Speech on Raksha Bandhan in Hindi 2020 | रक्षा बंधन पर भाषण स्पीच

आपका स्वागत है, आज हम Speech on Raksha Bandhan in Hindi 2020 रक्षा बंधन पर भाषण स्पीच शेयर कर रहे है. आगामी 3 अगस्त 2020 को भारत में रक्षाबंधन का पवित्र त्यौहार मनाया जा रहा है. इस अवसर पर हम आपके साथ राखी का महत्व, इतिहास, परम्परा, मान्यता आदि पर आधारित शोर्ट निबंध, एस्से अनुच्छेद, भाषण प्रस्तुत कर रहे है. रक्षा के ऊपर दिया गया स्पीच कक्षा (class) 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10th के स्टूडेंट्स के लिए अति उपयोगी होगा.

Speech on Raksha Bandhan in Hindi 2020 रक्षा बंधन पर भाषण स्पीच

Speech on Raksha Bandhan in Hindi 2020 रक्षा बंधन पर भाषण स्पीच

प्रिय दोस्तों रक्षाबंधन एक महत्वपूर्ण भारतीय त्यौहार है. खासकर स्कूल में पढने वाले छात्र छात्राओं को स्कूल में आयोजित राखी के पर्व पर अथवा अपने परीक्षा के पर्चे में रक्षा बंधन उत्सव पर भाषण (Raksha Bandhan Speech) लिखने या  बोलने को कहा जाता है. अतः आप इस शोर्ट स्पीच को अपने अनुसार बनाकर अथवा हुबहू याद करके भी प्रस्तुत कर सकते हैं.

Raksha Bandhan Speech in Hindi 2020 रक्षा बंधन पर छोटा सुंदर भाषण

सभी को नमस्ते और प्रणाम, आज रक्षा बंधन का दिन हैं और हम इस त्यौहार को मनाने बाबत यहाँ एकत्रित हुए हैं. मैं …………. कक्षा ….. का छात्र छात्रा आज आपके समक्ष भाई बहिन के रिश्ते का पावन पर्व जो प्रेम का परिचायक हैं, बहिन का रक्षा का प्रण दिलाता हैं ऐसे राखी के उत्सव पर चार शब्द बोलने की अनुमति चाहता हूँ.

रक्षा बंधन भारत के प्राचीनतम पर्वों में से एक हैं यह श्रावण माह की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता हैं. सदियों से इसी दिन को हम राखी का पर्व मनाते आए हैं. इस दिन बहिनों द्वारा अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा जाता हैं. राखी का धागा भाई के प्रति बहिन के प्रेम एवं सम्मान का प्रतीक माना जाता हैं. राखी बांधते समय बहिन ईश्वर से भाई की लम्बी आयु की कामना करती हैं तथा तिलक लगाकर मुहं मीठा करती हैं.

भाई भी बदले में बहिन को रक्षा का वादा करता हैं. जीवन में किसी कठिनाई समस्या में वह अपनी बहिन के साथ खड़ा होकर उसे उससे निजात दिलाने की बात कहता हैं. जब बहिन अपने घर को विदा होती है तो भाई बहिन को उपहार कपड़े मिठाई आदि देता हैं.

भारत के रक्षाबंधन की परम्परा का धीरे धीरे वैश्विकरण हो रहा हैं. हम जानते है हमारे लाखों भारतीय भाई बहिन रोजगार आदि अन्य कारणों से अन्य देशों में सपरिवार बसते हैं. वे भी रक्षा बंधन के पर्व को अपने मित्रों, पड़ोसियों, क्लिंग्स आदि के साथ मनाते हैं. इस तरह धीरे धीरे दुनिया भर में भारतीय संस्कृति का प्रसार प्रचार में राखी जैसे पर्व भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को रक्षा बंधन का उत्सव देशभर में मनाया जाता हैं. विभिन्न क्षेत्रीय मान्यताओं और लोक परम्परा के अनुसार इसके विविध रूप भारत में ही देखने को मिलते हैं. रक्षा पर्व का सीधा सम्बन्ध भाई द्वारा बहिन की रक्षा के प्रण का पुनः स्मरण हैं. प्रत्येक साल वह अपने दायित्व को पुनः याद कर उस पर खरा उतरने का प्रयास करते हैं. भाई तथा बहिन के रिश्ते की पहचान इस पर्व को माना जाता हैं. रक्षा बंधन मनाने के पीछे बड़ा धार्मिक एवं एतिहासिक महत्व भी जुड़ा है.

