SSA- Sarva Shiksha Abhiyan In Hindi | सर्व शिक्षा अभियान हिंदी में

SSA- Sarva Shiksha Abhiyan In Hindi: शिक्षा सबके लिए (Education for all) के लक्ष्य की ओर अग्रसर भारत सरकार ने SSA यानी Sarva Shiksha Abhiyan की शुरुआत की हैं. आजादी के बाद से भारत में साक्षरता के स्तर को बढ़ाने के विभिन्न प्रयास किए गये थे. जिनमें SSA सफलतम एवं कारगर उपायों में से एक था. विश्व साक्षरता दिवस के अवसर पर आज आपके लिए essay on sarva shiksha abhiyan in hindi language- साक्षरता के अभियान पर सरल भाषा में निबंध (एस्से) एवं भाषण (स्पीच) यहाँ उपलब्ध करवा रहे हैं. कक्षा 1,2,3,4,5,6,7,8,9,10 के स्टूडेंट्स इस निबंध को 100,200,250,300,400,500 शब्दों के रूप में पढ़ सकते हैं.SSA- Sarva Shiksha Abhiyan In Hindi | सर्व शिक्षा अभियान हिंदी में

SSA- Sarva Shiksha Abhiyan In Hindi | सर्व शिक्षा अभियान हिंदी में

सर्व शिक्षा यानि सबके लिए शिक्षा. शिक्षा, जाति, धर्म, अमीर, गरीब के आधार पर प्रसारित न करके समान रूप से सभी बच्चों को उपलब्ध करवाना ही सर्व शिक्षा अभियान (SSA- Sarva Shiksha Abhiyan) हैं. इस अभियान के अंतर्गत सभी राज्य (राजस्थान, यूपी, बिहार, पंजाब, मध्यप्रदेश, गुजरात) एवं संघ शासित प्रदेश शामिल हैं.

तथा देश के 1203 लाख बस्तियों में अनुमानित 19.4 करोड़ बच्चें इसके अंतर्गत आते हैं. SSA- Sarva Shiksha Abhiyan भारत के सामाजिक क्षेत्र के महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में से एक हैं. सर्व शिक्षा अभियान के लक्ष्यों में प्रारम्भिक शिक्षा में सार्वभौमिक पहुच एवं लैंगिक अंतरों को समाप्त करना हैं.

प्राथमिक शिक्षा के सार्वभौमिकरण के अंतर्गत देश के सभी बच्चों के लिए पहली से लेकर आठवी कक्षा तक निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान करने का उद्देश्य सुनिश्चित किया गया हैं. इसमें इस बात पर जोर दिया जाता हैं कि इस अनिवार्य शिक्षा के लिए स्कूल बच्चों के घर के समीप हो तथा चौदह वर्ष तक के बच्चें स्कूल न छोड़े.

Essay On SSA Sarva Shiksha Abhiyan In Hindi

सर्व शिक्षा अभियान – SSA- Sarva Shiksha Abhiyan प्राथमिक शिक्षा के सार्वभौमिकरण से सम्बन्धित कुछ कार्यक्रम हैं. ओपरेशन ब्लैक बोर्ड, न्यूनतम शिक्षा स्तर, मध्यान्ह भोजन स्कीम, पोषाहार सहायता कार्यक्रम, जिला प्राथमिक शिक्षा कार्यक्रम, सर्वशिक्षा अभियान, कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालय, प्राथमिक शिक्षाकोष इत्यादि हैं.

सर्व शिक्षा अभियान (SSA- Sarva Shiksha Abhiyan) को सभी के लिए शिक्षा अभियान के नाम से भी जाना जाता हैं. इस अभियान के अंतर्गत ”सब पढ़े सब बढ़े” का नारा दिया गया हैं. यह अभियान भारत सरकार द्वारा 2000-01 में प्रारम्भ किया गया था.

इस सर्व शिक्षा अभियान- Sarva Shiksha Abhiyan के अंतर्गत निम्न लक्ष्य निर्धारित किए गये थे.

  • विद्यालय, शिक्षा गारंटी केन्द्रों, वैकल्पिक विद्यालयों या विद्यालय में वापस अभियान द्वारा वर्ष 2005 तक सभी बच्चों को विद्यालय में लाना.
  • वर्ष 2007 तक 5 वर्ष की आयु वाले सभी बच्चों की प्राथमिक शिक्षा पूरी करवाना.
  • वर्ष 2010 तक 8 वर्ष की आयु वाले बच्चों की प्रारम्भिक शिक्षा पूरी करवाना
  • जीवन के लिए शिक्षा पर बल देते हुए संतोषजनक गुणवत्ता की प्रारम्भिक शिक्षा पर ध्यान केन्द्रित करना.
  • वर्ष 2007 तक प्राथमिक चरण और वर्ष 2010 तक प्रारम्भिक स्तर पर आने वाले सभी लिंग सम्बन्धी और सामाजिक श्रेणी के अंतराल को खत्म करना.

