Speech On Independence Day In Hindi In School For Students & Teachers

Speech On Independence Day In Hindi In School For Students & Teachers: 15 अगस्त आ रहा हैं, जब भारत अपने 73 वें स्वतंत्रता दिवस को मना रहा होगा. 15th august speech for school children बच्चें इस दिन स्कूल में आयोजित स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के लिए भाषण निबंध, काव्य पाठ की तैयारी में पूर्व से ही लग गये हैं. Independence Day In Hindi In School के इस हिंदी आर्टिकल की मदद से कक्षा 1,2,3,4,5,6,7,8,9,10 के विद्यार्थी विद्यालय के मंच पर जाकर 15 अगस्त पर सुंदर भाषण प्रस्तुत कर सकते हैं.कई स्थानों पर आजादी उत्सव के दिन निबंध भाषण प्रतियोगिताओं का आयोजन करवाया जाता हैं.

Speech On Independence Day In Hindi In School

Speech On Independence Day In Hindi In School

स्वतंत्रता दिवस पर भाषण – indian independence day speech for school children

हमारा भारत वर्ष अंग्रेजों की पराधीनता से लम्बे संघर्ष के पश्चात 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्र हुआ था, इसलिए इस दिन को यादगार बनाने के लिए हम हर साल 15 अगस्त के दिन स्वतंत्रता दिवस (इंडिपेंडेंस डे) मनाते हैं. भारत की करोड़ों जनता के लिए यह दिन सदियों बाद आया था, जब वे खुले वातावरण में पूर्ण स्वतंत्रता के साथ श्वास ले सकते थे.

वर्षों की आश जब एक दिन पूरी हो तो मन की प्रफुल्लता का वर्णन किया जाना सम्भव नहीं होता हैं, स्वतंत्रता दिवस भारतीयों के लिए वैसा ही मधुर अनुभव लेकर आया था, जब समूचा देश गुलामी की बेड़ियों को तोड़कर अपनी एक राह पर चला था, इस दिन देश के प्रथम प्रधानमंत्री ने लाल किले से तिरंगा फहराकर ऐतिहासिक भाषण दिया था. जब समूचा विश्व सो रहा था तो भारत के लोग आजादी की पहली भौर की तरफ टकटकी नजरों से देख रहे थे.

आज हमारे देश की आजादी को मिले 73 साल हो गये हैं. एक तरफ इंडिपेंडेंस डे हमें आजादी प्राप्ति के अभियान में जान आहूत करने वाले अमर शहीदों की याद दिलाता हैं तो हमें इस बात का भी एहसास कराता हैं कि इन सात दशकों में हमने क्या पाया और क्या खोया. क्या हम उस भारत का सपना पूरा कर पाए हैं जिसका सपना सजोये हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने लहू का एक एक कतरा भारत भूमि को आजाद कराने के लिए लगा दिया था.

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‘स्वतंत्रता हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है’ और ‘पराधीन सपनेहु सुख नाही’ जैसे स्लोगन हमें स्वतंत्रता के महत्व की याद दिलाते हैं. हमें उस ईश्वर को धन्यवाद देना चाहिए जिन्होंने इंडिपेंडेंस भारत में हमें जन्म दिया. हर प्राणी को स्वतंत्रता सर्वाधिक प्रिय वस्तु होती हैं, फिर हमारे पूर्वजों ने गोरी सरकार के दवाब में उनके आदेशों की पालना में जीवन कैसे जिया होगा, इसका सटीक अनुमान लगाना भी कठिन हैं.

व्यापार के निमित्त भारत आने वाले अंग्रेजों ने आपस में फूट डालो और राज करो की नीति को अपनाते हुए भारत को लगभग 200 वर्षों तक गुलाम बनाए रखा. भारत के लोगों की धन संपदा को ब्रिटेन ले जाया जाने लगा, आम जीवन कष्टों और वेदनाओं के पीड़ित था ऐसे में भारत के क्रांतिकारियों ने समाज को संगठित कर अंग्रेजों के खिलाफ सौ वर्ष तक लम्बी लड़ाई मिली जिसके नतीजे में 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हो गया.

भारत को इंडिपेंडेंस न मिली और ना ही दी गई बल्कि देश के जागृत देशभक्तों ने अपने जान की बाजी लगाकर अंग्रेजों से लोहा लेकर उनसे अपने हक की आजादी को छिना गया. 14-15 अगस्त की मध्य रात्रि को पंडित जवाहरलाल नेहरु ने लाल किले की प्राचीर से तिरंगा फहराकर स्वतंत्रता दिवस [इंडिपेंडेंस डे ] की परम्परा को शुरू किया जो आज तक चली आ रही हैं. भारत को फ्रीडम तो मिली मगर विभाजित भारत के दंश के साथ.

आज स्वतंत्र भारत के नागरिक होने के नाते हमारा कर्तव्य बनता हैं, कि हम अतीत की भूलों को समझे तथा भविष्य में उन गलतियों को न करते हुए भारत को विकास के पथ पर ले जाए, एक ऐसा विकास मॉडल हमारे देश में लाया जाए जिसका केंद्र बिंदु आम आदमी हो, तभी सच्चे अर्थों में फ्रीडम और इंडिपेंडेंस डे को मनाने का उद्देश्य सार्थक हो पाएगा.जय हिन्द जय भारत

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