लक्ष्मीजी ने बांधी थी राजा बलि को राखी: .धरती के शक्तिशाली एवं क्रूर शासक बलि ने देवलोक पर अधिकार करने की तैयारी कर ली थी, वह अपने अभियान में सफलता के लिए यज्ञ करवा था. जिसके सम्पन्न होने के साथ ही देवलोक पर राजा बलि का आधिपत्य होने वाला था. इंद्र भागे भागे विष्णु जी के पास गये और उन्हें वामन अवतार के रूप लेकर धरती पर जाने को कहा गया,

वामन के वेश में विष्णु ने राजा बलि से तीन पग जमीन दान में मांगी. बलि ने अहंकार वंश स्वीकृति दे दी. वामन भगवान ने अपने तीन पग में जमीन, पाताल और आकाश नाप डाला. अपने बचन के मुताबिक़ बलि ने वह दान दे दिया साथ ही विष्णु जी को हर पल उसके समक्ष रहने का वरदान ले लिया, लक्ष्मी जी इससे चिंतित हो उठी और नारद के साथ वह राखी लेकर गई और बलि को अपना भाई बनाकर उसकी आज्ञा से अपने पति को ले आई.

रक्षा बंधन की दो कहानियां भगवान कृष्ण से जुड़ी हुई हैं. महाभारत में उन्होंने युधिष्ठिर से राखी पर्व मनाने को कहा था. रक्षा सूत्र की शक्ति से पांडवों की सेना की रक्षा होगी. एक अन्य कथा के अनुसार शिशुपाल का वध करते समय भगवान कृष्ण को तर्जनी अंगुली में चोट आ गई थी. उस समय द्रोपदी ने अपनी साड़ी का पल्लू फाड़कर ऊँगली पर बाँध दिया था, उस दिन भी श्रावण पूर्णिमा का दिन था. ऐसा कहा जाता हैं तभी से इस दिन को रक्षा बंधन के रूप में मनाया जाता रहा हैं.

बहरहाल रक्षा बंधन के पर्व की शुरुआत को लेकर जो भी मान्यता रही हो, सदियों से भाई अपनी बहिन की रक्षार्थ जीवन का बलिदान देते आए हैं. भारतीय संस्कृति की यह परम्परा आज भी उसी रूप में हैं. राखी का अर्थ मात्र एक रेशम के धागे तक सिमित हो चूका हैं, हम अपने समाज में नित्य ऐसी घटनाओं को सुनते हैं जो निश्चय ही हमारे समाज को कलंकित करने वाली हैं.

आज भी कई ऐसे भाई ऐसे है जिनकी बहिनों ने संसार नहीं देखा उससे पूर्व ही माँ बाप में उन्हें मार डाल. कुछ ने जन्म लिया तो समाज में भूखे भेडियों ने उन्हें नोच कर मार डाला. ऐसे गिद्द् हमारे बीच ही जीते हैं. मगर कई बार हम उनकी पहचान नहीं कर पाते है अथवा सब कुछ जानते हुए भी चुप रह जाते हैं और एक दिन हमारी कायरता का परिणाम किसी बहिन बेटी को अस्मत लुटाकर चुकाना पड़ता हैं.

हमारा देश और समाज कानून से चलता हैं मगर कानून तभी सही से काम कर पाएगा, जब हम जागरूक रहेगे. खासकर समाज में महिला और बच्चियों के साथ हो रहे अपराधों को रोकना है तो हमें दोषियों को ऐसी कठोर से कठोर सजा दिलानी चाहिए कि वे नजीर बन जाए. हमने कई बार देखा हैं इस तरह के अपराधियों को हमारा समाज जाति और धर्म के नाम पर उनको प्रश्रय देता है तथा बचाव कर जाता हैं.