इन लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए ऐसी कार्यनीतियाँ बनाई गई जिनमें प्रखंड स्तर के संसाधन केन्द्रों की स्थापना हेतु स्थानीय समुदाय समूहों एवं संस्थागत क्षमता निर्माण को सक्रिय रूप में शामिल किया गया. इस अभियान की रूपरेखा में शिक्षकों की नियुक्ति, उनका प्रशिक्षण, माता पिता तथा छात्रों को प्रेरित करना, छात्रवृत्ति, वर्दी, पाठ्यपुस्तकों आदि प्रोत्साहनो के प्रावधान शामिल थे.

Sarva Shiksha Abhiyan कार्यक्रम के अंतर्गत उन क्षेत्रों में नयें विद्यालय खोलने का भी लक्ष्य रखा गया था, जहाँ विद्यालयी सुविधाएं कम हैं. अतिरिक्त कक्षा कक्षों, शौचालय, पेयजल सुविधाओं आदि निर्मित करने सम्बन्धी प्रावधानों के माध्यम से तत्कालीन विद्यालय मूल सरंचना को सुद्रढ़ करने का लक्ष्य रखा गया था.

Speech On SSA Sarva Shiksha Abhiyan In Hindi

सर्व शिक्षा अभियान में वार्षिक तौर पर 15,000 करोड़ रूपये का बजट हैं. इस अभियान के अंतर्गत न केवल 99 प्रतिशत बच्चों की प्राथमिक स्कूल में भागीदारी बढ़ाई हैं, 3-4 प्रतिशत 6-14 वर्ष के बच्चों को स्कूल छोड़कर जाने से भी रोका हैं. SSA कार्यक्रम के अंतर्गत विशेषकर बालिका, पिछड़ी जाति, जनजाति के बच्चों और गरीब बच्चों पर ध्यान दिया गया हैं.

मौटे तौर पर सर्वशिक्षा अभियान की उपलब्धियां इस प्रकार रही हैं. स्कूल दाखिला अनुपात जो वर्ष 1950-51 में 31.1 प्रतिशत था, वर्ष 2003-04 में बढ़कर 85 प्रतिशत हो गया. वर्ष 2001 में विद्यालय नही जाने वाले बच्चों की संख्या 3.2 करोड़ थी, जो 2005 में घटकर 95 लाख हो गई.

वर्ष 2001 के बाद लगभग दो लाख नयें स्कूल खोले गये. लगभग 5 लाख नयें शिक्षकों की नियुक्ति की गई. प्रथम कक्षा से आठवी कक्षा तक पढ़ने वाली सभी लड़कियों एवं अनुसूचित जातियों/ जनजातियों के लगभग 6 करोड़ बच्चों निशुल्क पाठ्यपुस्तकें वितरित की गई.

इस तरह यदपि सर्व शिक्षा अभियान (SSA Sarva Shiksha Abhiyan) के फलस्वरूप विद्यालय छोड़ने वाले बच्चों की संख्या में भारी कमी लाने में सफलता प्राप्त हुई हैं.

सर्व शिक्षा अभियान हिंदी में

सर्व शिक्षा अभियान SSA को और अधिक प्रभावशाली बनाने के उद्देश्य के साथ वर्ष 2018 में शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू किया गया. शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 राज्य, परिवार और समुदाय की सहायता से 6 से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों के लिए मुफ्त एवं अनिवार्य गुणवत्तापूर्ण प्राथमिक शिक्षा सुनिश्चित करता हैं.

यह अधिनियम मूलतः वर्ष 2005 के शिक्षा के अधिकार अधिनियम का संशोधित रूप हैं. वर्ष 2002 में संविधान के 86वें संशोधन द्वारा अनुच्छेद 21 ए के भाग 3 के माध्यम से 6 से 14 वर्ष तक के सभी बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध करवाने का प्रावधान किया गया हैं. इसको प्रभावी बनाने के लिए 4 अगस्त 2009 को लोकसभा में यह अधिनियम पारित किया गया जो 1 अप्रैल 2010 को पूरे देश में लागू हुआ और इसी के साथ भारत शिक्षा को मौलिक अधिकार का दर्जा देने वाले विश्व के अन्य 135 देशों की सूची में शामिल हो गया.

इस अधिनियम की मुख्य विशेषता- 6 से 14 वर्ष आयु वर्ग वाले सभी बच्चों को मुफ्त और आधारभूत शिक्षा उपलब्ध करवाना हैं. इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए बच्चों से किसी प्रकार का शुल्क नही लिया जाएगा और नही ही उन्हें शुल्क अथवा किसी खर्च की वजह से आधारभूत शिक्षा से वंचित नही किया जाएगा.

यदि 6 से अधिक उम्रः का कोई बच्चा किन्ही कारणों से विद्यालय नही जा पाता हैं तो इसे उसकी उम्रः के अनुसार उचित कक्षा में प्रवेश दिया जाएगा. इस अधिनियम के प्रावधानों को क्रियान्वित करने के लिए सम्बन्धित सरकार और स्थानीय प्रशासन को यदि आवश्यक हुआ तो विद्यालय भी खोलना होगा.

