Maa durga Aarti Temple Katha | Story Of Maa Durga In Hindi

Maa durga Aarti Temple Katha | Story Of Maa Durga In Hindi

goddess durga story: श्री दुर्गा की कथा-एक समय भारतवर्ष मे दुर्गम नामक राक्षस हुआ करता था। उसके डर से प्रथ्वी ही नही स्वर्ग और पाताल लोक मे निवास करने वाले लोंग भी भयभीत रहते थे।

ऐसी विपत्ति के समय भगवान की शक्ति ने दुर्गा या दुर्गसेनी के नाम से अवतार लिया और दुर्गम राक्षस को मार कर ब्राह्मणों और हरि भक्तों की रक्षा की। दुर्गम राक्षस को मारने के कारण ही तीनों लोक मे इनका नाम दुर्गा देवी प्रसिद्ध हो गया।

देवी का नाम: – माँ दुर्गा, शक्ति (দুর্গা)
वाहन: – बाघ
पति: – शिव
अस्त्र-शस्त्र: – गदा, धनुष, शंख, तलवार
मंत्र: – ॐ दुर्गा देव्यैः नमः ॐ एं ह्रीं क्लीं चामुण्डायैः विच्चे
विशेष पूजा समय: – नवरात्र (चैत्र व आश्विन)

Maa durga Aarti Temple Katha | Story Of Maa Durga In Hindi

Katha & Story Of Maa Durga In Hindi

durga maa story- बाघ पर सवारी करने वाली माँ दुर्गा हिंदुओं की मुख्य देवी हैं। शाक्त संप्रदाय की कुलदेवी के रूप मे इनकी पूजा की जाती हैं। इन्हे शक्ति अथवा देवी के नाम से भी भक्त पुकारते हैं। निर्भया स्त्री के रूप में इन्हें शक्ति, प्रधान प्रकृति, गुणवती माया, बुद्धितत्व प्रदान करने वाली मानी गयी हैं।

धार्मिक ग्रन्थों में भी देवी दुर्गा के बारे में प्रयाप्त उल्लेख मिलता हैं, पुराण इन्हें आदि शक्ति का स्वरूप बताते हैं। वही उपनिषद में हिमालय की बेटी बताया गया हैं। दुर्गा को सावित्री, लक्ष्मी तथा पार्वती तीनों का संयुक्त रूप बताया जाता हैं, जिनहोने ब्रह्मा विष्णु तथा महादेव तीनों से विवाह किया था।

ब्राह्मणी, महेश्वरी, भीमादेवी, आदिशक्ति, शाकम्भरी, रक्तदन्तिका, वैष्णवी, ऐन्द्री, शिवदूती, कौमारी, भ्रामरी, वाराही, नरसिंही ये सभी देवी दुर्गा के ही रूप माने गए हैं। जिनमें से काली अवतार दुर्गा का सबसे विभित्स रूप हैं, जों साक्षात काल (म्रत्यु की देवी) के रूप मे जानी जाती हैं। जों भक्त ॐ दुर्गा देव्यैः नमः ॐ एं ह्रीं क्लीं चामुण्डायैः विच्चे दुर्गा मंत्र का नित्य जाप कर आरती कथा व भजन का श्रवण करते हैं, माँ उनके सभी दुखों का हरण कर जीवन को मंगलमय बनाती हैं।

माँ दुर्गा की आरती  (Maa durga Aarti In Hindi)

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सुन मेरी देवी पर्वत वासिनी तेरा पार न पाया ॥
पान सुपारी ध्वजा नारियल ले तेरी भेट चढ़ाया ॥
सूवा चोली तेरे अंग विराजे केशर तिलक लगाया ॥
ब्रह्मा वेद पढ़े तेरे द्वारे शंकर ध्यान लगाया ॥
नगे नंगे पग तेरे अकबर आया सोने का छत्र चढ़ाया ॥
ऊंचे ऊंचे पर्वत बनयों दिवाला नीचे शहर बसाया ॥
कलियुग द्वापर त्रेता मध्ये कलियुग राज बसाया ॥
धूप दीप नैवेध आरती मोह न भोग लगाया ॥
ध्यानू भक्त तेरा गुण गावे मन वांछित फल पाया ॥
जय अम्बे गौरी मैया जल मंगल मूर्ति मैया जय आनंद करनी ॥

तमूकों निशदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिवजी ॥
मांग सिंदूर विराजत टीको म्रग मद को ॥
उज्ज्वल से दोउ नैना चंद्र वंदन नीको ॥
कनक समान कलेवर रक्ताबर राजै रक्त पुष्प गल क्ंठन पर साजे ॥
केहरि वाहन राजत खड़ग खप्पर धारी ॥
सूर नर मुनि जन सेवत तिनके दुख हारी॥
कानन कुंडल शोभित नाशाग्र मोती ॥
कोटिक चंद्र दिवाकर सम राजत ज्योति ॥

शुम्भ निशुम्भ विदारे महिषासुर घाती ॥
धूम्र विलोचन नैना निशि दिन मदमाती ॥
चौठ्स योगिन गावत न्रत्य करत भैरु ॥
बाजत ताल म्रदंग अरु बाजत डमरू ॥
भुजा चार अति शोभित खड़ग खप्पर धारी ॥
मन वांछित फल पावत सेवत नर नारी ॥
कंचन थाल विराजत अगर कपूर की बाती॥
श्री मालकेतु मे राजत कोटि रतन ज्योति ॥
या अम्बे की आरती जो कोई नर गावे ॥
भजत शिवानंद स्वामी, सुख संपति पावे ॥

माँ दुर्गा और शेर से जुड़ी पौराणिक कथा (durga maa story)

पार्वती (सती) ने शिवजी को अपने पति रूप मे वरन करने के लिए कठोर तपस्या की, सैकड़ों वर्षों की तपस्या के चलते उनके शरीर का रंग सांवला हो गया था। भोलेनाथ ने एक दिन भूलवंश उन्हे काली कह दिया। ये शब्द पार्वती को इतने चुभे कि वह तपस्या के लिए घर से निकाल गयी। उन्होने मन ही मन प्रण किया कि जब तक उसका शरीर गौरा नहीं हो जाएगा। वह तपस्या को छोड़ेगी नहीं।

इस तरह उन्हे तपस्या मे कई साल बीतने लगे एक दिन जंगल मे भूखे सिंह को पार्वती दिखाई दी। शेर उन्हे खाने के उद्देश्य से नजदीक आया मगर ध्यान मे मग्न पार्वती के पास आते ही उसका मन बदल गया तथा वह भी पार्वती के पास भूखा प्यासा बैठा रहा। पार्वती की कठोर तपस्या से शिव प्रसन्न हुए उन्हें गौरी बनने का वरदान दे दिया। पार्वती ने तब गंगा स्नान करने का निश्चय किया। जब वह स्नान कर बाहर निकली तों गौरे रंग की देवी के रूप मे गौरी कहलाई।

प्राणियों को जीवित खा जाने वाला शेर तब भी पार्वती की राह देख रहा था। पार्वती उस शेर का अपने प्रति लगाव देखकर आश्चर्यचकित थी। उन्होने शेर को आशीर्वाद देकर अपना वाहन बना दिया।

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