi Diwas In Hindi Language | हिंदी दिवस पर स्पीच भाषण

Speech On Hindi Diwas In Hindi Language: आप सभी को हिंदी दिवस 2018- Hindi Diwas की शुभकामनाएं. हर साल राष्ट्रभाषा हिंदी के उत्थान व प्रोत्साहन के लिए 14 सितम्बर को हिंदी दिवस मनाया जाता हैं. Speech On Hindi Diwas & Hindi Diwas Speech In Hindi उन विद्यार्थियों के लिए तैयार किया गया हैं. जो अपनी स्कूल में आयोजित हिंदी डे पर भाषण देना चाहते हैं. आप हमारे इस लेख की मदद से एक बेहतरीन हिंदी दिवस पर भाषण को तैयार कर सकते हैं. सही मायनों में इस दिन को मनाने का उद्देश्य लोगों द्वारा अपनी मातृभाषा के प्रति सम्मान दर्शाते हुए इसे स्वेच्छा के साथ  अपनाना हैं.

Speech On Hindi Diwas In Hindi Language | हिंदी दिवस पर स्पीच भाषण Speech On Hindi Diwas In Hindi Language | हिंदी दिवस पर स्पीच भाषण

हिंदी दिवस कविता व भाषण (Hindi Diwas Speech 2018 In Hindi)

हिंदी की लौ को कभी बुझने न देना,
फिर नही बजेगा डंका, ढोल और नगाड़ा
सुन लो, जान लो, समझ लो इत्मिनान से

हिंदी की लौ को कभी बुझने न देना,
हम सबका है ये सम्मान, इसे न झुकने देना
चश्मदीद ये रही है, कितनी ही सदी की
दामन पर कभी इसके, धब्बा लगने न देना

हिंदी की लौ को कभी बुझने न देना,
आजादी मिली हैं, हमें इसी फूल की बदौलत
इस फूल को जीते जी, कभी मुरझाने न देना

हिंदी की लौ को कभी बुझने न देना,
इसने ही सिखाया, पाठ प्रेम और मौहब्बत का
लालच की खातिर इसको, नयनों से गिरने न देना
हिंदी की लौ को कभी बुझने न देना,

Speech On Hindi Diwas In Hindi

इसी संक्षिप्त हिंदी दिवस की कविता के साथ ही मैं अपना Speech Hindi Diwas हिंदी दिवस स्पीच आरम्भ करने जा रहा हूँ.

आज के समय में हिंदी भारत की राजभाषा हैं. राजभाषा का अर्थ हैं- राज्य के कामकाज में प्रयुक्त होने वाली भाषा. किसी भी राष्ट्र अथवा राज्य में सुचारू कामकाज के लिए उसकी राजभाषा का निर्धारण किया जाता हैं. भारतीय संविधान में राजभाषा से सम्बन्धित जितने भी उपबध बनाए गये हैं, उतने बहुत कम देशों के संविधान में देखने को मिलते हैं.

इसका कारण यह है कि हर देश में एक बड़े तबके की मुख्य भाषा को ही उस राष्ट्र की राष्ट्रभाषा स्वीकार कर लिया जाता हैं. वही भाषा उस देश के राजकाज की भाषा भी बन जाती हैं. इसलिए उन्हें अलग से राजभाषा का प्रावधान करने की आवश्यकता भी नही रहती हैं.

मगर जिस देश में एक से अधिक बड़े समुदाय हो अथवा कोई एक भाषा सर्वमान्य नही होती हैं उस स्थिति में वहां दो या दो से अधिक राजभाषाओं का प्रबंध किया जाता हैं, ताकि किसी तरह की समस्या का सामना नही करना पड़े. यही भारतीय संविधान की व्यवस्था भी हैं ह्मारे देश के संविधान ने 22 प्रांतीय भाषाओं को राजभाषा का दर्जा दिया हैं. तथा संविधान में राजभाषा के सम्बन्ध में एक अलग से अध्याय भी बनाया गया हैं.

भारत के संविधान निर्माण के समय जब राजभाषा का विषय आया तो अधिकतर लोग हिंदी को भारत की राजभाषा यानि एक ही राष्ट्रभाषा बनाने के पक्ष में थे. मगर इसका विरोध करने वालों की संख्या भी काफी थी. अतः निष्कर्ष के रूप में एक समन्वयित सूत्र को अपनाया गया.

भारत के संविधान में यह व्यवस्था की गई कि भारत के संघ की भाषा हिंदी होगी तथा इसकी देवनागरी लिपि होगी, साथ ही गणतन्त्र बनने के बाद यह घोषणा की गई कि आगामी 15 वर्षों तक हिंदी के साथ साथ अंगेजी भी भारत की राजभाषा रहेगी. इसके पश्चात सम्पूर्ण शासन तन्त्र को हिंदी में तब्दील कर दिया जाएगा.

किन्तु जब यह अवधि पूर्ण होने लगी तो भारत के कई राज्यों में हिंदी का विरोध होने लगा तथा सरकार द्वारा अंग्रेजी को फिर अनिश्चित काल के लिए आगे बढ़ा दिया जो आज तक चली आ रही हैं.

राजभाषा अधिनियम 1963 लाने के साथ ही सरकार की मंशा साफ़ हो गई कि वह हिंदी को सम्मान दिलाने की बजाय अंग्रेजी को इस तन्त्र की भाषा बनाना चाहती हैं. इस अधिनियम के द्वारा सभी राज कार्यों के लिए अंग्रेजी को अनिवार्य कर दिया तथा हिंदी को स्वेच्छा की श्रेणी में रख दिया. कि जो राज्य केंद्र के साथ पत्र व्यवहार हिंदी में करने के लिए बाध्य नही है यह उनकी स्वेच्छा है मगर अंग्रेजी अनिवार्य कर दी गई.

कई महत्वपूर्ण आदेश एवं लेख जैसे प्रस्ताव, सामान्य आदेश, अधिसूचना, नियम, प्रेस विज्ञप्ति, प्रशासकीय रिपोर्ट, लाइसेंस, परमिट एवं समझोते हिंदी व अंग्रेजी दोनों भाषाओं में दिए जाएगा.

Note: आपके पास Speech On Hindi Diwas In Hindi Language मैं और information हैं। या दी गयी जानकारी मैं कुछ गलत लगे तो तुरंत हमें कमेंट और ईमेल मैं लिखे हम इस अपडेट करते रहेंगे।

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