अधिनियम के तहत यदि किसी क्षेत्र में विद्यालय नही हैं तो वहां तीन वर्ष की अवधि में विद्यालय का निर्माण करवाना आवश्यक हैं. सत्र के दौरान छात्र कभी भी प्रवेश पा सकता हैं. उम्रः प्रमाण पत्र नही होने की स्थिति में भी किसी भी बच्चें को प्रवेश से वंचित नही किया जाएगा. राज्य सरकारों को बच्चों की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए लाइब्रेरी, क्लाशरूम, खेल का मैदान और अन्य जरुरी सभी वस्तुएं उपलब्ध करवानी होगी.

शिक्षा की गुणवत्ता में अनिवार्य सुधार के लिए एक शिक्षक पर अधिकतम 40 छात्र सुनिश्चित करना एवं इसके लिए नयें शिक्षकों की भर्ती करना उन्हें प्रशिक्षित करना. स्कूल शिक्षकों को पांच वर्ष के भीतर समुचित व्यवसायिक डिग्री प्राप्त नही होने की स्थिति में उन्हें नौकरी से वंचित किया जा सकता हैं.

स्कूल का बुनियादी ढांचा 3 वर्षों के भीतर नही सुधारने की स्थति में उसकी मान्यता रद्द की जा सकती हैं. सभी निजी स्कूलों की कक्षा 1 में प्रवेश देने में आर्थिक रूप से कमजोर समुदायों के लिए 25 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया हैं. इस अधिनियम के प्रावधानों को प्रभावी बनाने की जिम्मेदारी केंद्र एवं राज्य सरकार दोनों की हैं. वित्तीय खर्च भी दोनों सरकारों द्वारा वहन किया जाएगा.

SSA Sarva Shiksha Abhiyan Rajasthan U.P

वर्ष 2010 तक सर्व शिक्षा अभियान (SSA Sarva Shiksha Abhiyan) का लक्ष्य पूरा नही हुआ और इसी वर्ष शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू हो गया. इस अधिनियम में सर्वशिक्षा अभियान के सभी लक्ष्य समाहित हैं. इसलिए केंद्र सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने दिसम्बर 2010 में यह निर्णय लिया कि सर्व शिक्षा अभियान को शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू करने का प्रमुख साधन बनाया जाएगा.

इसलिए संशोधित सर्व शिक्षा अभियान से सम्बन्धित अधिनियम 2011 में लागू किया जाएगा. केंद्र सरकार ने शिक्षा के अधिकार अधिनियम को लागू करने के उद्देश्य से सर्वशिक्षा अभियान कार्यक्रम के मानकों में संशोधन किया हैं. संशोधित मानकों में छात्र शिक्षक अनुपात अधिदेश के अनुसार शिक्षकों की व्यवस्था का प्रावधान हैं.

संशोधित सर्व शिक्षा अभियान (SSA Sarva Shiksha Abhiyan) कार्यक्रम लागू करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार से धन मुहैया कराने का अनुपात 65:35 तय किया गया हैं. पूर्वोत्तर के आठ राज्यों के लिए यह अनुपात 90:10 का होगा. इस तरह सर्व शिक्षा अभियान कार्यक्रम को शिक्षा के अधिकार अधिनियम के अनुरूप बना दिया गया हैं.

सर्व शिक्षा अभियान 2018 पीडीऍफ़ निबंध

किसी भी प्रजातांत्रिक देश में शिक्षित नागरिकों का बड़ा महत्व होता हैं. शिक्षा द्वारा ही आर्थिक आवश्यकताओं को पूरा करने लिए हर स्तर पर जनशक्ति का विकास होता हैं. शिक्षा के आधार पर ही अनुसंधान और विकास को बल मिलता हैं. इस तरह शिक्षा वर्तमान ही नही भविष्य निर्माण में भी अनुपम साधन हैं.

इन सब दृष्टिकोणों से भी शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाने का महत्व स्पष्ट हो जाता हैं. शिक्षा ही मनुष्य को विश्व के अन्य प्राणियों से अलग कर उसे श्रेष्ठ एवं सामाजिक प्राणी के रूप में जीवन जीने के काबिल बनाती हैं. इसके अभाव में न केवल समाज का बल्कि पूरे देश का विकास अवरुद्ध हो जाता हैं.

शिक्षा के इन्ही महत्व को देखते हुए भारत सरकार ने सबके लिए शिक्षा को अनिवार्य करने के उद्देश्य से शिक्षा का अधिकार अधिनियम पारित करके प्रशंसनीय कार्य किया हैं. इस कड़ी में सर्व शिक्षा अभियान (SSA Sarva Shiksha Abhiyan) को इसका सहयोगी बनाना निसंदेह अत्यधिक लाभप्रद सिद्ध होगा.

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