रक्षा बंधन के इस पर्व पर हम प्रण ले कि चाहे किसी बहिन बेटी का साथ को गलत कर रहा हो चाहे वह हमारा भाई ही क्यों न हो उसे हम कठोर से कठोर दंड देगे. अपराध कानून के डर से समाप्त नहीं होंगे, बल्कि जब समाज उन लोगों के खिलाफ एकजुट होकर एक स्वर में उन्हें दंड देने की बात करेगा तभी हमारी बहिनों समाज में निर्भय होकर जी सकेगी.

जीवन में हम निरंतर प्रतीकात्मक बनते जा रहे हैं. कुछ खाली वक्त में जरा सोचिये हमने अब तक रक्षा बंधन के 15 से 20 पर्व तो कम से कम मना ही लिए होंगे. हर बार हमने बहिन से रक्षा का सूत्र बंधवाकर उनके सिर पर हाथ रखा हैं. ईमानदारी से स्वयं का आंकलन करे हमने कितनी बार अपनी बहिन की सही मायनों में रक्षा की. कब हमने उसे बुरे वक्त में हालचाल जाना, उसके किसी संकट में हाथ बंटाया. एक भाई का बहिन के प्रति दायित्व यह होता है कि वह सदैव निर्भय होकर जिये, उन पर आने वाली सभी परेशानी उसके भाई की जिम्मेदारी है कि वह उसका समाधान करें.

मैं अपने रक्षा बंधन के भाषण के अंतिम में बस इतना कहना चाहूँगा, हां हम बहिन से राखी बंधवाए उनका आदर सत्कार करे उसे अच्छे अच्छे उपहार भेंट करे. मगर ये उनके ख़ुशी के पल हैं जब हम उनके साथ हैं. जब कभी बहिन जरा सी परेशानी में हो तो उसका भाई सदैव उसके आगे खड़ा मिले, तभी सही मायनों में हम राखी बंधवाने के हकदार कहे जाएगे.

आपकों यह सलाह देना चाहूँगा, बहुत से भाई इस भ्रम में जीते हैं कि उनकी बहिन को कभी कोई परेशानी नहीं हुई, न ही उसने कभी आपको बताई. जीवन में हर इन्सान को हर कदम पर परेशानियां आती हैं. कई बार हम छोटी छोटी दिक्कतों को स्वयं हल कर लेते हैं तथा बड़ी परेशानियों में किसी को बताने की बजाय उससे बच बचकर जीते हैं. यदि बहिन ने अपने भाई को किसी परेशानी के बारे में नहीं बताया है तो निश्चय ही आपके बीच कुछ दूरियां है चाहे वह लज्जा, झिझक या डर के रूप में हो. और छोटी छोटी वजहें एक दिन किसी बड़े संकट को भी आपके साथ साझा करने से रोक देगी. इसलिए आप सभी से हाथ जोडकर निवेदन है भाई बहिन के बीच आज ही दूरियां मिटाए, रक्षा बंधन से बढकर ऐसा सुनहरा अवसर कभी नहीं हो सकता हैं.

इन्ही के साथ मैं अपने रक्षा बंधन भाषण को यही विराम देना चाहूँगा, मुझे उम्मीद है मैं जिन विचारों को आपके साथ साझा करना चाहता था आप मेरे भाव को समझ पाए होंगे तथा मेरी विनती को आप अवश्य इस रक्षाबंधन के पर्व पर अपने जीवन में उतारने का प्रयास करेंगे.

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उम्मीद करता हूँ दोस्तों Speech on Raksha Bandhan in Hindi 2020 रक्षा बंधन पर भाषण 2020 स्पीच का यह लेख आपकों पसंद आया होगा. रक्षाबंधन स्पीच 2020 में दी गई जानकारी आपकों अच्छी लगी हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ जरुर शेयर करें.

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