Story on self dependent in Hindi- स्वावलम्बन पर प्रेरक कहानी

Story on self dependent in Hindi- स्वावलम्बन पर प्रेरक कहानी

Story on self dependent in Hindi- स्वावलम्बन पर प्रेरक कहानी

प्राचीन समय की बात हैं. इस्लामिक देशों के लोगों में हातिमताई अपनी दानशीलता के लिए दूर दूर तक विख्यात था. वह सबको खुले मन से दान देता था. सब उसकी वाहवाही करते थे.

एक दिन उसने सभी के लिए सामूहिक भोज का आयोजन करवाया, कोई भी राज्य का व्यक्ति उसमें आ सकता था. हातिमथाई अपने मंत्रियों व सैनिकों के साथ अपने ख़ास रिश्तेदारों को न्यौता देने जा रहा था.

राह चलते चलते उसने पाया कि एक लकड़हारे ने लकड़ियों का एक गट्ठा तैयार कर रखा था. वह अपनी आजीविका उन लकड़ियों को बेचकर चलाता था. वह पसीने से लथपथ और थक कर निढ़ाल अवस्था में बैठा था.

हातिमताई उससे बोला- ओ महाशय जब हातिमताई सामूहिक भोज देता है, तो तुम इतनी मेहनत क्यों करते हो, क्यों न तुम भी उस भोज में आ जाते हो.

लकड़हारा भारी स्वर में बोला- जो अपनी मेहनत की खाते हैं उसे किसी हातिमताई की उदारता की जरूरत नहीं हैं.

हातिमताई भौछ्क्का होकर उसे देखता ही रह गया.

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